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चीन के नए सीमा कानून के क्या हैं मायने; क्या LAC पर और बढ़ेगा टकराव?

चीन के नए सीमा कानून के क्या हैं मायने; क्या LAC पर और बढ़ेगा टकराव?

चीन के नए सीमा कानून का भारत के लिए क्या हैं मायने.

चीन के नए सीमा कानून का भारत के लिए क्या हैं मायने.

China Border Law: बीते शनिवार को चीन के नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ने सीमा सुरक्षा प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए एक नए कानून को मंजूरी दे दी. ऐसे में इन नए कानून को भारत के साथ सीमा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है.

    बीते शनिवार को चीन के नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ने सीमा सुरक्षा प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए एक नए कानून को मंजूरी दे दी. ऐसे में इन नए कानून को भारत के साथ सीमा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है. भारत और चीन के बीच बीते कुछ सालों से सीमा और एलएसी पर टकराव की स्थिति बनी हुई है. जानकारी चीन के इस नए कानून को इसी टकराव का नतीजा मान रहे हैं. ऐसे में आइए जानने कि कोशिश करते हैं कि आखिर यह नया कानून क्या है और भारत के साथ विवाद पर इसका क्या असर पड़ेगा?

    क्या है चीन का नया कानून
    दरअसल, देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को ‘पवित्र और अक्षुण्ण’ बताते हुए चीन ने सीमावर्ती इलाकों के संरक्षण और उपयोग संबंधी एक नया कानून अपनाया है जिसका असर भारत के साथ बीजिंग के सीमा विवाद पर पड़ सकता है. यह कानून अगले वर्ष एक जनवरी से प्रभाव में आएगा. इसके मुताबिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता पावन और अक्षुण्ण है. देश क्षेत्रीय अखंडता और जमीनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए तथा जमीनी सीमाओं और क्षेत्रीय संप्रभुता को कमतर करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ कदम उठाएगा.

    इस कानून का जमीन पर क्या होगा असर
    इस मसले पर टाइम्स ऑफ इंडिया में सुयाष देसाई लिखते हैं. चीन ने इस साल के शुरू में कोस्टगार्ड कानून बनाया था. इस कानून के तहत उसने दक्षिण चीन सागर में अपनी कार्रवाइयों को कानूनी जमा पहनाया था. कुछ इसी तरह चीन का जमीनी सीमा कानून भारत और भूटान से लगी सीमा पर उसकी सेना द्वारा की जा रही कार्रवाइयों को एक कानूनी जामा पहनाना है. इससे व्यापक स्तर पर कुछ बदलाव नहीं आएगा बल्कि उसकी सेना जमीनी स्तर पर जो काम कर रही है, उसको अब कानूनी संरक्षण मिल गया है. इससे उसकी सेना का मनोबल बढ़ेगा.

    यहां यही सबसे बड़ा मुद्दा है. भारत और भूटान के साथ लगी सीमा पर चीन की सेना का रुख बेहद आक्रामक है. इसको लेकर भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है. लेकिन तनाव जस का तस बना हुआ है.

    क्यों बनाया गया ये कानून
    सीमा सुरक्षा को मजबूत करने आर्थिक एवं सामाजिक विकास में मदद देने, सीमावर्ती क्षेत्रों को खोलने, ऐसे क्षेत्रों में जनसेवा और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने, उसे बढ़ावा देने और वहां के लोगों के जीवन एवं कार्य में मदद देने के लिए देश कदम उठा सकता है. वह सीमाओं पर रक्षा, सामाजिक एवं आर्थिक विकास में समन्वय को बढ़ावा देने के लिए उपाय कर सकता है.

    कानून के अनुसार देश समानता, परस्पर विश्वास और मित्रतापूर्ण वार्तालाप के सिद्धांतों का पालन करते हुए पड़ोसी देशों के साथ जमीनी सीमा संबंधी मुद्दों से निबटेगा और काफी समय से लंबित सीमा संबंधी मुद्दों और विवादों को उचित समाधान के लिए वार्ता का सहारा लेगा. इसमें कहा गया है कि चीनी सेना अभ्यास करके और हमलों, अतिक्रमण, उकसावे एवं अन्य गतिविधियों को दृढ़ता से रोकने के लिए सीमा पर अपना कर्तव्य निभाएगी.

    सीमा से लगे इलाकों के विकास पर विशेष जोर
    चीन ने पिछले कुछ सालों में अपने सीमा संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है. उसने हवाई, रेल और सड़क नेटवर्क का विस्तार किया है. उसने तिब्बत में बुलेट ट्रेन की शुरुआत भी की है जिसके मार्ग का निर्माण अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती कस्बे नींगची तक किया गया है. नए कानून में सीमाओं पर व्यापार क्षेत्रों की स्थापना तथा सीमा आर्थिक सहयोग क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव है.

    भारत के साथ अटका है सीमा विवाद
    बीजिंग ने अपने 12 पड़ोसियों के साथ तो सीमा संबंधी विवाद सुलझा लिए हैं लेकिन भारत और भूटान के साथ उसने अब तक सीमा संबंधी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया है. भारत और चीन के बीच सीमा विवाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 3,488 किलोमीटर के क्षेत्र में है जबकि भूटान के साथ चीन का विवाद 400 किलोमीटर की सीमा पर है.

    Tags: China, China border, China india

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