मिशन मून के लिए तैयार चंद्रयान-II, जानें चांद से क्या-क्या लाएगा भारत का ये स्पेसक्राफ्ट

तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में चंद्रयान-2 का अंतिम सफल परीक्षण हो चुका है. आगामी 19 जून को इसे बेंगलुरु स्पेसक्राफ्ट से निकाल लिया जाएगा. इसी महीने 20-21 तारीख को इसे श्रीहरिकोटा स्थित लॉन्चपैड तक पहुंचा दिया जाएगा.

News18Hindi
Updated: June 12, 2019, 5:02 PM IST
News18Hindi
Updated: June 12, 2019, 5:02 PM IST
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) चंद्रयान-2 को मिशन पर भेजने की सारी तैयारी पूरी कर चुका है. इसरो का चंद्रयान-2 को मिशन पर भेजने से पहले का अंतिम परीक्षण भी सफल रहा. यह सफल परीक्षण तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में किया गया. जानकारी के अनुसार इसे बेंगलुरु स्पेसक्राफ्ट से 19 जून को निकाल लिया जाएगा, जबकि 20 से 21 जून को इसे श्रीहरिकोटा स्थित लॉन्चपैड तक पहुंचा दिया जाएगा. तब तक भारी सुरक्षा निगरानी में इसे रखा जाएगा. ताजा जानकारी के अनुसार आगामी नौ जुलाई को चंद्रयान-2 लॉन्च किया जा सकता है. आइए जानते हैं चंद्रयान-2 की क्या हैं खूब‌ियां...

चंद्रयान-2 की क्या है खासियत


इसमें 13 भारतीय पेलोड में 8 ऑर्बिटर, 3 लैंडर और 2 रोवर होंगे. इसके अलावा NASA का एक पैसिव एक्सपेरिमेंट होगा. इसरो ने मिशन के बारे में यह जानकारियां जारी की हैं. हालांकि इन सभी पेलोड के काम को लेकर विस्तार से जानकारियां नहीं दी हैं. यह पूरा स्पेसक्राफ्ट कुल मिलाकर 3.8 टन वजनी होगा.

चंद्रयान-2 भेजने के पीछे क्या है भारत का इरादा

इसरो के पूर्व चेयरमैन जी माधवन नायर ने बताया था कि भारत का दूसरा मिशन चंद्रयान-2, चंद्रमा की सतह पर कुछ खास खनिजों को खोजने के लिए जाएगा.



चांद पर कहां जाएगा और कैसे काम करेगा यह मिशन?
Loading...

इसरो के चेयरमैन के सिवान ने बताया था कि हम चांद पर एक ऐसी जगह जा रहे हैं, जो अभी तक दुनिया से अछूती रही है. यह है चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव. वहीं अंतरिक्ष विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था कि इस मिशन के दौरान ऑर्बिटर और लैंडर आपस में जुड़े हुए होंगे.

इन्हें इसी तरह से GSLV MK III लॉन्च व्हीकल के अंदर लगाया जाएगा. रोवर को लैंडर के अंदर रखा जाएगा. लॉन्च के बाद पृथ्वी की कक्षा से निकलकर यह रॉकेट चांद की कक्षा में पहुंचेगा. इसके बाद धीरे-धीरे लैंडर, ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा. इसके बाद यह चांद के दक्षिणी ध्रुव के आस-पास एक पूर्वनिर्धारित जगह पर उतरेगा. बाद में रोवर वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए चंद्रमा की सतह पर निकल जाएगा.



क्या-क्या किया था चंद्रयान-1 ने
चंद्रयान-2, ISRO के चांद पर भेजे गए पहले मिशन के 10 साल बाद जा रहा है. इसरो ने अपना चंद्रयान-1 मिशन, वर्ष 2009 में भेजा था. इस मिशन में भी चंद्रमा का चक्कर लगाने वाला एक ऑर्बिटर और एक इम्पैक्टर था. लेकिन इस मिशन में चंद्रयान-2 की तरह का रोवर नहीं था, जो चंद्रमा पर घूम-घूमकर खनिजों के नमूने जुटा सके. हालांकि फिर भी इस मिशन को चांद की सतह पर पानी के नमूने खोजने का श्रेय दिया जाता है.

चंद्रयान-1 की क्या थी खासियत
चंद्रयान-1, 11 पेलोड लेकर गया था. इसमें से 5 पेलोड भारत के थे. तीन पेलोड यूरोप के और 2 अमेरिका के थे. इसके अलावा एक पेलोड बुल्गारिया का भी था. 2008 में, हमने अपना पहला सैटेलाइट सफलतापूर्वक चांद पर भेजा था. इसने चंद्रमा के बारे में बहुत सारी जानकारियां इकट्ठा की थीं. इसने भी वहां होने वाले खनिजों आदि के बारे में पता किया था. हमने इस दौरान भारतीय झंडा भी चांद की सतह पर फहराया था." चंद्रयान-1 को चंद्रमा की सतह पर पानी खोजने का श्रेय दिया जाता है. 1.4 टन के इस स्पेसक्राफ्ट को PSLV के जरिये लॉन्च किया गया था. उस वक्त इसका ऑर्बिटर चंद्रमा के 100 किमी ऊपर कक्षा में चक्कर लगा रहा था.

यह भी पढ़ें- चंद्रयान 1 से कई गुना ताकतवर है चंद्रयान 2, चंद्रमा पर उतरकर आधा किलोमीटर तक जांच-पड़ताल करेगा रोवर

जानिए क्यों इसरो से लेकर इस बंद कमरे तक में हो रही है चांद की चर्चा

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...