लगातार भारत की जासूसी कर रहा है चीन, इन दो खास ठिकानों पर टिका रखी है निगाह

हाल के बरसों में भारत पर चीन की जासूसी बढ़ी है. चीन बिजनेस की रणनीति के साथ उन जगहों पर पहुंचने की कोशिश करता है, जहां भारत के अहम सामरिक ठिकाने हैं. चीन हमारे यहां अगर सैन्य गतिविधियों पर नजर रखता है तो कुछ बरसों से इंडस्ट्रियल जासूसी में भी उसकी दिलचस्पी बढी है

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: August 29, 2019, 3:05 PM IST
लगातार भारत की जासूसी कर रहा है चीन, इन दो खास ठिकानों पर टिका रखी है निगाह
चीन ने हाल के बरसों में भारत में बढाई है जासूसी
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: August 29, 2019, 3:05 PM IST
हाल के बरसों में चीन ने भारत में अपनी जासूसी बढ़ा दी है. बिजनेस की आड़ में ये काम अब चीन धड़ल्ले से कर रहा है. चीन की कोशिश उन इलाकों में बिजनेस वेंचर लगाने या इंफ्रास्ट्रक्चर के ठेके लेने की बढ़ी है, जो सामरिक दृष्टि से भारत के महत्वपूर्ण सैन्य इलाके हैं या जहां से अहम सैन्य या इंडस्ट्रियल जानकारियां मिल सकती हैं.

पिछले एक दो दशकों से जब भारत में चीन की कंपनियों को पैर पसारने के ज्यादा से ज्यादा मौके मिल रहे हैं, त्यों-त्यों ये आशंकाएं भी गहराने लगी हैं कि चीनी यहां केवल बिजनेस नहीं करते बल्कि इसकी आड़ में वो लगातार इस देश से अहम जानकारियों, सैन्य और औद्योगिक गतिविधियों, नीतियों और जानकारियों पर नजर रखते हैं.



हालांकि हर देश दूसरे देशों में जासूसी का करता है. चीन ने इसके लिए पूरी दुनिया में अपना बड़ा नेटवर्क बिछा रखा है. ये बात किसी से छिपी नहीं है कि अमेरिका और यूरोप में चीनी जासूस धड़ल्ले से तकनीक जानकारियों से लेकर बिजनेस ट्रिक्स और डेटा पर सेंध लगाते हैं. हर महीने ही इन देशों में चीनी जासूसी से जुड़े बड़े मामलों का खुलासा होता है.

भारत भी इससे अलग नहीं है. एक तो भारत और चीन के बीच सीमा पर हमेशा टकराहट चलती रहती है तो दूसरे चीन की हमेशा कोशिश रही है कि वो अपने इस पड़ोसी देश को अस्थिर करे, चाहे वो सैन्य मजूबती हो या इंडस्ट्री की दुनिया में भारत के बड़े कदम. लेकिन पिछले दिनों ये बात उजागर हुई कि चीन ने भारत के दो सैन्य ठिकानों के आसपास अपनी सक्रियता बढाई है. यहां वो जानकारियां हासिल करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहा है.

पिछले कुछ बरसों में भारत में चीन की जासूसी बढ़ी है


पहला इलाका, जहां जून में चीनियों ने किया था दौरा
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हाल के महीनों में ये बात हमारी खुफिया एजेंसियों ने भी जाहिर की है. दरअसल खुफिया एजेंसी की उस समय अलर्ट हो गईं जबकि जून के महीने में चीन के एक बिजनेस डेलिगेशन ने कर्नाटक के आईएनएस कादंबा से जुड़े इलाकों का दौरा किया. ये कहा गया कि चीन इस इलाके में इंडस्ट्री लगाने से लेकर बिजनेस वेंचर की संभावनाएं देख रहा है लेकिन असलियत कुछ और ही थे. इंटैलिजेंस सूत्रों का साफ कहना है कि इस दौरे की आड़ में असल मामला इस नौसेना बेस की जानकारियां हासिल करने की कोशिश है.

ये नौसैनिक बेस इसलिए कहीं और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यहां एयरक्राफ्ट करियर के डॉक्स भी बने हैं. लिहाजा ये देश का सामरिक तौर पर अहम इलाका है. यहां चीनियां का किसी ना किसी बहाने आना कान खड़े करता है.

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पिछले कुछ बरसों से चीन की दिलचस्पी दक्षिण भारत के सैन्य ठिकानों, अहम सामरिक स्थलों के आसपास छोटे छोटे बिजनेस फैलाने की रही है. इंटैलिजेंस एजेंसियों का ये भी कहना कुछ चीनी कंपनियां बराबर ये कोशिश कर रही हैं कि उन इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर में कम से कम कीमत में नीलामी के आवेदन में शामिल हों, जो सैन्य प्रतिष्ठानों या ऐसी जगहों के आसपास हों, जहां से अहम जानकारियां हासिल हो सकें.

