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भारतीय वायुसेना के चंडीगढ़ बेस में होती है MI 17 चॉपर्स की देखरेख

भारतीय वायुसेना के चंडीगढ़ बेस में होती है MI 17 चॉपर्स की देखरेख

MI 17 हेलीकॉप्टर का पूरा रखरखाव चंडीगढ़ के 3 बेस रिपयेर डिपो में होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

MI 17 हेलीकॉप्टर का पूरा रखरखाव चंडीगढ़ के 3 बेस रिपयेर डिपो में होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

भारतीय वायु सेना (IAF) का एमआई-17 हेलीकॉप्टर (Mi 17 Helicopter) की देखरेख पूरी तरह से भारत में ही हो रही है. पांच साल पहले तक इसके इंजन की जांच, देखरेख और मरम्मत देश में नहीं होती थी. लेकिन चंडीगढ़ में भारतीय वायुसेना के 3 बेस रिपेयर डिपो (3 BRD) ने यह काम भी अपने हाथ में ले रखा है. ये हेलीकॉप्टर बहुत ही बढ़िया सेवा प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं.

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    जनरल बिपिन रावत (General Bipin Rawat) की मौत जिस चॉपर की दुर्घटना में हुई थी, उस एमआई हेलीकॉप्टर (MI Helicopeter) की यह पहली दुर्घटना नहीं है. इससे पहले ही वह भी कई बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है. वैसे तो इस दुर्घटना की जांच के आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन इस हेलीकॉप्टर की विशेषताओं और क्षमताओं की उपयुक्तता जांच एक बार जरूर होगी, ऐसा भी माना जा रहा है. आठ साल पहले देश में पहली बार आए इन हेलीकॉप्टरों का रखरखाव चंडीगढ़ स्थित भारतीय वायुसेना के 3 बेस रिपेयर डिपो में होता रहा है.

    रूस से समझौते के तहत मिले थे ये हेलीकॉप्टर
    साल 2008 में भारत और रूस के बीच हुए 1.3 अरब के समझौते में Mi-17V5 हेलीकॉप्टर की आपूर्ति किया जाना तय हुआ था जिसकी डिलिवरी 2011 में शुरु हुई थी और फरवरी 2013 तक 36 हेलीकॉप्टर भारत आ गए थे. हो गई थी. ये एडवांस्ड ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर सामान ढुलाई, पैट्रोलिंग, सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जैसे कार्यो के लिए बहुत उपयुक्त माने जाते हैं.

    पहले कंपनी ही करती थी रखरखाव
    इनका निर्माण रूसी कंपनी कजान हेलीकॉप्टर्स ने किया था. पहले इन इंजनों का रखरखाव भी आपूर्तिकर्ता ने किया था जिसकी शर्तें इनकी खरीदी के करार में शामिल थी. लेकिन 2018 से चंडीगढ़ स्थित भारतीय वायुसेना के 3 बेस रिपेयर डिपो को इसके VK-2500 इंजन के सुधार और ओवरहॉल तकनीक को स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई थी.

    बहुत जरूरी था ये
    हेलीकॉप्टर के पूरे रखरखाव के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भरता के लिहाज से यह एक बहुत बड़ा कदम था. इससे सभी MI-17 V5 निर्माण के बाद की रखरखाव की सहयोग क्षमता सुनिश्चित करने के लिए निहायत ही जरूरी हो गया था. मेकइन इंडिया के तहत देश पर आर्थिक बोझ को कम करने के लिहाज से MI-17 V5 हेलीकॉप्टर के इंजनों का भारत में ही रखरखाव एक बड़ी आवश्यकता थी.

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    जनरल बिपिन रावत (General Bipin Rawat) की मौतके बाद MI 17 हेलीकॉप्टर की क्षमताओं पर संदेह किया जा रहा है. (फाइल फोटो)

    1962 में हुई थी स्थापना
    3BRD की स्थापना ही भारतीय वायुसेना ने फरवरी 1962 में रूस से मिले ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर, उनके इंजन और अन्य संबंधित उपकरणों के रखरखाव और मरम्मत के लिए की गई थी. यह डिपो पहले ही कई तरह के युद्ध उपकरणों के लिए रखरखाव और मरम्मत की सेवाएं दे चुका है जो 1965 और 1971 के युद्ध में उपयोग लाए गए थे. यह डिपो एएन-12, आईएल-14 विमान, एमआई-14 हेलीकॉप्टर, उनके इंजन और अन्य सामानों की जांच मरम्मत और रखरखाव कर चुका है.

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    खुद को बनाया इस लायक
    1980के दशक में 3BRD में एमआई-8, टीवी-2 एरोइंजन और वीआर8 एमजीबी की जांच और मरम्मत कर चुका है. इसके बाद डिपो ने खुद को एमआई-17 हेलीकॉप्टर और एआई-20 डी  इंजन आदि के रखरखाव के लिए भी खुद को उन्नत कर लिया और आज ह पूरी तरह से इन हेलीकॉप्टर की इंजन सहति देखरेख करता है.

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    MI 17 हेलीकॉप्टर (Mi 17 Helicopter) को रूस से साल 2008 के समझौते के तहत हासिल किया गया था. (फाइल फोटो)

    3BRD ने दिए हैं अच्छे नतीजे
    माना जाता रहा है कि रूस के एमआई-17 हेलीकॉप्टर शांति और युद्ध बहुत बढ़िया सेवाए दे रहे हैं. लेकिन अब ये इतनी ज्यादा संख्या में हो चुके हैं कि देश में ही इनकी देखरेख और मरम्मत करना जरूरी हो गया था. 3BRD ने बहुत ही जल्दी इनके रखरखाव के लिए खुद को पूरी तरह से तैयार किया है.

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    अभी देश को सैन्य उपकरणों और हथियारों के रखरखाव में आत्मनिर्भर होने की बहुत जरूरत है. इस मामले में 3BRD अभी उम्मीद से बढ़ कर नतीजे दे रहा है, लेकिन अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है. देश को हथियारों की निर्माण में आत्मनिर्भर होने के लिए पहले रखरखाव में आत्मनिर्भर होना होगा.

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