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इंडियन वैक्सीन के आगे कैसे धड़ाम हुआ चाइनीज टीका, कैसे भारत बना 'पावरहाउस'

अब दुनिया भी मान रही है कि कोविड-1्9 में भारत में बनी वैक्सीन असरदार है और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
अब दुनिया भी मान रही है कि कोविड-1्9 में भारत में बनी वैक्सीन असरदार है और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.

ब्राजीली वैज्ञानिकों की इस रिपोर्ट के बाद कि चाइनीज कोरोना टीका केवल 50 फीसदी ही असरदार है, पूरी दुनिया में चीनी वैक्सीन की डिमांड गिरने लगी है. उस पर सवाल खड़े हो रहे हैं. उसकी जगह अब भारत से वैक्सीन मंगाने के लिए तमाम देशों की मांग बढ़ती जा रही है. कैसे भारत इस स्थिति में पहुंचा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 15, 2021, 7:55 PM IST
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पिछले एक हफ्ते में चीन की सिनोवैक द्वारा बनाया गया कोरोना वायरस का टीका कोरोना वैक औंधे मुंह गिरा. जिन देशों ने उसके लिए आर्डर दिए थे, उन्होंने हाथ पीछे खींचने शुरू कर दिये हैं. इस बीच भारत में बन रहे कोविड टीके की मांग दुनियाभर में बढ़ने लगी है. भारत को वैक्सीन के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी ताकत के रूप में ना केवल स्वीकार कर लिया गया है बल्कि चीन के अखबार और विशेषज्ञ अब खुद मान रहे हैं कि भारत वैक्सीन के मामले में उनसे आगे है.

ब्राजील अब तक चीन की कोरोना वैक्सीन का इस्तेमाल कर रहा था लेकिन अब वो चाहता है भारत उसको कोविड वैक्सीन कोविशील्ड भेजे. दुनिया के कई देश कोविशील्ड मंगाने का आर्डर दे चुके हैं. एक दर्जन से ज्यादा देश पूरी तरह से देश में निर्मित भारत बॉयोटेक की वैक्सीन कोवैक्सिन खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.

दुनियाभर में तमाम देशों का मीडिया वैक्सीन क्षेत्र में भारत का लोहा स्वीकार कर रहा है. जहां हर कोई मान रहा है कि वैक्सीन निर्माण में भारत दुनिया में नंबर वन है, वहीं चीन के एक्सपर्ट भी मान रहे हैं कि भारत का सीरम इंस्टीट्यूट बहुत मेच्योरी और क्वालिटी के साथ वैक्सीन तैयार करता है. उसकी उत्पादन क्षमता भी जबरदस्त है.



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दुनियाभर से आई वैक्सीन की डिमांड
भारत में दो तरह की वैक्सीन को अब तक मंजूरी मिली है, वो हैं कोविशील्ड और कोवैक्सिन. कोविशील्ड को पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ने आक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका की मदद से तैयार किया है. इन दिनों सीरम इंस्टीट्यूट में दिन-रात वैक्सीन बनाने का काम चल रहा है. भारत की डिमांड के साथ दुनियाभर के कई देश उसे बड़ा आर्डर दे चुके हैं.

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इन दिनों सीरम इंस्टीट्यूट में दिन-रात वैक्सीन बनाने का काम चल रहा है. भारत की डिमांड के साथ दुनियाभर के कई देश उसे बड़ा आर्डर दे चुके हैं.


भारत बॉयोटेक का टीका पूरी तरह स्वदेशी
साथ ही भारत बॉयोटेक का भी दावा है कि उनका टीका 90 फीसदी सुरक्षित और कारगार है. ये पूरी तरह स्वदेश में बना है. इसे लेकर भी दुनिया भर से डिमांड आ रही है, इसमें ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं. भारत बायोटेक के पास ना केवल जबरदस्त रिसर्च सुविधाएं हैं बल्कि इसकी उत्पादन क्षमता भी काफी बड़ी है. वो इससे पहले बीमारियों का टीका ईजाद कर चुका है, जिसका दुनियाभर में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है.

कोरोना वैक्सीन के मामले में भारत बड़ी ताकत बनकर उभरा
लिहाजा इस समय दुनियाभर में कोरोना के वैक्सीन के मामले में वाकई भारत एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है. इसने ग्लोबल तौर पर भारत को एक ताकत के तौर पर सामने किया है. लोग मानने लगे हैं कि भारत ने बड़ी छलांग लगाई है. ये हकीकत है कि दुनियाभर में जितनी बीमारियों की वैक्सीन इस्तेमाल हो रही हैं, उसमें आधे से ज्यादा का उत्पादन भारत में ही होता है.

