PAK के अलावा इन 4 मुल्कों में भी हैं शक्तिपीठ, सालभर आते हैं श्रद्धालु

नवरात्रि के दौरान देश के कई राज्यों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना होती है- सांकेतिक फोटो (flickr)

नवरात्रि के दौरान देश के कई राज्यों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना होती है- सांकेतिक फोटो (flickr)

Chaitra Navratri 2021: दुनिया के विभिन्न हिस्सों में देवी के 51 शक्तिपीठ (Shaktipeeth) हैं. ये वो जगहें हैं, जहां मान्यता के अनुसार देवी सती के अंग, उनके कपड़े या आभूषण गिरे. भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, तिब्बत, नेपाल और श्रीलंका में भी शक्तिपीठ हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 11, 2021, 3:03 PM IST
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इस साल चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) मंगलवार, 13 अप्रैल से शुरू हो रही है. इस दौरान देश के कई राज्यों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना होती है. देश में तो देवी के कई प्रसिद्ध और सिद्ध मंदिर हैं. लेकिन पाकिस्तान (Pakistan) में भी देवी का सिद्ध मंदिर है जिसकी देखरेख तो पाकिस्तानी करते ही हैं, उनकी इस मंदिर में भी उनकी आस्था भी कम नहीं है.

बलूचिस्तान में हिंगलाज मंदिर 

हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित हिंगलाज माता मंदिर की. इसे हिंगलाज भवानी मंदिर भी कहा जाता है. कहा जाता है कि यह मंदिर 2000 साल से भी अधिक पुराना है. बलूचिस्तान में हिंगोल नदी के तट पर चंद्रकूप पर्वत पर बसा यह मंदिर बहुत सिद्ध माना जाता है. यहां जाने का रास्ता बहुत मुश्किल है लेकिन भक्त और श्रद्धालु साल भर इस मंदिर में आते हैं. नवरात्रि के दौरान यहां मेला लगता है जहां हजारों की संख्या में हिंदू और मुसलमान बड़ी संख्या में आते हैं.

शक्तिपीठ की कहानी देवी सती के आत्मदाह से जुड़ी
हिंदू मान्यता के अनुसार जब भगवान शिव और देवी सती के विवाहोपरांत सती के पिता दक्ष ने भगवान शंकर का अपमान किया तो देवी सती ने आत्मदाह कर लिया. जब शंकर जी को अपनी पत्नी की मृत्यु का समाचार मिला तो वो गुस्से में भर उठे और उनके शरीर को लेकर यहां-वहां भटकने लगे. इस वजह से देवी का शरीर 51 अलग-अलग स्थानों पर गिरता गया. जहां अब शक्तिपीठ हैं.

shaktipeeth navratri 2021
बलूचिस्तान में स्थित हिंगलाज माता मंदिर बहुत सिद्ध माना जाता है


मंदिर इसलिए है खास 



हिंगलाज मंदिर वहां स्थित है जहां देवी सती का सिर गिरा था. इसीलिए मंदिर में माता अपने पूरे रूप में नहीं दिखतीं, बल्कि उनका सिर्फ सिर नजर आता है. इस मंदिर की स्थानीय लोगों में काफी मान्यता है.पाकिस्तानियों के लिए यह मंदिर नानी का मंदिर है. नानी के इस मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपना सिर झुकाते हैं.

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कई अलग मान्यताएं भी हैं 

यह शक्तिपीठ बहुत सिद्ध है और दुनियाभर के हिन्दुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. यह भी मान्यता है कि जो भी भक्त 10 फीट लंबी अंगारों की एक सड़क पर चलते हुए माता के दर्शन करने पहुंचे, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी. इस मान्यता के कारण बहुत से लोग ऐसी कोशिश करते हुए जख्मी भी हो जाते हैं.

क्या भारतीय वहां जा सकते हैं?

