चीन और ईरान क्यों ट्रंप को हराने के लिए लामबंद हो रहे हैं?

चीन और ईरान क्यों ट्रंप को हराने के लिए लामबंद हो रहे हैं?
अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों के बारे में खुफिया एजेंसियां लगातार आगाह कर रही हैं- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक चीन और ईरान चुनावी नतीजों को ट्रंप के खिलाफ (China and Iran do not want Donald Trump to win election) करने की साजिश कर सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 9, 2020, 1:26 PM IST
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नवंबर में होने जा रहे अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों के बारे में खुफिया एजेंसियां लगातार आगाह कर रही हैं. उनका कहना है कि कई देश अपने फायदे के लिए चुनाव पर असर डालने की फिराक में हैं. खासतौर पर एजेंसियां चीन, ईरान और रूस के लिए चेता रही हैं. उनका कहना है कि चीन और ईरान जो बिडेन को जिताना चाहते हैं, वहीं रूस डोनाल्ड ट्रंप की जीत में फायदा देख रहा है. जानिए, कौन सा देश किसने पाले में हैं और क्यों.

लंबा रहा है इतिहास
देशों के एक-दूसरे के चुनावों में सेंध लगाने की शुरुआत नई नहीं. दूसरे विश्व युद्ध के बाद से ही इसकी शुरुआत हो गई थी. तब रूस और अमेरिका इस काम में सबसे आगे थे. रूस चाहता था कि अमेरिका में वो नेता आए, जो उसका हित चाहे, वहीं अमेरिका भी इसी कोशिश में रहता था. साल 1996 में अमेरिका चाहता था कि रूस के प्रेसिडेंट बोरिस येल्तसिन दोबारा चुने जाएं. इसके लिए अमेरिका से कई महीनों पहले रूस के चुनावी एक्सपर्ट आए गए और येल्तसिन के पक्ष में माहौल तैयार किया. रूस भी अपने कैंडिडेट के मुताबिक अमेरिकी चुनाव में हस्तक्षेप करता रहा. ये दखलदांजी सारे देश अपने हिसाब से करते रहे.

रूस के बारे में लगातार खुफिया एजेंसियां सतर्क कर रही हैं कि वो चुनाव के नतीजों पर असर डाल सकता है- सांकेतिक फोटो

क्या कह रही हैं एजेंसियां


अब अमेरिका में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनावों में भी इंटेलिजेंस एजेंसियों को यही डर है. वे लगातार आगाह कर रही हैं कि कई देश अपने-अपने तरीके से इलेक्शन के नतीजों पर असर डाल सकते हैं. इसी शुक्रवार को खुफिया एजेंसी नेशनल काउंटर-इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी सेंटर ( National Counterintelligence and Security Center) ने ये बयान दिया. उसे अंदेशा है कि रूस डोनाल्ड ट्रंप को दोबारा प्रेसिडेंट बना देखना चाहता है.

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इसकी एक वजहें गिनाई जा रही हैं. जैसे एक तो है ट्रंप का रूस के प्रति आमतौर पर नर्म रवैया. दूसरी बड़ी वजह उम्मीदवार जो बिडेन की रूस विरोधी नीतियां हैं. बता दें कि बिडेन ओबामा सरकार के दौरान उपराष्ट्रपति रह चुके हैं और तब यूक्रेन को लेकर रूस के खिलाफ नीतियां रखते रहे हैं. इसे ही लेकर रूस बिडेन के खिलाफ माना जा रहा है.

साल 2016 में भी लगा था आरोप
वैसे माना ये भी जाता है कि रूस ने साल 2016 में हुए चुनावों मे भी ट्रंप को जिताने के लिए काफी काम किया था. तब ट्रंप के खिलाफ हिलेरी क्लिंटन उम्मीदवार थीं. और पुतिन क्लिंटन्स को बिल्कुल पसंद नहीं करते थे. ये बिल्कुल खुली हुई बात थी. साल 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पुतिन ने संसदीय चुनावों में धोखाधड़ी के बाद सरकार विरोधी आंदोलनों के लिए अमेरिका और सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्लिंटन को दोषी ठहराया था. यही वजह है कि तब भी चुनावों के बाद इस बात का हल्ला मचा कि ट्रंप की जीत में रूस का हाथ है. हालांकि रूस ने इससे इनकार कर दिया था.

