जानिए कितना शक्तिशाली है भारत को चांद की सैर पर ले जाने वाला ‘बाहुबली’

भारत के मिशन चंद्रयान 2 की कामयाबी के पीछे बाहुबली की ताकत होगी. बाहुबली वो रॉकेट है, जिसके जरिए लैंडर और रोबोटिक रोवर को चांद की सतह पर उतारा जाएगा.

News18Hindi
Updated: July 11, 2019, 1:53 PM IST
जानिए कितना शक्तिशाली है भारत को चांद की सैर पर ले जाने वाला ‘बाहुबली’
सेटेलाइट ले जाने वाले रॉकेट बाहुबली की तस्वीर
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Updated: July 11, 2019, 1:53 PM IST
भारत के मिशन चंद्रयान-2 में बस कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं. शक्तिशाली रॉकेट अपने कंधे पर सेटेलाइट लेकर आग उगलते हुए चांद का दीदार करने निकल पड़ेगा. भारत के मिशन चंद्रयान-2 में रोबोटिक रोवर को चांद की सतह पर उतारा जाएगा. इसरो ने अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में लैंडर और रोबोटिक रोवर को चांद पर भेजने वाले रॉकेट की तस्वीर जारी की है. इस भारीभरकम रॉकेट को बाहुबली कहा जा रहा है. बाहुबली के ऊपर ही भारत के मिशन चंद्रायन-2 की कामयाबी निर्भर करती है. 15 जुलाई को बाहुबली जब आसमान का सीना भेदते हुए चांद की सैर पर निकलेगा तो सारी दुनिया की नजरें इस पर टिकी होंगी.

15 जुलाई आधी रात के बाद 2 बजकर 51 मिनट पर चंद्रयान चांद की टोह लेने निकल पड़ेगा. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इस सफर की शुरुआत के साक्षी होंगे. वो श्रीहरिकोटा के प्रक्षेपण स्थल पर वैज्ञानिकों की टीम के साथ मौजूद होंगे. भारत के लिए ये सबसे बड़ा मौका है. इसरो ने पूरी दुनिया के सामने आसमान में अपनी कामयाबी के झंडे गाड़े हैं. इस बार चांद की जमीन पर झंडे गाड़ने की बारी है. इसलिए ये जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर वो बाहुबली रॉकेट है कैसा, जिसके बूते इसरो इतने बड़े प्रोजेक्ट को अंजाम देने वाला है.

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मिशन चंद्रयान-2 का लॉन्चिग पैड


विशालकाय आकार की वजह से नाम दिया गया बाहुबली

चंद्रयान मिशन-2 में रोबोटिक रोवर को चांद पर ले जाने वाले रॉकेट को उसके विशालकाय आकार की वजह से बाहुबली नाम दिया गया है. दरअसल इसका नाम जियोसिंक्रोनस स्टैडिंग सेटेलाइट लॉन्च व्हिकल मार्क 3 यानी GSLV Mk3 है. इसरो के वैज्ञानिक इसे बाहुबली कह रहे हैं. 15 जुलाई के लॉन्च के लिए ये लॉन्च पैड पर तैनात हो चुका है. बाहुबली का वजन करीब 640 टन है. इसकी ऊंचाई 15 मंजिला इमारत के बराबर है.

आसमान की ओर रुख किए इसकी तस्वीर के आगे इंसान बौने नजर आते हैं. इसरो के वैज्ञानिकों वो कारनामा करने जा रहे हैं जो पूरी दुनिया में भारत के सीने को कई गुना चौड़ा कर देगा. बाहुबली रॉकेट करीब 3.8 टन वजनी सेटेलाइट को चांद पर ले जाएगा. भारत के सबसे भारी-भरकम लॉन्च पैड से ये तीसरा लॉन्च होगा. बाहुबली की सीने को भेद कर रख देने वाली गड़गड़ाहट की आवाज के साथ आसमान को चीरते हुए चांद की सैर पर चल निकलेगा.

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इसरो का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है चंद्रयान-2

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बाहुबली के खासियत को आप इन बिंदुओं के जरिए समझ सकते हैं

-ये अब तक का सबसे शक्तिशाली लॉन्चर है. जिसे पूरी तरह से देश में बनाया गया है.
-ये अब तक का सबसे भारीभरकम लॉन्चर है. इसका वजन 640 टन है.
-ये अब तक का सबसे ऊंचाई वाला लॉन्चर है. इसकी ऊंचाई 15 स्टोरी बिल्डिंग के बराबर है.
-ये 4 टन वजनी सेटेलाइट को ले आसमान में ले जाने में सक्षम है. लो अर्थ ऑर्बिट में ये 10 टन वजनी सेटेलाइट ले जा सकता है.
-ये चंद्रायन मिशन-2 के सेटेलाइट को उसके ऑर्बिट में स्थापित करेगा.
-इसमें सबसे शक्तिशाली क्रायोजेनिक इंजन C25 लगा है जिसे CE-20 पावर देगा.
-इसमें S200 रॉकेट बूस्टर लगे हैं जो रॉकेट को इतनी शक्ति देगा कि वो आसमान में छलांग लगा सके. S200 को विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में बनाया गया है.
-GSLV Mk 3 के अलग-अलग मॉडल का अब तक तीन बार सफल प्रक्षेपण हो चुका है.

बाहुबली की कामयाबी की 3 कहानियां

बाहुबली के पिछले तीन मॉडल की कामयाबी की पिछली तीन कहानियां ये बताने के लिए काफी हैं कि इस बार भारत आसमान में सबसे मजबूत छलांग लगाने वाला है. इस पूरे प्रोजेक्ट में इसरो को 11 साल लग गए हैं. चंद्रयान 2 भारत का दूसरा मून मिशन है. भारत पहली बार चांद की सतह पर लैंडर और रोवर उतारेगा. जो वहां के विकिरण और तापमान का अध्ययन करेगा.

इस मिशन की सबसे बड़ी बात ये है कि ये पूरी तरह से स्वदेशी है. इस मिशन की कामयाबी के बाद भारत चांद की सतह पर लैंड करने वाला चौथा देश बन जाएगा. इसके पहले अमेरिका, रुस और चीन अपने यान को चांद की सतह पर भेज चुके हैं. लेकिन अब तक किसी ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास कोई यान नहीं उतारा है.

भारत ने अपना पहला मून मिशन चंद्रयान-1 2008 में लॉन्च किया था. उस वक्त इस प्रोजेक्ट में करीब 450 करोड़ रुपए खर्च हुए थे. इस बार इसरो का प्रोजेक्ट 1 हजार करोड़ रुपए का है. चांद पर भारत के कदम बस पड़ने ही वाले हैं. बस कुछ ही दिनों में हम चांद की धरती फतह कर लेंगे.

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First published: July 11, 2019, 1:53 PM IST
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