रूस ने नासा से बनाई दूरी, चंद्रमा पर स्टेशन बनाने के लिए करेगा चीन के साथ काम

रूस (Russia) और चीन (China)का यह गठजोड़ नासा (NASA) के आर्टिमिस समझौते की वजह से माना जा रहा है. (फाइल फोटो)

रूस (Russia) और चीन (China)का यह गठजोड़ नासा (NASA) के आर्टिमिस समझौते की वजह से माना जा रहा है. (फाइल फोटो)

रूस (Russia) अब चंद्रमा (Moon) पर इंटनेशनल स्टेशन (International station) बनाने के लिए चीन (China) के साथ काम करेगा. इससे जाहिर होता है कि उसने नासा (NASA) से दूरी बना ली है.

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  • Last Updated: March 10, 2021, 1:25 PM IST
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चीन (China) और रूस (Russia) ने एक अंतरराष्ट्रीय लूनार रिसर्च स्टेशन (ILRS) के संयुक्त निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. बताया जा रहा है कि यह समझौता रूस की नासा (NASA) से दूरी का एक अहम संकेत है जो आने वाले समय में अंतरिक्ष प्रतिसर्धा (Space Race) को एक अलग दिशा दे सकता है. इसके अलावा यह समझौता चीन को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्षेत्र में और ज्यादा महत्व मिलने का भी संकेत है.

चंद्रमा पर स्टेशन के लिए सहयोग

इस समझौते पर मंगलवार को चीनी स्पेस एजेंसी सीएनएसए के प्रमुख जांग केजियान और रूसी स्पेस एजेंसी प्रमुख रोसमोसकोस के प्रमुख दिमित्री रोगोजिन ने हस्ताक्षर किए. सीएनएसए के अनुसार दोनों देश चंद्रमा पर एक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का निर्माण करेंगे जिसके लिए वे आपसी परामर्श और सहयोग करेंगे.

कौन हो सकता है इसमें भागीदार
यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ उन देशों के लिए खुली रहेगी जो इसमें दिलचस्पी रखते हैं. इस परियोजना का लक्ष्य अंतरिक्ष के उपयोग और मानव के शांतिपूर्ण अन्वेषण को बढ़ावा देने और वैज्ञानिक आदान प्रदान के लिए किया जाएगा. चीन पहले से ही कई देशों के साथ मिलकर खुद का एक इटरनेशनल स्पेस स्टेशन को बनाने के लिए पहले से ही काम कर रहा है.

एक बड़ा रिसर्च बेस होगा ये स्टेशन

यह इंटरनेशनल लूनार साइंटिफिक एंड रिसर्च स्टेशन लंबे समय के लिए एक व्यापक बेस की तरह काम करेगा जिसमें स्वायत्त प्रयोग किए जा सकेंगे, इसमें एक ऐसा मंच उपलब्ध कराया जाएगा जिससे चंद्रमा का उपयोग और अन्वेषण किया जा सके. यहां पर वैज्ञानिक प्रयोगों के साथ तकनीकी परियोजनाओं का पुष्टिकरण किया जाएगा जो या तो चंद्रमा की सतह पर या फिर चंद्रमा की कक्षा में किए जाएंगे.



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चंद्रमा (Moon) पर स्पेस स्टेशन बनाने से पहले नासा वहां बेस कैंप बनाना चाहता है.


नासा से दूरी

रूस का यह कदम नासा से दूरी बनाने की शुरुआत माना जा रहा है. 1990 के दशक की शुरुआत में शीतयुद्ध खत्म होने के बाद रूस नासा से सहयोग करने को तैयार हो गया था और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में भी रूस ने अहम भागीदारी निभाते हुए सहयोग किया था. यहां तक कि रूस ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक अमेरिकी और अन्य सभी देशों के यात्रियों को आईएसएस तक पहुंचाने का काम भी किया था.

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पहले मिलने लगे थे संकेत

लेकिन पिछले साल नासा ने आर्टिमिस अभियान की तैयारी शुरू करते समय एक आर्टिमस अकॉर्ड जारी किया था जिसमें चंद्रमाऔर अंतरिक्ष उत्खनन  के लिए अपने सहयोगियों के लिए कुछ दिशा निर्देशों की अनुशंसा की गई थी. रूस ने इसका खुलकर विरोध नहीं किया तो आपत्ति तो जताई ही थी.

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नासा (NASA) के आर्टिमिस समझौते का मसविदा रूस को पसंद नहीं आया था. (तस्वीर: नासा)


चीन का पहले से था यह इरादा

चीन ने पहले इस बात का खुलासा किया था वह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन बनाना चाहता है. इस अभियान में पहले रोबोट्स को भेजने की तैयारी थी और उसके बाद  मानवीय अभियान बाद से भेजे जा सकते हैं. यह अभियान 2030 दशक के शुरुआती सालों में शुरु हो सकता है.

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जहां नासा ने भी अपने आर्टिमस समझौते में कई देशों को शामिल किया है, तो वहीं चीन पहले ही अपने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में कई सहयोगी बना चुका है. रूस का चीन की ओर झुकाव अमेरिका के वर्चस्व एवं एकाधिकार को कमजोर कर सकता है. हो सकता है कुछ समय बाद हमें एक अंतरिक्षीय शीत युद्ध देखने को मिल जाए, लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी हो सकती है.
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