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Explained: चीन के शिक्षा विभाग का ताजा फरमान क्यों औरतों के खिलाफ है?

चीन की नई शिक्षा नीति का इरादा लड़कों के 'लड़कियों वाले गुण' कम करना है सांकेतिक फोटो (pickpik)

चीन की नई शिक्षा नीति का इरादा लड़कों के 'लड़कियों वाले गुण' कम करना है सांकेतिक फोटो (pickpik)

चीनी शिक्षा मंत्रालय (Education ministry in China) का मानना है कि लड़कों में मजबूत और बहादुरी जैसी खूबियां घट गई हैं और वे लड़कियों जैसे होते जा रहे हैं. इसे ही सुधारने को स्कूलों में लड़कों के लिए अनिवार्य जैसे विषय खेलकूद होंगे.

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    सप्ताहभर पहले चीन के शिक्षा मंत्रालय ने एक नोटिस जारी किया, जिसमें शैक्षिक पॉलिसी में बदलाव की बात की गई. नए नियम के मुताबिक स्कूलों में लड़कों के लिए खेलकूद को ज्यादा समय दिया जाएगा. इसका मकसद लड़कों के ‘लड़कियों वाले गुण’ कम करना है. दरअसल चीन के शिक्षा मंत्रालय को लगता है कि चीन के लड़के अब लड़कियों के साथ रहते हुए लड़कों वाले अपने गुण खो रहे हैं.

    शिक्षा विभाग के इस नोटिस को नाम दिया गया- किशोरों में स्त्रीगुण रोकने के लिए मसौदा. इस नाम से ही अनुमान लगाया जा सकता है कि चीनी सरकार को अपने यहां की पुरुष आबादी के फेमिनिस्ट होने का डर सता रहा है. यही वजह है कि नए प्रपोजल में लड़कों में पुरुषत्व लाने की बात की गई है.

    इस प्रपोजल के तहत लड़कों को स्कूल के दौरान खेलकूद में ज्यादा से ज्यादा भाग लेने के कहा जाएगा. कई कोर्स अनिवार्य तौर पर लड़कों के लिए होंगे. साथ ही स्कूल में पुरुष टीचरों की भर्ती की भी बात की गई है ताकि लड़कों पर पुरुष प्रभाव बना रहे.

    chinese boy

    नए नियम के मुताबिक स्कूलों में लड़कों के लिए खेलकूद को ज्यादा समय दिया जाएगा- सांकेतिक फोटो (pxhere)

    इसके पीछे राष्ट्रपति शी जिनपिंग का फुटबॉल प्रेम भी एक कारण माना जा रहा है. बता दें कि फुटबॉल पसंद करने वाले जिनपिंग ने अपने देश को साल 2050 तक वर्ल्ड फुटबॉल सुपरपावर बनाने की भी बात की है. फुटबॉल को चीन में लड़कों के खेल की तरह देखा जाता है और अब स्कूलों में लड़कों के लिए फुटबॉल अनिवार्य होने जा रहा है.

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    चीन की सीनेट में तक इस बारे में बात हो चुकी है. वे मानते हैं कि चीनी लड़कों में मजबूती और बहादुरी कम हो रही है और वे लड़कियों जैसे हो रहे हैं. इसी बुरे असर को कम करने के लिए चीन में नई शिक्षा पॉलिसी आ रही है ताकि लड़कों को सैनिक या पुलिस में ज्यादा लाया जा सके.

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    चीन में लिंग को लेकर भेदभाव कोई नई बात नहीं. यहां तक कि आर्थिक मोर्चे पर इतनी ऊंचाई पर आ चुके इस देश में अब भी लिंग हत्या होती है. यही कारण है कि चीन सेक्स रेश्यो के मामले में दुनिया में सबसे ऊपर खड़े देशों में से है. वहां पर कुल आबादी में पुरुषों की संख्या महिलाओं से लगभग 70 मिलियन ज्यादा है.

    china sex discriminations

    चीन में महिलाओं को लेकर आम सोच भी खास अच्छी नहीं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

    चीन में महिलाओं को लेकर आम सोच भी खास अच्छी नहीं. वहां महिलाओं पर हिंसा का अंदाजा इस बात से लग सकता है कि 40 प्रतिशत शादीशुदा या रिश्ते में आ चुकी महिलाएं यौन हिंसा और मारपीट का शिकार होती हैं. खुद ऑल चाइना वीमन्स फेडरेशन (All-China Women’s federation) ने इस बात की पड़ताल की. ऊपर से संपन्न और आधुनिक दिखने वाले चीन में महिलाओं के साथ हिंसा के तरीके काफी बारीक हैं. जैसे यहां पढ़ी-लिखी महिलाओं के साथ होने वाला भेदभाव.

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    क्वार्टज की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर वहां कोई युवती मास्टर्स से आगे पढ़ने की सोचे या पढ़े तो लड़के उससे शादी के लिए तैयार नहीं होते हैं. यहां तक कि ऐसी लड़कियों को ‘बचा-खुचा’ कहा जाता है. लेता हांग फिंचर ने इसपर एक किताब भी लिखी है- Leftover Women: The Resurgence of Gender Inequality in China.

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    चीन में माओ जेडांग के आने के बाद वहां लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई का स्तर सुधरा था- सांकेतिक फोटो (pixabay)

    चीन की मीडिया वहां शिक्षित लड़कियों के बारे में ये छवि बना रही है. वहां के एक मार्शल आर्ट सीरियल में एक नन थी, जो पढ़ी-लिखी होने के साथ-साथ खासी क्रूर भी थी. सीरियल काफी लोकप्रिय हुआ लेकिन उसके बाद से शिक्षित लड़कियों की तुलना उसी क्रूर नन से होने लगी. इसके लिए चीनी में बाकायदा एक शब्द भी खोज निकाला गया- miejue shitai यानी बिना दया की नन.

    वैसे चीन में कम्युनिस्ट लीडर माओ जेडांग के आने के बाद वहां लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई का स्तर सुधरा था. साल 1981 तक वहां स्कूल जाने वाली लड़कियों की संख्या में 40 प्रतिशत तक इजाफा हुआ. हालांकि इसी दौरान एक दूसरी लहर भी चली. दरअसल चीन में तब इंडस्ट्रीज बढ़ रही थीं. अच्छी कार्यक्षमता के कारण वहां ज्यादा संख्या में महिलाओं की भर्ती होने लगी. इससे परेशान चीन का मीडिया पुराने समय को लौटाने की बात करने लगा, जहां औरतें घर पर रहा करती थीं.

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