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ये है चीन का सबसे बड़ा ट्रेनिंग बेस, पड़ोसी देश ऐसे करता है सेना को तैयार!

ये है चीन का सबसे बड़ा ट्रेनिंग बेस, पड़ोसी देश ऐसे करता है सेना को तैयार!

चीन की सेना (फाइल फोटो)

चीन की सेना (फाइल फोटो)

Zhurihe Combined Tactics Training Base: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच जारी तनाव के मद्देनजर दोनों देशों की सेना की तैयारियों को लेकर खूब चर्चा हो रही है. आज हम आपको चीन के सबसे बड़े ट्रेनिंग बेस के बारे में बताते हैं जो एशिया का सबसे बड़ा सैन्य ट्रेनिंग बेस है. यहीं से चीन भविष्य के लिए अपनी सेना को तैयार करता है.

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    Zhurihe Combined Tactics Training Base: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच जारी तनाव के मद्देनजर दोनों देशों की सेना की तैयारियों को लेकर खूब चर्चा हो रही है. आज हम आपको चीन के सबसे बड़े ट्रेनिंग बेस के बारे में बताते हैं जो एशिया का सबसे बड़ा सैन्य ट्रेनिंग बेस है. यहीं से चीन भविष्य के लिए अपनी सेना को तैयार करता है. यह ट्रेनिंग बेस राजधानी बीजिंग से करीब 400 किमी दूर उत्तरी चीन के सुदूर इलाके में स्थित है. इस बेस का नाम है जुरिहे कम्बाइंड टैक्टिक्स ट्रेनिंग बेस (Zhurihe Combined Tactics Training Base).

    क्या है Zhurihe
    यह एक बेहद बड़ा सैन्य ट्रेनिंग कैंप है जो मंगोलिया स्वाययत क्षेत्र के भीतरी हिस्से में स्थित है. यह पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक ट्रेनिंग कैंप है. इस कैंप को चीन के सैनिकों को वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति में लड़ने की ट्रेनिंग देने के लिए तैयार किया गया है. यह ट्रेनिंग बेस 1066 वर्ग किमी में फैला हुआ है. यह करीब-करीब हांगकांग के पूरे भूभाग के बराबर है.

    मैदानी, पहाड़ी और मरुस्थली युद्ध का अभ्यास
    यहां पर सेना के अपने अस्पताल और अन्य सुविधाएं हैं. यहां पर चीन के सैनिक मैदानी, पहाड़ी और मरुस्थली युद्ध का अभ्यास करते हैं. यहां होने वाले युद्धाभ्यास के बारे में चीन के सरकारी टीवी चैनल ने वीडियो जारी किए हैं. यहां पर कई बार ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय भवन की तरह बने एक भवन के पास सैनिकों को लड़ते दिखाया गया. इससे लगता है कि चीन की सेना के निशाने पर ताइवान हमेशा से रहा है. चीन, ताइवान को अपना भू-भाग मानता है. चीन में कम्युनिस्ट क्रांति के वक्त ताइवान अस्तित्व में आया था.

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    किस तरह के युद्धाभ्यास होते हैं यहां
    Zhurihe बीते करीब एक दशक से वास्तविक युद्धाभ्यास होता आ रहा है. ऐसे युद्धाभ्यास में आमतौर पर रेड और ब्लू यूनिटें भाग लेती रही हैं. यहां पीएलए के लड़ाकू दस्ते के अलावा मेडिकल की टीमें भी ट्रेनिंग लेती हैं.

    वर्ष 2014 में Zhurihe में एक छह दिवसीय संयुक्त एंटी-टेरर अभ्यास को अंजाम दिया था. इसमें रूस, किर्गिजस्तान, कजिकिस्तान और तजिकिस्तान की सेनाएं भी शामिल थीं.

    कौन है रेड और ब्लू आर्मी
    दुनिया के कई देशों में तथाकथित विरोधी सेनाएं होती हैं. जो सैन्य अभ्यास में एक दूसरे के विरोध में लड़ती हैं. पश्चिमी देशों में विरोधी सेना को आमतौर पर रेड आर्मी कहा जाता है, लेकिन ये रंग एक कम्युनिस्ट देश का प्रतीक है. ऐसे में चीन के युद्धाभ्यास में यह रंग पीएलए का होता है. चीन की ब्लू आर्मी की स्थापना वर्ष 2014 में की गई. युद्धाभ्यास में पीएलए की यूनिटें जो रेड आर्मी कहलाती है वो ब्लू आर्मी से लड़ती है.

    ब्लू आर्मी पूरी तरह नाटो की सेना की तरह कमान सिस्टम और टैक्टिस अपनाती है. इसके कमांडर का कहना है कि हमारा काम दुश्मन को पढ़ना और दुश्मन की तरह लड़ना है.

    कैसे लड़ती है दोनों सेनाएं
    युद्धाभ्यास के दौरान रेड और ब्लू दोनों सेनाएं अलग-अलग तरह के क्षेत्रों में अभ्यास करती हैं. इसमें परमाणु, केमिकल और जैविक युद्धों के साथ शहरी क्षेत्रों में कैसे लड़ाई लड़ी जाए, इसका भी अभ्यास शामिल है. इस ट्रेनिंग में तरह-तरह के तरीके अपनाए जाते हैं. इसमें सैनिक और कमांडरों को किडनैप करने तक की ट्रेनिंग दी जाती है.

    अभ्यास में कौन से हथियार इस्तेमाल किए जाते हैं.
    युद्धाभ्यास में दोनों सेनाएं टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां और अन्य साजो समान का इस्तेमाल करती हैं. इनके पास इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और एयर सर्विलांस भी होते हैं. कई बार को ब्लू आर्मी को अमेरिकी सेना की पेश किया जाता है और उनके अत्याधुनिक हथियार और गोले-बारुद दिए जाते हैं.

    Tags: China Army, China govt, Chinese Army

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