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अरविंद केजरीवाल से कम उम्र में दिल्ली का मुख्यमंत्री बन गया था ये यादव नेता, लोग कहते थे शेर-ए-दिल्ली

News18Hindi
Updated: February 11, 2020, 11:41 AM IST
अरविंद केजरीवाल से कम उम्र में दिल्ली का मुख्यमंत्री बन गया था ये यादव नेता, लोग कहते थे शेर-ए-दिल्ली
चौधरी ब्रह्म प्रकाश को दिल्ली के राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच भुला दिया गया है.

चौधरी ब्रह्म प्रकाश (Chaudhary Brahm Prakash Yadav) महज 34 साल की उम्र में दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री (First CM Of Delhi) बने थे.

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  • Last Updated: February 11, 2020, 11:41 AM IST
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देश के राजधानी दिल्ली में आम तौर पर राज्य के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर मदन लाल खुराना (Madan Lal Khurana) का ही जिक्र आता है. सामान्य तौर पर लोग इस बात से नावाकिफ हैं कि दिल्ली के पहला मुख्यमंत्री एक युवा नेता था जो महज 34 साल की उम्र में सीएम बन गया था. लेकिन दिल्ली की राजनीति में उन्हें तकरीबन भुलाया जा चुका है. शायद इसी वजह से 16 जनू 2019 को जब उनकी 100वीं जयंती थी तब किसी ने उन्हें याद तक नहीं किया. यहां तक कि खुद कांग्रेस ने भी नहीं.

दिल्ली के शकूरपुर गांव के रहने वाले ब्रह्म प्रकाश भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अपनी अंडरग्राउंड रह कर काफी काम किया था. उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा. अपनी सक्रियता की वजह से कांग्रेस की सीनियर लीडरशिप में काफी मशहूर हो गए थे.

आजादी के बाद दिल्ली का पहला विधानसभा चुनाव 1951 में हुआ था. नतीजों के बाद कांग्रेसी विधायकों ने देशबंधु गुप्ता को अपना नेता चुन लिया. लेकिन एक दुखद घटना घटी. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही देशबंधु गुप्ता की एक हादसे में मौत हो गई. चौधरी ब्रह्म प्रकाश का नाम एकदम से शीर्ष नेतृत्व की तरफ से आगे बढ़ाया गया. और इस तरह कह सकते हैं कि चौधरी ब्रह्म प्रकाश इत्तेफाकन दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री बने. कहा जाता है कि ब्रह्म प्रकाश को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के हाथ था. ब्रह्म प्रकाश तब कांग्रेस लीडरशिप के खास थे और उन पर सभी बड़े नेताओं को भरोसा था.

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सामान्य बसों में करते थे सफर
ब्रह्म प्रकाश अपनी सादी जीवनशैली के लिए मशहूर थे और सीएम बन जाने के बाद बसों में सफर करना पसंद करते थे. मुख्यमंत्री पद से हट जाने के बाद भी ब्रह्म प्रकाश कई बार सांसद रहे लेकिन बसों से सफर करना उन्होंने नहीं छोड़ा. कई बार वो आम लोगों की परेशानियां बसों में सफर करने के दौरान ही सुन लिया करते थे. ब्रह्म प्रकाश की सादगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वो राजधानी में अपना एक घर तक नहीं बना सके. ब्रह्म प्रकाश 17 मार्च 1952 से 1955 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे.

दिल्ली का मुख्यमंत्री रहने के अलावा वो केंद्र में वो कई महत्वपूर्ण मंत्रीपदों पर भी रहे. ब्रह्म प्रकाश सहकारी क्षेत्र का पितामह भी कहा जाता है. उन्होंने 40 सालों तक सहकारिता का मार्गदर्शन किया. वर्तमान में देश में सहकारिता क्षेत्र में विकास हुआ उसका श्रेय भी ब्रह्म प्रकाश को दिया जाना चाहिए. उन्होंने दिल्ली किसान बहुद्देशीय सहकारी समिति, दिल्ली केंद्रीय सहकारी उभोक्ता होलसेल स्टोर, दिल्ली राज्य सहकारी इंस्टीट्यूट का गठन किया. ये कम लोगों को मालूम है कि National Dairy Development Board में डॉ. वर्गीज कुरियन के साथ ब्रह्म प्रकाश ने भी काफी काम किया. वर्गीज कुरियन को देश में श्वेत क्रांति के लिए याद किया जाता है.दिल्ली कांग्रेस में माने जाते थे पिता तुल्य
ब्रह्म प्रकाश वो नेता थे जिन्हें दिल्ली कांग्रेस की राजनीति पिता तुल्य देखा जाता है. इनमें कई नेता बाद जबरदस्त विवादों में भी रहे. हालांकि इन विवादों की परछाई कभी ब्रह्म प्रकाश तक नहीं पहुंची. इन नेताओं में एचकेएल भगत, जगदीश टाइटलर, ब्रज मोहन, सज्जन कुमार और राम बाबू शर्मा जैसे कई नेता हैं. हालांकि ब्रह्म प्रकाश 1980 के दशक में चौधरी चरण सिंह के लोकदल से जुड़ गए थे. वो चौधरी चरण सिंह की सरकार में केंद्रीय खाद्य, कृषि सिंचाई और सहकारिता मंत्री भी रहे.

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह


ये संयोग ही हो सकता है कि ब्रह्म प्रकाश की मृत्यु उसी साल हुई जब दिल्ली में 1956 के बाद पहली बार चुनाव हुए. साल 1993 में ब्रह्म प्रकाश की मृत्यु हो गई थी और उसी साल मदन लाल खुराना दिल्ली के मुख्यमंत्री बने जिन्हें मोटे तौर दिल्ली वाले पहले सीएम के तौर पर याद करते हैं.
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First published: February 11, 2020, 11:34 AM IST
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