मंदिर पहुंचने का रास्ता जितना मुश्किल है, उतना ही सुंदर भी. यहां काफी हरियाली है, और पुरानेपन की झलक दिखती है. वैसे मंदिर बहुत बड़ा नहीं है लेकिन प्राचीन बहुत है. कई बार लोग जानना चाहते हैं कि अगर देवी मंदिर है तो क्या भारतीय यहां दर्शन के लिए जा सकते हैं? वहां जाने के लिए भारतीयों को पाकिस्तान सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है. अगर सबकुछ सही हो तो सरकार शायद अनुमति दे दे.

श्रीलंका में इन्द्राक्षी या लंका शक्तिपीठ


श्रीलंका में इंद्राक्षी या लंका शक्तिपीठ

श्रीलंका में लंका शक्तिपीठ है. जाफना के नल्लूर में स्थित इस मंदिर के बारे में माना जाता है कि यहां देवी सती की पायल गिरी थी. यहां की शक्ति को इन्द्राक्षी कहा जाता है, यही वजह है कि इस शक्तिपीठ को इन्द्राक्षी शक्तिपीठ भी कहते हैं. भगवान राम और देवराज इंद्र ने भी यहां पर देवी की पूजा की थी. रावण के बारे में माना जाता है कि वो शिव और शक्ति का बड़ा उपासक था और उसने भी युद्ध से पहले यहां शक्ति पूजा की थी.

तिब्बत में मानस शक्तिपीठ स्थित है

यहां सती की बाईं हथेली गिरी थी. मानसरोवर के तट बने इस शक्तिपीठ को काफी प्रभावशाली माना जाता है और न केवल नवरात्र, बल्कि साल के सभी ठीक मौसमों में यहां जाने वालों की भीड़ रहती है. तिब्बती धर्मग्रंथ 'कंगरी करछक' में मानसरोवर की देवी 'दोर्जे फांग्मो' का यहां निवास कहा गया है.

नेपाल में हैं दो शक्तिपीठ

नेपाल के काठमांडू में एक शक्तिपीठ है, जिसे गुजयेश्वरी मंदिर पीठ कहा जाता है. मान्यता है कि यहां देवी सती के दोनों घुटने गिरे थे. यहां की शक्ति को महाशिरा कहा जाता है. मंदिर पशुपतिनाथ मंदिर के पास बागमती नदी के तट पर बना हुआ है. मंदिर को 17वीं सदी में नेपाल के राजा राजा प्रताप मल्ल ने बनवाया था. इसके अलावा नेपाल में एक और शक्तिपीठ है, जिसे गंडकी शक्तिपीठ कहते हैं. यहां सती का कपोल गिरा माना जाता है. यहां की देवी को गंडकी कहते हैं.

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नेपाल के काठमांडू में एक शक्तिपीठ है, जिसे गुजयेश्वरी मंदिर पीठ कहा जाता है


बांग्लादेश में चार पीठ स्थित हैं

पड़ोसी मुस्लिम-बहुल देश बांग्लादेश में देवी के चार शक्तिपीठ स्थित हैं. एक पीठ यहां खुलना नामक क्षेत्र में सुगंध नदी के तट पर बना हुआ है. इसे उग्रतारा देवी का मंदिर कहते हैं, जहां देवी की नासिका यानी नाक गिरी मानी जाती है. भवानीपुर के बेगड़ा में करतोया नदी के किनारे करतोयाघाट शक्तिपीठ है. यहां देवी सती के बाएं पैर की पायल गिरी मानी जाती है. इस मंदिर को अपर्णा शक्तिपीठ भी कहते हैं.

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गर्म पानी के सोतों से इलाज

बांग्लादेश के ही जैसोर खुलना प्रांत में देवी का एक और पीठ है, जिसे यशोरेश्वरी शक्तिपीठ कहते हैं. एक और शक्तिपीठ बांग्लादेश के चटगांव में है, जिसे चट्टल का भवानी शक्तिपीठ कहते हैं. यहां गर्म पानी के प्राकृतिक सोते हैं, जिनमें नहाने से कई तरह की बीमारियों का इलाज हो जाता है. यही वजह है कि यहां नवरात्रि के अलावा पूरे साल आस्तिक आते और अपनी इच्छाएं पूरी कर लौटते हैं.
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