चंद्रयान-2: अंतरिक्ष मिशन से पहले भगवान की शरण में क्यों जाता है विज्ञान?

चंद्रयान-2 का श्रीगणेश सोमवार दोपहर हो गया. इससे पहले इसरो में कई टोटके और परंपरागत ढंग से पूजा अर्चना की खबरें हैं. जानिए कि इसरो में किस तरह की परंपराएं और मान्यताएं प्रचलित हैं और रही हैं.

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Updated: July 22, 2019, 10:09 PM IST
चंद्रयान-2: अंतरिक्ष मिशन से पहले भगवान की शरण में क्यों जाता है विज्ञान?
चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर व्हीकल पर काम करते इसरो के इंजीनियर. फाइल फोटो.
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Updated: July 22, 2019, 10:09 PM IST
चंद्रयान-2 की सोमवार दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर लॉन्च हो गई. किसी भी सेटेलाइट की लॉन्चिंग से पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के वैज्ञानिक भगवान की शरण में जाते हैं और हर अंतरिक्ष मिशन से पहले कुछ परंपराओं के मुताबिक पूजाएं, प्रार्थनाएं या टोटके आज़माए जाते हैं. इसरो ही नहीं, दुनिया भर की स्पेस एजेंसियों में कुछ परंपराएं और टोटके चलन में रहे हैं. विज्ञान का भगवान की शरण में जाना एकबारगी चौंकाता ज़रूर है और ये सवाल भी खड़ा करता है कि ये अंधविश्वास है या आस्था? आइए जानें कि ये किस तरह की परंपराएं हैं और इन्हें क्या कहना ठीक है अंधविश्वास या आस्था.

इसरो के मून मिशन चंद्रयान-2 का पूरा कवरेज पढ़ें

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा में एक टोटका आज़माया जाता है कि जब कोई भी अंतरिक्ष मिशन लॉन्च किया जा रहा होता है, तब जेट प्रोपल्शन लैब में बैठे मूंगफली खाते हैं. वहीं, रूसी अंतरिक्ष यात्री एक अजीब सा टोटका आज़माते हैं. जो बस उन्हें लॉंच पैड तक ले जा रही होती है, उसके पिछले दाहिने पहिये पर अंतरिक्ष यात्री पेशाब करते हैं. इस तरह के टोटकों के बीच ये जानें कि भारत में अंतरिक्ष मिशन से पहले किस तरह की परंपराएं प्रचलित हैं.

तिरुपति में भगवान वेंकटेश की पूजा

किसी भी अंतरिक्ष कार्यक्रम या मिशन के दौरान लॉंचिंग से पहले इसरो के प्रमुख वैज्ञानिक आंध्र प्रदेश स्थित तिरुपति बालाजी के नाम से मशहूर भगवान वेंकटेश की पूजा अर्चना करते हैं. यही नहीं, यहां लॉन्च किए जाने वाले रॉकेट का एक छोटा सा नमूना भी भगवान को चढ़ाया जाता है और मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना की जाती है.

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तिरुपति बालाजी पूजा करने पहुंचे थे इसरो प्रमुख के सिवान. (फाइल फोटो)

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नई कमीज़ पहनने की परंपरा
इसरो में ये परंपरा काफी पुरानी बताई जाती है कि किसी भी लॉन्चिंग  से पहले, लॉन्चिंग के दिन उस मिशन के संबंधित प्रोजेक्ट के डायरेक्टर नई कमीज़ पहनते हैं. इस टोटके पर सालों से भरोसा किया जा रहा है, बिल्कुल उसी तरह जैसे नासा में मूंगफली या रूस में बस के पहिये पर मूत्र त्याग करने का टोटका है. इसके पीछे कोई धार्मिक कारण नहीं बताया जाता.

मशीनों पर त्रिपुंड और मंगलवार
इसरो के सभी यंत्रों और मशीनों पर कुमकुम से त्रिपुंड बनाया जाता है. यह भगवान शंकर की आराधना और आशीर्वाद लेने का प्रतीक होता है. भगवान शिव के माथे पर जैसा धार्मिक अनुष्ठानों के तहत त्रिपुंड दिखता है, उसी तरह का त्रिपुंड मशीनों पर बना दिया जाता है. दूसरी ओर, इसरो में मंगलवार को कोई लॉन्चिंग न करने की परंपरा दशकों से रही है. किसी मिशन के तहत किसी रॉकेट को इस दिन नहीं छोड़ा जाता, लेकिन मंगल मिशन के दौरान इस परंपरा को तोड़ा गया था, मार्स मिशन ऑर्बिटर ने मंगलवार को ही उड़ान भरी थी.

'13' माना जाता है अशुभ
इसरो ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की स्पेस एजेंसियां इस संख्या को अशुभ मानती हैं. रॉकेट पीएसएलवी 12 के बाद इसरो ने पीएसएलवी 13 नहीं बल्कि पीएसएलवी 14 का श्रीगणेश किया था. असल में इस मान्यता के पीछे नासा के अपोलो 13 मिशन का नाकाम होना माना जाता है. इसके बाद से ही 13 नंबर को किसी मिशन के साथ नहीं जोड़ा जाता.

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इसरो के वैज्ञानिक रॉकेट लॉन्च करने के लिए राहु काल के दौरान उल्टी गिनती शुरू नहीं करते.


उल्टी गिनती को लेकर भी है परंपरा
राहु काल का महत्व कबूल करते हुए इसरो के वैज्ञानिक रॉकेट लॉन्च करने के लिए इस दौरान उल्टी गिनती शुरू नहीं करते. इसरो इस बात पर विश्वास करता रहा है कि डेढ़ से दो घंटे का यह समय किसी नए काम के लिए अशुभ होता है. हालांकि दो ग्रहों के बीच किसी मिशन को लेकर इस मान्यता पर कई बार सवाल खड़े होते रहे हैं. लेकिन, ये परंपरा चल रही है.

अंधविश्वास हैं या आस्था?
विज्ञान से जुड़े किसी कार्यक्रम को लेकर धार्मिक या पारंपरिक मान्यताओं का प्रचलित रहना ये सवाल खड़ा करता ही है. इस बारे में सब अपनी अपनी राय रख सकते हैं लेकिन देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से 2014 में सम्मानित किए गए वरिष्ठ और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सीएनआर राव इसे अंधविश्वास करार दे चुके हैं. पहले कई मौकों पर राव कह चुके हैं कि तिरुपति में रॉकेट का मॉडल चढ़ाना या इस तरह की और परंपराओं का इसरो में प्रचलित होना अंधविश्वास ही है. राव ने खुद को अंधविश्वास से मुक्त बताते हुए कहा था कि इंसान डरा हुआ होता है इसलिए उसे लगता है कि प्रार्थनाओं से उसका काम बन जाएगा.

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First published: July 22, 2019, 1:20 PM IST
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