चंद्रयान 2 बजट: हॉलीवुड फिल्म से बहुत कम, भारत की सबसे महंगी फिल्म से दोगुना

भारत दूसरे महत्वाकांक्षी मून मिशन यानी चंद्रयान 2 को लॉंच करने के लिए पूरी तरह तैयार है. चर्चा है कि भारत के इस कार्यक्रम पर कुल कितना खर्च हुआ. जानें किस फिल्म और किस देश के ऐसे ही मिशन की तुलना में कितना है इसरो के मिशन का बजट.

News18Hindi
Updated: July 14, 2019, 4:07 PM IST
चंद्रयान 2 बजट: हॉलीवुड फिल्म से बहुत कम, भारत की सबसे महंगी फिल्म से दोगुना
भारत दूसरे महत्वाकांक्षी मून मिशन यानी चंद्रयान 2 को लॉंच करने के लिए पूरी तरह तैयार है. चर्चा है कि भारत के इस कार्यक्रम पर कुल कितना खर्च हुआ. जानें किस फिल्म और किस देश के ऐसे ही मिशन की तुलना में कितना है इसरो के मिशन का बजट.
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Updated: July 14, 2019, 4:07 PM IST
अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में भारत प्रथम पंक्ति के देशों के साथ खड़ा है. मंगल यान की कामयाबी के बाद पूरी दुनिया भारत का लोहा मान चुकी थी और अब चंद्रयान 2 मिशन के साथ भारत एक और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के साथ अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया को चौंकाने के मूड में है. भारत के इस मिशन को लेकर दुनिया भर में चर्चा हो रही है और ऐसी ही एक खबर में इस तथ्य को उल्लेखनीय बताया गया है कि भारत के इस मिशन पर हॉलीवुड फिल्म 'एवेंजर्स' की तुलना में आधे से भी कम खर्च हुआ है.

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15 जुलाई की अलसुबह ISRO अपना दूसरे चंद्रमा मिशन Chandrayaan-2 को लॉन्च करने के लिए कमर कस चुका है. समाचार एजेंसी स्पूतनिक की खबर की मानें तो भारत का यह मिशन हॉलीवुड फिल्म 'एवेंजर्स एंडगेम' की तुलना में 65.17 फीसदी सस्ता है. आंकड़ों में ऐसे समझें कि चंद्रयान-2 कुल लागत करीब 850 करोड़ रुपए है. 3.1 करोड़ डॉलर (212 करोड़ रु.) रॉकेट लॉन्च और 9.3 करोड़ डॉलर (637 करोड़ रु) चंद्रयान उपग्रह की लागत है. यह लागत एवेंजर्स की लागत से कितनी कम है, ऐसे समझें कि इस फिल्म का अनुमानित बजट 2440 करोड़ रुपए था.

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भारतीय फिल्मों की तुलना में कहां है ये बजट?
देश में पिछले कुछ समय से फिल्मों के बजट में खासी बढ़ोत्तरी हुई है और करोड़ों रुपये की लागत से फिल्में बन रही हैं. अब तक की सबसे बड़े बजट की फिल्म रजनीकांत व अक्षय कुमार स्टारर 2.0 रही है. इस फिल्म का बजट 450 से 500 करोड़ के बीच बताया जाता है. यानी चंद्रयान 2 मिशन की कुल लागत ऐसी दो फिल्मों की लागत के बराबर है. बाहुबली, साहो, ठग्स ऑफ हिंदोस्तान, टाइगर ज़िंदा है और पद्मावत जैसी फिल्मों का बजट भी 200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का रहा है. यानी ऐसी तीन-चार फिल्मों जितने बजट में चंद्रयान 2 मिशन तैयार है.

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दुनिया में सबसे सस्ता है हमारा मून मिशन
भारत से पहले अमेरिका, रूस और चीन अपने रोवर और लैंडर चांद की सतह पर उतार चुके हैं. इस कड़ी में भारत चौथा देश होगा. लेकिन आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि इन देशों ने इस तरह के मिशन पर कितना खर्च किया है. चंद्रयान-2 मिशन की कुल लागत करीब 850 करोड़ रुपए है, जबकि अमेरिका के 2014 के मून मिशन LDEE की कुल लागत 1919 करोड़ रुपए आई थी. ये भी गौरतलब है कि सिर्फ ऑर्बिटर वाले LDEE की तुलना में इसरो कम लागत में ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर भेज रहा है.

वहीं, चीन ने चांग-4 मून मिशन पर 5759 करोड़ खर्च किए थे और रूस का 1966 का मून मिशन अगर आज की कीमत के हिसाब से देखा जाए तो करीब 13,712 करोड़ रुपए की लागत का होता. यानी भारतीय अंतरिक्ष मिशन इन तमाम देशों की तुलना में बेहद किफायती है.

क्यों विदेशों से सस्ते होते हैं भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम
दुनिया के अन्य देशों में सरकारी अंतरिक्ष एजेंसी के रॉकेट के ज़रिए किसी और मुल्क के व्यावसायिक उपग्रह भेजे जाने की प्रक्रिया उलझी हुई है. नियम, कायदे, समझौते, संधियां और कानूनों जैसी अड़चनें पेश आती हैं. लेकिन, भारत में ये काम आसानी से हो जाता है क्योंकि इसरो की व्यावसायिक इकाई एंट्रिक्स सीधे ये काम देखती है. भारत से विदेशी उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजना सस्ता पड़ता है और इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि विदेशों की तुलना में भारत में श्रम सस्ता है.

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दूसरी खास बात ये है कि केंद्र सरकार इसरो को कई तरह की रियायतें देती है, इसलिए भी इसरो के कार्यक्रमों की लागत कम रहा करती है. ये भी गौरतलब है कि इसरो पूरी तरह स्वाबलंबी है यानी पेलोड, यंत्र, रॉकेट या उपग्रह से जुड़ी टेक्नोलॉजी विदेश से नहीं खरीदी जाती बल्कि इसरो वैज्ञानिक खुद रिसर्च करके उसे तैयार करते हैं. लेकिन, भारत की मुख्य प्रतियोगिता चीन से है. भारत चीन को चुनौती दे सकता है बशर्ते बड़े-बड़े उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजे. भारत अभी वजनी उपग्रह छोड़ पाने की स्थिति में नहीं है. वजह साफ है कि भारत की तुलना में अंतरिक्ष अभियान पर चीन का खर्च 2.5 गुना ज्यादा है.

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