कितनी बड़ी है कम्युनिस्ट चीन में बाइबल इंडस्ट्री और क्यों खफा हैं ट्रंप?

कितनी बड़ी है कम्युनिस्ट चीन में बाइबल इंडस्ट्री और क्यों खफा हैं ट्रंप?
चीन में बाइबल कारोबार

अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर जारी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन से आने वाली 250 अरब डॉलर की वस्तुओं पर 25 फीसदी आयात शुल्क लगाया तो बदले में चीन ने भी बदले की कार्रवाई करते हुए ऐसा ही कदम उठाया.

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  • Last Updated: June 27, 2019, 12:06 PM IST
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अमेरिका और चीन के बीच जो ट्रेड वॉर यानी कारोबारी जंग चल रही है, उसकी आंच अब धार्मिक भावनाओं तक पहुंच गई है. टैरिफ वॉर के कारण चीन से आने वाली चीजों पर अमेरिका भारी-भरकम आयात शुल्क लगा चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के बाद चीन ने भी बदले की कार्रवाई करते हुए शुल्क बढ़ा दिए हैं. इस ट्रेड वॉर का बड़ा असर बाइबल की कीमतों पर पड़ने की शुरुआत हो चुकी है. आपके लिए जानना दिलचस्प हो सकता है कि दुनिया की आधी बाइबल्स चीन में छपती हैं, जो कम्युनिस्ट छवि वाला देश है. जानें चीन के बाइबल कारोबार के बारे में...

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बाइबल के दाम बढ़ने की खबरें आने के बाद ट्रंप ने नाराज़गी ज़ाहिर की है. इसका कारण यह भी है कि कुछ धार्मिक समूहों ने इस बात पर अमेरिकी सरकार के सामने चिंता ज़ाहिर की है. राजनीति से इतर, चीन में बाइबल इंडस्ट्री कब खड़ी हुई और कैसे एक बड़ा कारोबार बनती चली गई? इसकी कहानी दिलचस्प है.



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बाइबल का प्रकाशन भारत, ब्राज़ील और दक्षिण कोरिया में भी होता है लेकिन चीन इन सबसे आगे निकल चुका है. इसकी वजह चीन की अर्थव्यवस्था और स्किल्ड वर्कफोर्स बताई जाती है. अमेरिका में ईसाई कॉंटेंट की निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी प्रकाशन संस्था टैंडेल का कहना है कि दुनिया की कुल बाइबल में से 56 फीसदी चीन में छप रही हैं. ईसाई कॉंटेंट के प्रकाशकों का ये भी कहना है कि उनकी नज़र जी20 सम्मेलन पर भी टिकी है, जिसमें ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कारोबार को लेकर डील कर सकते हैं.

कैसे शुरू हुई थी ये इंडस्ट्री?
चीन में बाइबल प्रकाशन उद्योग खड़ा होने की कहानी बहुत पुरानी नहीं है. चीन में कानूनी तौर पर एक ही कंपनी को बाइबल का प्रकाशन करने की इजाज़त है और वह है एमिटी प्रिंटिंग कंपनी. 1987 में यूनाइटेड बाइबल सोसायटीज़ के साथ मिलकर एमिटी ने चीन में पहली बार बाइबल छापी थी. तबसे अब तक करीब डेढ़ करोड़ बाइबल छापी जा चुकी हैं. 1987 से 2012 के बीच 25 सालों में चीन में एक करोड़ बाइबल छापी जा चुकी थीं. जिनमें से 60 फीसदी की बिक्री चीन में हुई थी और 40 फीसदी दूसरे देशों में बेची गई थीं.

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दुनिया में जितनी बाइबल छपती हैं, उसमें से आधा प्रकाशन चीन में होता है.


स्कॉलर्स की रिसर्च के आंकड़े कहते हैं कि चीन में ईसाइयों की आबादी करीब 4 करोड़ है. ये भी एक दिलचस्प फैक्ट है कि एमिटी ने दिसंबर 2014 तक 83 हज़ार बाइबल ब्रेल लिपि में छापी थीं. इसके अलावा चीन के विभिन्न भाषा भाषियों को ध्यान में रखते हुए यहां 10 से ज़्यादा भाषाओं में बाइबल का प्रकाशन किया जाता है.

बाइबल के सस्ते संस्करण
एमिटी कंपनी ने चीन में आम आदमी की पहुंच की कीमतों को ध्यान में रखते हुए बाइबल के सस्ते संस्करण छापने की शुरुआत की थी. 100 रुपये से 300 रुपये तक की कीमत के संस्करण छापे गए ताकि ग्राहकों की संख्या बढ़ सके. इसके लिए हल्के यानी कम वज़न के कागज़ का इस्तेमाल किया गया और इस कदम से कोरिया से छपने वाली बाइबल के कारोबार पर चीन के कारोबार ने बढ़त हासिल की.

क्यों है चीन में इतना प्रकाशन?
चीन को मैनुफैक्चरिंग हब कहा जाता है. वैश्वीकरण के बढ़ते दौर में बाज़ार के लिहाज़ से चीन ने मैनुफैक्चरिंग सेक्टर के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा किया था. इन्हीं नीतियों का लाभ बाइबल प्रकाशन को भी मिला और कुछ ही सालों में स्थिति ये है कि दुनिया में जितनी बाइबल छपती हैं, उसका आधा प्रकाशन चीन में होता है. अमेरिका और यूरोप में भी 'मेड इन चाइना' टैग वाली बाइबल अपनी क्वालिटी और कीमत के चलते खूब बिकती हैं.

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एमिटी प्रिंटिंग कंपनी में प्रकाशन की क्वालि​टी जांचता एक कर्मचारी.


ट्रेड वॉर में बढ़ीं कीमतें
पिछले करीब डेढ़ साल से अमेरिका और चीन के बीच जो ट्रेड वॉर जारी है, उसका नतीजा ये है कि चीन से छपने वाली बाइबल की कीमतों में भी इज़ाफा हो रहा है. ट्रंप ने चीन से आने वाली 250 अरब डॉलर की वस्तुओं पर 25 फीसदी आयात शुल्क लगाया तो बदले में चीन ने भी ऐसा ही कदम उठाया. चीन में भी ईसाइयों को बाइबल की ज़्यादा कीमत चुकाना पड़ रही है. चर्च और अमेरिका के धार्मिक समूहों ने बाइबल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता ज़ाहिर की तो ट्रंप ने भी इस पर गुस्सा जताकर चीन को ज़िम्मेदार ठहराया.

और स्मार्टफोन बाइबल
चीन की कंपनी एमिटी कह चुकी है कि युवाओं को ध्यान में रखकर उसने इस आइडिया पर काम किया. चर्च जाने वाले युवा किताब के बजाय मोबाइल फोन के ज़रिये बाइबल पढ़ने में रुचि रखते हैं. इस ट्रेंड को ध्यान में रखकर एमिटी ने स्मार्टफोन पर बाइबल से जुड़े एप्स भी मार्केट में उतारे और उनसे भी अच्छा रिस्पॉंस मिला.

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