ईरान ट्रंप को अपने जनरल कासिम सुलेमानी की मौत का जिम्मेदार मानता है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


ईरान को क्या है नफा-नुकसान
अब आते हैं ईरान के ट्रंप के खिलाफ यानी बिडेन के साथ होने की बात पर. कथित तौर पर ईरान ट्रंप को अपने जनरल कासिम सुलेमानी की मौत का जिम्मेदार मानता है और तब से ही बदला लेने की कोशिश में है. इसके बाद ईरान के परमाणु हथियार बनाने पर भी ट्रंप ने एतराज किया था. जिसपर भड़के हुए ईरान ने कहा था कि उसने सैकड़ों मिसाइलें तैयार कर रखी हैं. इस तरह से दोनों देशों के बीच ट्रंप के आने के बाद से लगातार आरोप चल रहे हैं. यही देखते हुए खुफिया एजेंसियों को डर है कि ईरान ट्रंप को हराने की पूरी कोशिश करेगा.

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चीन किस कोशिश में और क्यों
हालांकि अमेरिकी चुनावों में सेंध लगाने का सबसे ज्यादा शक चीन पर जा रहा है. फिलहाल कोरोना के कारण अमेरिका और चीन के संबंध तेजी से बिगड़े हैं. ट्रंप ने कोरोना के मामले में लापरवाही का आरोप लगाते हुए चीन के कई संबंध खत्म कर दिए. सोशल मीडिया पर भी दोनों देशों की खुन्नस दिख रही है. ऐसे में काफी मुमकिन है कि चीन ट्रंप की हार के लिए कोशिश करे.

चीन-विरोधी नीतियां रखने के कारण चीन अमेरिकी चुनाव को अपने मुताबिक मोड़ने की कोशिश में है- सांकेतिक फोटो


खुद इंटेलिजेंस एजेंसी के मुख्य विलियम इवानिना ने कहा कि चीन ट्रंप को दोबारा राष्ट्रपति बनते देखना नहीं चाहता. सीएनएन में इस बारे में विस्तार से रिपोर्ट आई है, जिसमें बताया गया है कि कैसे चीन विरोध नीतियां रखने के कारण चीन अमेरिकी चुनाव को अपने मुताबिक मोड़ना चाह रहा है.

कैसे डाला जाता है असर
यानी अमेरिका में कौन राष्ट्रपति बनेगा, इससे इन सारे ही देशों के हित या अहित सीधे तौर पर जुड़े दिख रहे हैं. ऐसे में सवाल ये आता है कि कैसे ये देश किसी दूसरे देश के चुनाव पर असर डालते हैं. तो इसके लिए अलग-अलग तरीके होते हैं. जैसे चीन या रूस की बात करें तो दोनों ही देश तकनीक के मामले में जानकार देश हैं. वे कथित तौर पर हैकिंग भी कर सकते हैं ताकि नतीजों को सीधे अपने मुताबिक कर लें.

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इसके अलावा कई तरह की दूसरी रणनीतियां भी हैं. जैसे सीएनएन की एक रिपोर्ट में एफबीआई डायरेक्टर क्रिस्टोफर रे ने कहा कि इसके लिए वे सोशल मीडिया, फेक न्यूज, प्रोपेगंडा जैसी बातों का सहारा लेते हैं. इसी तरह से वोटर अगर कम जानकार है तो उसे गलत बातों से तुरंत प्रभावित किया जा सकता है. कुल मिलाकर भ्रम पैदा करके अपने पक्ष में माहौल बनाया जाता है.
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