क्या है चांद के पिछले हिस्से में Gel जैसी चीज, चीनी वैज्ञानिकों ने लगाया पता

क्या है चांद के पिछले हिस्से में Gel जैसी चीज, चीनी वैज्ञानिकों ने लगाया पता
चीन के चांद के पिछले हिस्से पर भेजे रोवर की तस्वीरों से इस पदार्थ का पता चला था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

चीनी वैज्ञानिकों ने एक पदार्थ (Substance) का विश्लेषण प्रकाशित किया जो उनके रोवर को चांद (Moon) के पिछले हिस्से में पिछले साल दिखाई दिया था.

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चीनी वैज्ञानिकों (Chinese Scientists) ने चांद (Moon) पर एक अजीब पदार्थ पर विश्लेषण प्रकाशित किया है. जिसकी पिछले साल उसके रोवर युटु 2 (Yuto-2) ने खोज की थी. इसे पदार्थको युटु-2 ड्राइव टीम ने पिछले साल जुलाई में खोजा था. चीन के चांगे-4 (Chang’e-4) मिशन के तरह चंद्रमा के पिछले हिस्से का अध्ययन करने के लिए एक रोवर (Rover) चंद्रमा के 8 दिनों के लिए भेजा गया था.

पिछले साल हुई थी इस पदार्थ की खोज
इस खोज के बारे में पिछले साल अगस्त में  चीनी भाषा में प्रकाशित लेख में जानकारी दी गई थी. उस समय इस  पदार्थ को जिआओ जुआंग वू कहा गया था जिसका मतलब Gel के जैसा होता है. उस समय बिना तस्वीर के इस लेख ने वैज्ञानिकों में काफी कौतूहल पैदा किया था.

कैसे पता चला इस पदार्थ का
यह पदार्थ चट्टान से निकला है. अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंस लैटर्स में प्रकाशित आलेख में वैज्ञानिक गोऊ शेंग और उनके सहयोगियों ने युटु-2 के पौनोरामिक एंड हजार्ड एवोएडेंस कैमरों और रोव के विजिबल एंड नियर इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोमटर (VNIS) उपकरण से मिले आंकड़ों का विश्लेषण किया.



Moon
शोध में चांद की सतह की तस्वीरों का अध्ययन किया गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर) (प्रतीकात्मक तस्वीर)


इस खास प्रक्रिया का उपयोग
शोधकर्ताओं ने स्पैक्ट्रल अनमिक्सिंग प्रक्रिया का उपयोग किया और इस पदार्थ के रासायनिक संयोजन और मात्रा के बारे जानने की कोशिश की. उन्होंने पाया कि यह गहरे हरे रंग का चमकने वाला ‘इम्पेट मेल्ट ब्रैचिया’ है यानि कि वह किसी चट्टान के पिघलने से बने नुकीले पत्थरों के टुकड़ों से बना है.  इससे उन्हें ग्लास की उपस्थिति के संकेत मिले जो कि या तो इम्पेक्ट मेल्ट में होता है या फिर ज्वालामुखी के फटने के दौरान निकलता है.

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नासा के अपोलो मिशन के नमूनों से मिलता जुलता है यह पदार्थ
इस शोधपत्र में बताया गया कि यह हरे रंग का पदर्त नासा के 15वें और 17वें अपोलो मिशन से लाए गए दो खास नमूनों से मिलता जुलता है. ब्रैचिया खनिजों के टुकड़ों का जुड़ा हुआ रूप है जो किसी उल्का के टकरना के कारण पिघल कर जुड़े होंगे. इसमें चांद की धूल, रेगोलिथ भी मिली पाई गई है.

Moon
अभी तक चांद के पिछले हिस्से का किसी ने भी अध्ययन नहीं किया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


पुष्टि में समस्या
ये नतीजे निर्णायक नहीं हैं. इस विश्लेषण के साथ समस्या यह है कि जो आंकड़े और इमेज ली गई हैं वह  खराब रोशनी में जमा किए गए थे. वैज्ञानिकों को मानना है कि ये आंकड़े उस इलाके से लिए गए हैं जिसका किसी और तरीके से अन्वेषण नहीं किया जा सका है. ऐसे में स्पैक्ट्रल अनमिक्सिंग खासतौर पर चुनौती भरा काम होता है. नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर से जुड़े डैन मोरियार्टी का मानना है कि हमारे पास इस इलाके के नमूने नहीं हैं जिससे हमें इसके बारे में कुछ पुष्टि के तौर पर कह सकें. इस पेपर में जो नतीजे दिखाए गए हैं वे सटीक नहीं भी हो सकते हैं. उनका कहना है कि इस तरह से चांद के पिछले हिस्से के बारे अन्वेषण करना वास्तव में बहुत ही उत्साहजनक है.

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इस शोधपत्र में आसपास के इलाके के बारे में भी कुछ जानकारी दी है .शोधकर्ताओं के आंकलन के मुताबिक रेगोलिथ विभिन्न स्रोतों के मिश्रण से बनी है. चांगे-4 अंतरिक्ष यान पिछले साल जनवरी में  चंद्रमा के पिछले हिस्से के 180 किलोमीटर चौड़े वॉन कारमैन क्रेटर पर उतरा था.  युटु-2 इस समय अपना 20 वां चंद्रमा दिवस पूरा कर रहा है. चंद्रमा का एक दिन पृथ्वी के दो सप्ताह के बराबर होता है.
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