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क्यों धड़ाम हो गई चाइनीज कोरोना वैक्सीन
अब आइए बात करते हैं कि चीन की कोरोना वैक्सीन के धड़ाम होने की. दरअसल ब्राजील समेत कई विकासशील देशों ने चीन की कोरोना वैक्सीन के आर्डर दिए थे. लेकिन बीते हफ्ते जब ब्राजील ने चाइनीज वैक्सीन को लेकर अपनी लैब में जांच की और जिन लोगों को ये दी गई, उनके रिजल्टों पर गौर किया तो ये निष्कर्ष निकला कि चीन की वैक्सीन बहुत कमजोर है.

बीते हफ्ते जब ब्राजील ने चाइनीज वैक्सीन को लेकर अपनी लैब में जांच की और जिन लोगों को ये दी गई, उनके रिजल्टों पर गौर किया तो ये निष्कर्ष निकला कि चीन की वैक्सीन बहुत कमजोर है.


केवल 50 फीसदी असरदार चीनी टीका
ब्राजीली वैज्ञानिकों का कहना है कि चीनी टीका केवल 50 फीसदी असरदार है. इस निष्कर्ष के आते ही तमाम वो देश जिन्होंने चीनी टीके के लिए बडे़ बडे़ आर्डर दिए थे, वो अब इस पर सवाल करने लगे हैं. उन्हीं में बहुत से देशों ने अब भारत से वैक्सीन भेजने का अनुरोध किया है.

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खड़े हो रहे हैं टीके पर सवाल
चीन की जिस कंपनी ने वैक्सीन बनाई है, वो उनके सरकारी क्षेत्र की बीजिंग की कंपनी सिनोवैक है. ये वैक्सीन ना केवल सस्ते में बेची गई बल्कि इसे दूसरे टीकों के आने से पहले ही बना लेने का दावा किया गया था. अब जबकि इस वैक्सीन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं तो चीन का मीडिया इसे दबाने में लगा है. माना जा रहा है कि इससे चीन को बड़ा झटका लगा है. हालांकि चीन की वैक्सीन क्षमता हमेशा संदिग्ध रही है. उसके वैक्सीन डाटा पर भी सवाल उठ रहे हैं.

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पुरानी तकनीक से बनी चीनी वैक्सीन
दरअसल चीन ने जो वैक्सीन बनाई है जो पुरानी तकनीक से बनाई है यानि ये वैक्सीन रसायन से बनाई है, पुरानी तकनीक वायरस को कमजोर करने या मारने का काम करती है लेकिन इससे उसकी ताकत कम हो जाती है और शरीर में प्रतिरोधक क्षमता या इम्युनिटी दमदार तरीके से नहीं बन पाती. इससे इम्यून रिस्पांस कम या छोटा हो जाता है. इसकी तुलना अमेरिका, यूरोप और भारत में बनी वैक्सीन एमआरएनए तकनीक से बनाई गईं.

कोरोना की वैक्‍सीन बनकर तैयार है. इसको लेकर लोगों में डर है. ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को वैक्‍सीन के बारे में सही जानकारी देना जरूरी है. सांकेतिक फोटो.
चीन ने जो वैक्सीन बनाई है जो पुरानी तकनीक से बनाई है यानि ये वैक्सीन रसायन से बनाई है, पुरानी तकनीक वायरस को कमजोर करने या मारने का काम करती है लेकिन इससे उसकी ताकत कम हो जाती है


चीन ने खुद माना भारत की एक्सपरटाइज का लोहा
पहली बार चीन ने कोरोना वैक्सीन मामले में भारत की एक्सपरटाइज और उत्पादन क्षमता का लोहा माना है. ग्लोबल टाइम्स ने चीनी एक्सपर्ट जियांग चुनलाई को ये कहते हुए उद्धृत किया, "भारत का सीरम इंस्टीट्यूट दुनिया में वैक्सीन का सबसे बड़ा उत्पादक है, वो कहीं ज्यादा परिपक्व तरीके से ना केवल उत्पादन करता है बल्कि उसके पास सप्लाई क्षमता भी है. वो इस मामले में पश्चिमी देशों से भी कहीं आगे है. भारतीय वैक्सीन निर्माताओं ने बहुत पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत दुनिया के बडे़ इंस्टीट्यूट GAVI, पैन अमेरिकन हेल्थ आर्गनाइजेशन, दक्षिण अमेरिका के पाहो (PAHO) से टाईअप कर लिए थे."
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