ऐसे होंगे चंद्रयान-2 के आखिरी सबसे मुश्किल 15 मिनट

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Updated: September 3, 2019, 4:56 PM IST
ऐसे होंगे चंद्रयान-2 के आखिरी सबसे मुश्किल 15 मिनट
चंद्रयान 2

चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) के चंद्रमा की सतह पर लैंड करने में बस कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं. इसरो (ISRO) ने अब तक पूरे मिशन (Moon Mission) को बहुत ही कामयाबी से अंजाम दिया है. अब उसका पूरा फोकस आखिरी के 15 मिनट पर है...

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चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) चंद्रमा की सतह के बेहद करीब पहुंच चुका है. इसका लैंडर विक्रम (lander vikram) और रोवर प्रज्ञान चांद (rover pragyan) से कुछ सौ किलोमीटर की दूरी पर हैं. इसरो (ISRO) ने अब तक पूरे मिशन (Moon Mission) को बहुत ही कामयाबी से अंजाम दिया है. लेकिन अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं.

लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह से करीब 104 किलोमीटर दूर है. ये लगातार चंद्रमा के चक्कर लगा रहा है. इसरो के वैज्ञानिक बता रहे हैं कि 7 सितंबर को चंद्रयान 2 चंद्रमा की सतह छुएगा. लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान चांद पर उतरेंगे. उस दौरान चंद्रयान 2 के अंतिम 15 मिनट काफी अहम होंगे.

उसी 15 मिनट में इस मिशन की कामयाबी तय होगी. अगर उन 15 मिनट में सबकुछ ठीकठाक रहा तो भारत अपने अंतरिक्ष मिशन में इतिहास लिखेगा और अगर थोड़ी भी असावधानी हुई तो सारे मेहनत पर पानी फिर सकता है.

7 सितंबर की आधी रात के बाद रचेगा इतिहास

इसरो के चेयरमैन डॉ के सिवन ने चंद्रयान 2 मिशन के लॉन्च होते ही बता चुके हैं कि इस मिशन का सबसे अहम पार्ट होगा, जब चंद्रयान चांद की सतह पर उतरेगा. उन्होंने कहा है कि जब चंद्रयान चंद्रमा की सतह से 30 किलोमीटर दूर होगा, तब चंद्रयान 2 की लैंडिंग के लिए उसकी स्पीड कम की जाएगी.

लैंडर विक्रम को चांद पर उतारने का काम काफी मुश्किल भरा होगा. इस दौरान 15 मिनट काफी चुनौतीपूर्ण होंगे. के सिवन ने कहा है कि पहली बार वो सॉफ्ट लैंडिंग की कोशिश करेंगे.

7 सितंबर की मध्य रात्रि के बाद भारत इतिहास रचेगा. रात के 1.55 बजे चंद्रयान टू चंद्रमा पर सॉफ्ट लॉन्च करेगा. चंद्रयान 2 के चांद की सतह के करीब जाने का सिलसिला शुरू हो चुका है. चंद्रयान लगातार अपनी ऑर्बिट कम कर रहा है. विक्रम अपने स्पेसक्राफ्ट से अलग होकर चांद की यात्रा पर निकल चुका है. अगले 4 दिन बेहद अहम रहने वाले हैं.
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chandrayaan 2 moon mission what will happen in crucial last 15 minutes in landing
चंद्रयान 2 का रोवर प्रज्ञान


इस दौरान इसरो के वैज्ञानिकों का पूरा फोकस लैंडर विक्रम पर है. इसरो के वैज्ञानिक कहते हैं कि सॉफ्ट लैंडिंग के पुराने अनुभव बताते हैं कि सिर्फ 37 फीसदी मामलों में ही कामयाबी मिलती है. इसलिए अभी एक-एक दिन चुनौतीपूर्ण है.

क्या होगा 7 सितंबर की रात 1 बजकर 40 मिनट से 1 बजकर 55 मिनट तक

7 सितंबर की रात के 1.40 बजे विक्रम का पावर सिस्टम एक्टिवेट हो जाएगा. विक्रम चांद की सतह के बिल्कुल सीध में होगा. विक्रम अपने ऑनबोर्ड कैमरा से चांद के सतह की तस्वीरें लेना शुरू करेगा. विक्रम अपनी खींची तस्वीरों को धरती से लेकर आई चांद के सतह की दूसरी तस्वीरों से मिलान करके ये पता करने की कोशिश करेगा की लैंडिंग की सही जगह कौन सी होगी.

इसरो के इंजीनियर ने लैंडिंग वाली जगह की पहचान कर ली है. पूरी कोशिश चंद्रयान को उस जगह पर उतारने की होगी. लैंडिंग की सतह 12 डिग्री से ज्यादा उबड़-खाबड़ नहीं होनी चाहिए. ताकि यान में किसी तरह की गड़बड़ी न हो.

एक बार विक्रम लैंडिंग की जगह की पहचान कर लेगा, उसके बाद सॉफ्ट लॉन्च की तैयारी होगी. इसमें करीब 15 मिनट लगेंगे. यही 15 मिनट मिशन की कामयाबी का इतिहास लिखेंगे.

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7 सितंबर की आधी रात के बाद होगी लैंडिंग


भारत जैसे ही चांद की सतह पर लैंडिंग करेगा, वो ऐसा करना वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा. अभी तक अमेरिका, रूस और चीन के पास ही इस तरह की विशेषज्ञता हासिल है. चंद्रयान-2 चांद के साउथ पोल पर लैंड करेगा. अभी तक इस जगह पर कोई भी देश नहीं पहुंचा है. चांद के साउथ पोल पर स्पेसक्राफ्ट उतारने के बाद भारत ऐसा करने वाला पहला देश बन जाएगा.

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First published: September 3, 2019, 4:56 PM IST
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