चांद पर ये चीजें खोजने जा रहा है भारत का चंद्रयान-2 मिशन, सामने आई पूरी डीटेल

भारत अपने चंद्रयान-2 मिशन को 9 से 16 जुलाई के बीच अंतरिक्ष में भेजने वाला है. इसके 6 सितंबर को चांद पर पहुंचने की आशा है. तो क्या-क्या लेकर जाएगा चंद्रयान और चांद पर किस चीज की करेगा खोज...

News18Hindi
Updated: May 16, 2019, 4:37 PM IST
चांद पर ये चीजें खोजने जा रहा है भारत का चंद्रयान-2 मिशन, सामने आई पूरी डीटेल
चंद्रयान-2 को जुलाई की शुरुआत में चांद पर जाने के लिए छोड़ा जाएगा (सांकेतिक तस्वीर)
News18Hindi
Updated: May 16, 2019, 4:37 PM IST
भारत अपना दूसरा स्वदेशी मिशन चांद पर भेजने वाला है. यह चांद पर क्या-क्या लेकर जाएगा, इसकी जानकारियां इसरो ने दी हैं. जुलाई में लॉन्च होने वाला यह चंद्रयान-2 मिशन अपने साथ 13 पेलोड ले जाने वाला है. यह 10 साल पहले भेजे गए चंद्रयान-1 मिशन का एडवांस वर्जन है. इसमें से एक पेलोड अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA का भी होगा. इंडियन स्पेस रिसर्च ऑगर्नाइजेशन (ISRO) ने यह बात बुधवार को बताई.

इस स्पेसक्राफ्ट में और क्या-क्या होगा?


इन 13 भारतीय पेलोड में 8 ऑर्बिटर, 3 लैंडर और 2 रोवर होंगे. इसके अलावा NASA का एक पैसिव एक्सपेरिमेंट होगा. इसरो ने मिशन के बारे में यह जानकारियां जारी की हैं. हालांकि इन सभी पेलोड के काम को लेकर विस्तार से जानकारियां नहीं दी हैं. यह पूरा स्पेसक्राफ्ट कुल मिलाकर 3.8 टन वजनी होगा.

क्यों भेजा जा रहा है यह मिशन?

इसरो के पूर्व चेयरमैन जी माधवन नायर ने बताया था कि चंद्रमा पर भेजा जा रहा भारत का दूसरा मिशन चंद्रयान- 2, चंद्रमा की सतह पर कुछ खास खनिजों को खोजने के लिए जाएगा. चंद्रयान-2, ISRO के चांद पर भेजे गए पहले मिशन के 10 सालों बाद जा रहा है. इसरो ने अपनe चंद्रयान-1 मिशन, वर्ष 2009 में भेजा था. इस मिशन में भी एक चंद्रमा का चक्कर लगाने वाला ऑर्बिटर और एक इम्पैक्टर था. लेकिन इस मिशन में चंद्रयान-2 की तरह का रोवर नहीं था, जो चंद्रमा पर घूम-घूमकर खनिजों के नमूने जुटा सके. हालांकि फिर भी इस मिशन को चांद की सतह पर पानी के नमूने खोजने का श्रेय दिया जाता है.

चांद पर कहां जाएगा और कैसे काम करेगा यह मिशन?
इसरो के चेयरमैन के सिवान ने बताया था कि हम चांद पर एक ऐसी जगह जा रहे हैं, जो अभी तक दुनिया से अछूती रही है. यह है चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव. वहीं अंतरिक्ष विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था कि इस मिशन के दौरान ऑर्बिटर और लैंडर आपस में जुड़े हुए होंगे. इन्हें इसी तरह से GSLV MK III लॉन्च व्हीकल के अंदर लगाया जाएगा. रोवर को लैंडर के अंदर रखा जाएगा. लॉन्च के बाद पृथ्वी की कक्षा से निकलकर यह रॉकेट चांद की कक्षा में पहुंचेगा. इसके बाद धीरे-धीरे लैंडर, ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा. इसके बाद यह चांद के दक्षिणी ध्रुव के आस-पास एक पूर्वनिर्धारित जगह पर उतरेगा. बाद में रोवर वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए चंद्रमा की सतह पर निकल जाएगा.
Loading...

सांकेतिक तस्वीर


चंद्रयान-1 में क्या-क्या था?
चंद्रयान-1, 11 पेलोड लेकर गया था. इसमें से 5 पेलोड भारत के थे. तीन पेलोड यूरोप के और 2 अमेरिका के थे. इसके अलावा एक पेलोड बुल्गारिया का भी था. 2008 में, हमने अपना पहला सैटेलाइट सफलतापूर्वक चांद पर भेजा था. इसने चंद्रमा के बारे में बहुत सारी जानकारियां इकट्ठा की थीं. इसने भी वहां होने वाले खनिजों आदि के बारे में पता किया था. हमने इस दौरान भारतीय झंडा भी चांद की सतह पर फहराया था." चंद्रयान-1 को चंद्रमा की सतह पर पानी खोजने का श्रेय दिया जाता है. 1.4 टन के इस स्पेसक्राफ्ट को PSLV के जरिए लॉन्च किया गया था. उस वक्त इसका ऑर्बिटर चंद्रमा के 100 किमी ऊपर कक्षा में चक्कर लगा रहा था.

यह भी पढ़ें: मोदी के काम का कायल हुआ चीन, सरकारी अखबार ने की तारीफ

नॉलेज की खबरों को सोशल मीडिया पर भी पाने के लिए 'फेसबुक' पेज को लाइक 
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...