क्या अब निजी अस्पतालों में भी पैसा देकर लगवाई जा सकेगी कोरोना वैक्सीन?

कोरोना का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है.  (news18 English)

कोरोना का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है. (news18 English)

कोरोना टीकाकरण के दूसरे चरण (second phase of corona vaccination) में सरकारी अस्पतालों के साथ प्राइवेट अस्पताल भी शामिल होंगे. साथ ही ये फेज कई मामलों में पहले चरण से अलग होगा.

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  • Last Updated: February 26, 2021, 12:42 PM IST
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आने वाले 1 मार्च से देश में कोरोना टीकाकरण का दूसरा चरण शुरू हो रहा है. इसमें 45 साल से ऊपर के आयुवर्ग के किसी क्रॉनिक बीमारी से पीड़ित और 60 साल से ज्यादा के लोगों को वैक्सीन मिलेगी. इस चरण की खास बात ये है कि इसमें सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पताल और क्लिनिक भी शामिल होंगे.

क्या खरीदा जा सकेगा टीका
सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में टीकाकरण यानी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक टीके की पहुंच. तो क्या पैसे देकर कोई भी अपने लिए टीका खरीद सकेगा? ये जानने से पहले एक बार ये भी समझ लें कि आखिर टीकाकरण में प्राइवेट सेक्टरों को शामिल करने की जरूरत क्यों पड़ी, जबकि अब तक सरकारी तौर पर ही टीकाकरण हो रहा था.

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निजी और सरकारी को क्यों जोड़ा जा रहा है


निजी अस्पतालों को कोरोना की वैक्सिनेशन प्रक्रिया से जोड़ने की बात कई हफ्तों से हो रही थी. इसकी वजह है टीकाकरण की रफ्तार. पहले चरण में सारा काम सरकारी महकमों के ही हाथ में रहा. इस दौरान टीकाकरण की औसत गति लगभग 4 लाख टीका प्रतिदिन थी. ऐसे तो ये एक बड़ा आंकड़ा है लेकिन आबादी के लिहाज से अगर यही गति रही तो हर्ड इम्युनिटी लायक आबादी के टीकाकरण में ही दशकभर लग जाएगा. यानी पूरे 10 सालों तक देश कोरोना संक्रमण के खतरे में जीता रहेगा.

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देश के कई राज्यों में कोरोना का कोहराम एक बार फिर मचने लगा है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


पहले रोज 13 लाख वैक्सीन देने की योजना थी 
इसी आशंका को देखते हुए इसमें सरकारी के साथ निजी सेक्टरों को भी जोड़ने की बात चली. इसमें एक बड़ा फैक्ट वो डाटा भी रहा, जिसके मुताबिक रोजाना 13.27 लाख लोगों को वैक्सीन देने की योजना थी. अब अभियान में तेजी लाने के लिए 10 हजार सरकारी केंद्रों, जबकि करीब 20 हजार प्राइवेट क्लिनिकों पर टीका लगाया जाएगा. इस दौरान वैसे तो 60 से अधिक की उम्र वालों को टीका मिलेगा, लेकिन उन्हें भी वैक्सीन दी जाएगी, जो कैंसर, डायबिटीज किडनी फेलियर या दूसरी किसी क्रॉनिक बीमारी से जूझ रहे हैं.

सरकारी केंद्र मुफ्त वैक्सीन देंगे
हालांकि पहले और दूसरे चरण में एक बड़ा फर्क रहेगा. पहले चरण में जहां हेल्थवर्कर्स को मुफ्त में वैक्सीन दी गई, वहीं दूसरे फेज में ये दो हिस्सों में बंटा दिखेगा. सरकारी केंद्रों में अब भी मुफ्त में टीका लगेगा, जबकि निजी केंद्रों में इसके लिए शुल्क होगा. हालांकि ये शुल्क कितना होगा, इसपर अभी चर्चा चल ही रही है.

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कितनी कीमत हो सकती है 
अनुमान है कि कोरोना वैक्सीन की कीमत 300 रुपए हो सकती है, वहीं एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज यानी उसे लगाने की कीमत 100 रुपए से लेकर कुछ कम-ज्यादा भी हो सकती है. बता दें कि एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज निजी अस्पतालों में 300 से 500 रुपए तक भी होता है. यहां ये बात भी समझने की है कि कोरोना का टीकाकरण दो फेज में दिया जा रहा है. एक बार टीकाकरण की कीमत अगर 400 रुपए भी हो तो कुल दोनों डोज लेने की लागत 800 रुपए तक आ सकती है. वो भी तब, जब प्राइवेट अस्पताल अपना एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज 100 रुपए ही रखें.

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सरकारी केंद्रों में अब भी मुफ्त में टीका लगेगा, जबकि निजी केंद्रों में इसके लिए शुल्क होगा


जाहिर है कि अगर ऐसा होता है तो लोग निजी अस्पताल जाने की बजाए सरकारी अस्पतालों का ही इंतजार करेंगे. ऐसे में प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है. यही कारण है कि एडमिनिस्ट्रेशन फीस पर काफी बात हो रही है.

रजिस्ट्रेशन करवाना होगा
फिलहाल ये पता नहीं चला है कि क्या लोगों को टीका चुनने की सुविधा होगी या सरकार निजी अस्पतालों को भी किसी एक तरह का टीका ही उपलब्ध कराएगी. बता दें कि देश में फिलहाल कोवैक्सीन और कोविशील्ड को मंजूरी मिल चुकी है और दोनों ही टीके प्रभावी बताए जा रहे हैं. जो भी हो, टीकाकरण के लिए सबको पहले रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है ताकि सरकार के पास टीकाकरण का सही डाटा रह सके. ये रजिस्ट्रेशन कोविन ऐप पर होगा.

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टीकाकरण के दूसरे चरण के पहले ही देश के कई राज्यों में कोरोना का कोहराम एक बार फिर मचने लगा है. केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब में कोरोना संक्रमण एक बार फिर तेज हुआ है. इस बीच देश में वायरस की दूसरी लहर की आशंका तेज हो गई. इसके बाद भी लोग मास्क पहनने और फिजिकल डिस्टेंसिंग जैसी सतर्कता पहले ही तरह नहीं बरत रहे. ये सब देखते हुए निजी सेक्टरों का टीकाकरण में आना बेहतर ही हो सकेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है.
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