क्या तुर्की कोरोना वैक्सीन के बदले चीन से उइगर मुस्लिमों का सौदा कर लेगा?

 (Photo-news18 English via Reuters)

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चीन अपनी कोरोना वैक्सीन (Chinese coronavirus vaccine) तुर्की को भी देने वाला है लेकिन कथित तौर पर डील के बाद भी पहले खेप तुर्की (Turkey) पहुंचने में समय लग रहा है. ये एक तरह का दबाव है ताकि तुर्की उइगरों को लौटा दे.

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  • Last Updated: January 3, 2021, 2:12 PM IST
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बीच-बीच में चीन को दोस्त बताता तुर्की इन दिनों चीन के चलते ही भारी दबाव में है. चीन को शक है कि उसके यहां आतंक फैलाकर बहुत से उइगर मुस्लिम तुर्की जा छिपे हैं. अब चीन उन कथित आतंकियों को तुर्की से वापस लौटाने की बात कर रहा है. ये भी हो सकता है कि तुर्की के इनकार पर चीन उसे अपनी कोरोना वैक्सीन सौंपने से इनकार कर दे.

चीन की सिनोवेक कंपनी की कोरोना वायरस वैक्सीन कोरोनावेक उसके लिए बड़ा हथियार साबित होती दिख रही है. कम से कम चीन के नए-नए कारनामे देखकर तो यही लग रहा है. तुर्की से उसने हाल ही में साल 2017 की एक संधि पर हामी भरने का दबाव डाला है. इस संधि के तहत तुर्की चीन को वे उइगर मुसलमान वापस लौटाएगा, जो उसके यहां शरण लिए हुए हैं.

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चीन को शक ये है कि लोग आतंकी गतिविधियों से जुड़े हैं और उन्हें चीन में वापस लौटाए जाने पर सही एक्शन लिया जा सकेगा. तीन साल पहले ही इस द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि पर बात हो चुकी थी लेकिन चीन ने हाल ही में इसे स्वीकार किया और अब तुर्की को ऐसा करने को कह रहा है.

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तुर्की उइगर मामले पर मुंह सिले बैठा है (सांकेतिक फोटो)

आतंकियों को वापस लौटाने में तुर्की को क्या मुश्किल है?

इसकी कई वजहें हैं. एक तो ये कि अब तक चीन ये पक्का नहीं कह सका कि उसके यहां के कैंपों से भागे उइगर वाकई में आतंकी गतिविधि में लिप्त थे. बता दें कि चीन के शिनजियांग प्रांत में 10 लाख से भी ज्यादा उइगर मुस्लिम रीएजुकेशन कैंपों में हैं. वैसे तो चीन इन कैंपों में पढ़ाई-लिखाई करवाने जैसी बात करता है लेकिन असल में यहां की हालत काफी खराब है. कई इंटरनेशनल खबरों के मुताबिक यहां मुस्लिमों के साथ हिंसा होती है ताकि वे धर्म छोड़ दें और पूरी तरह से चीनी संस्कृति अपना लें.



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तुर्की पर मानवाधिकार संस्थाओं का दबाव है कि वो किसी भी हाल में अपने यहां शरण लिए उइगरों को चीन को न सौंपे. ऐसे में मुस्लिमों के हितों का राग अलापने वाला तुर्की अगर ऐसा करता है तो मुस्लिम देशों पर उसकी पकड़ कमजोर हो सकती है. वैसे पहले से ही उइगर के मामले में तुर्की के रवैये पर सवाल उठते रहे हैं.

तुर्की हर मामले में बोलता है सिवाय उइगरों के

ये वही तुर्की है जो कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के पक्ष में बोलता रहा. तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा था कि कश्मीर की आबादी पर दशकों से भारत हिंसा कर रहा है और उसे पाकिस्तान से मिल जाना चाहिए. एक ओर तुर्की लगातार इस्लामिक देशों की रक्षा की बात कर रहा है तो दूसरी ओर उइगर मामले पर मुंह सिले बैठा है.

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चीन के शिनजियांग प्रांत में 10 लाख से भी ज्यादा उइगर मुस्लिम रीएजुकेशन कैंपों में हैं सांकेतिक फोटो (news18 English via CNN)

न बोलने के लिए पैसे खाने का आरोप

तुर्की की चुप्पी के प्रमाण सार्वजनिक तौर पर मिल चुके हैं. साल 2019 में नाटो के देशों ने मिलकर चीन में उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार के खिलाफ पत्र जारी किया, लेकिन तुर्की ने उसमें कोई सहयोग नहीं किया. यहां तक कि तुर्की में विपक्षी पार्टी ने जब उइगर मुस्लिमों पर हिंसा के पड़ताल की बात की तो सदन ने उसे खारिज कर दिया. डिप्टोमेट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक तक गुस्साए विपक्ष ने ये आरोप तक लगा दिया था कि तुर्की ने चुप रहने के लिए 50 बिलियन डॉलर के लगभग रकम ली है.

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तुर्क से ही हैं उइगर

तुर्की की ये चुप्पी तब और बड़ी बात है जबकि खुद उइगर मुसलमान तुर्की का ही हिस्सा रहे हैं. ये लोग 14वीं सदी में चीन के हुनान प्रांत में एक विद्रोह को दबाने के लिए बुलाए गए थे, जिसके बाद काफी उइगर सैनिक वहीं बस गए. ये लोग उइगुर भाषा बोलते हैं जो तुर्की भाषा परिवार की एक बोली है. यानी खुद अपने ही देशवासियों पर हिंसा को देखते हुए भी तुर्की विरोध नहीं कर रहा.

चीन और तुर्की के बीच कोरोना वैक्सीन को लेकर भारी डील हो चुकी है

मामले को टाल रहे हैं तुर्की नेता

एर्दोआन अपने इस तरीके के कारण अब संदेह के घेरे में हैं. उइगर अमेरिकन एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष उन पर आरोप भी लगा चुके हैं कि तुर्की की चुप्पी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने भारी पैसे देकर खरीदी है. एक समय पर तुर्की उइगरों का अपना देश हुआ करता था लेकिन अब वे चीन में हिंसा झेल रहे हैं. इसे देखते हुए विपक्ष लगातार उन्हें चीन से वापस बुलाने की मांग भी कर रहा है लेकिन हर बार एर्दोआन किसी और मुद्दे को उठा देते हैं.

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अब चीन और तुर्की के बीच कोरोना वैक्सीन को लेकर भारी डील हो चुकी है लेकिन वैक्सीन की पहली बैच चीन से तुर्की निकलने में समय लग रहा है. माना जा रहा है कि ये देर जानबूझकर हो रही है ताकि तुर्की सरकार पर उइगरों को सौंपने का दबाव बनाया जा सके. खुद चीन के मानवाधिकार कार्यकर्ता भी ये रह रहे हैं. यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में द गार्डियन के हवाले से बताया गया कि कैसे चीन वैक्सीन के मामले में देरी कर देशों से अपनी बात मनवा सकता है.

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