आईएनएस कादंबा नौसेना बेस, जिसके आसपास के इलाकों में चीन के एक बिजनेस डेलिगेशन के दौरे के बाद खुफिया एजेंसियां चौकन्नी हो गईं


दूसरा ठिकाना, जिसके आसपास नजर आए हैं चीनी
चीन की नजर में जो दूसरा अहम ठिकाना चर्चाओं में आया है, वो ओडिसा का वो व्हीलर द्वीप है, जिसका नामकरण पिछले एपीजे कलाम के नाम पर किया गया था, ये डीआरडीओ यानि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (Defence Research & Development Organisation) का वो केंद्र है, जहां से भारत हर तरह की मिसाइल का परीक्षण करता रहा है. चाहे वो अग्नि मिसाइल हो या फिर कोई अन्य मिसाइल.

इंटैलिजेंस एजेंसियों के हवाले से इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स की रिपोर्ट कहती है कि कुछ समय पहले जब हमारे खुफिया अफसरों ने ये देखा कि इस इलाके के आसपास चीनी लोग बिजनेस से लेकर नौकरियां कर रहे हैं तो उनके कान खड़े हो गए. जाहिर है कि इस इलाके आसपास के इलाकों में चीनियों की आमद यही संकेत देती है कि वो इस अहम एरिया में जरूरी सूचनाएं हासिल करने के लिए पैर जमा रहे हैं. यूं भी चीनी कंपनियां पूरे देश में अपने पैर पसार रही हैं और इसके अपने खतरे भी हैं.

ओडिसा का व्हीलर द्वीप, जो डीआरडीओ की मिसाइल टेस्टिंग का अहम केंद्र है


कोलकाता और इन शहरों में बढ़ी है चीनियों की आवाजाही
एक रिपोर्ट ये भी कहती है कि चूंकि कोलकाता में चाइनीज टाउन इलाके में बड़े पैमाने पर चीनी मूल के लोग रहते हैं, लिहाजा इस शहर में किसी चीनी का दिखना असामान्य नहीं है लिहाजा चीन पहले यहां अपने ऐसे लोगों को भेजता है जो जानकारियां इकट्ठी कर सके, इसमें वैज्ञानिक से लेकर शिक्षाविद, पत्रकार और बिजनेसमैन शामिल हैं. वो यहां से देशभर में जाकर अपने तरीके से मिले हुए मिशन को पूरा करते हैं. इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स की रिपोर्ट ये भी कहती है कि केवल कोलकाता ही नहीं बल्कि वैल्लोर और कोयंबटूर ऐसे सेंटर हैं, जहां चीनियों की आवाजाही पिछले कुछ बरसों में ज्यादा बढ़ी है.

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चीनी राजदूत आसाम के तिनसुकिया क्यों गए थे
वर्ष 2017 में चीन के राजदूत लियो झाओहुई जब असम के तिनसुकिया के उस इलाके में गए, जहां दूसरे विश्व युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की कब्रगाह है तो भी उनकी ये यात्रा सुर्खियों में आ गई. किसी को उनकी इस यात्रा का उद्देश्य समझ में नहीं आया. वैसे तिनसुकिया के आसपास इंडियन आर्मी का बड़ा बेस है और ये इलाका भारत-चीन बॉर्डर से करीब है.

अमेरिकी मैगजीन अटलांटिक की रिपोर्ट कहती है कि चीन दुनियाभर में अलग अलग तरीकों से एक्सपर्ट और काम के लोगों का फांसता है, उन्हें धीरे धीरे अपने प्रभाव में लाकर जरूरी सूचनाएं हासिल कर लेता है. हाल के दिनों में चीन ने सोशल मीडिया साइट लिंक्डइन को हथियार बनाया है. इसके लिए वो अपनी कुछ संस्थाओं या कंपनियों के लिए काम के लोगों की सेवाएं हासिल करने की कोशिश कर रहा है.

चीन का जासूसी का तरीका अमेरिका और रूस से कुछ अलग है. वो बहुत कम समय के लिए ऐसे रिमोट एजेंट्स की सेवाएं लेता है, जिन्हें खुद नहीं मालूम होता कि वो क्या कर रहे हैं


चीन कम समय के लिए रिमोट एजेंट्स की सेवाएं लेता है
हालांकि भारत के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि चीन की जासूसी का तरीका अमेरिका, रूस या अन्य यूरोपीय देशों से अलग है. वो ह्यूमन एजेंट्स के अलावा बड़े पैमाने पर रिमोट एजेंट्स के साथ काम करता ह. रिमोट एजेंट्स में ज्यादातर वो छात्रों या शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों की सेवाएं लेता है लेकिन ऐसे रिमोट एजेंट्स को वो लंबे समय तक अपने साथ नहीं रखता. आमतौर उसके इन रिमोट एजेंट्स को भी पता नहीं चल पाता कि वो क्या कर रहे हैं.

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इसलिए भारतीय कंपनियां बचती हैं चीन के टेलीकम्युनिकेशन उपकरणों से 
विकीपीडिया से जुड़ी एक रिपोर्ट कहती है भारत समेत कई देशों पर चीन साइबर स्पाइंग के जरिए भी नजर रखता है, सीक्रेट्स हासिल करने की कोशिश करता है. इसलिए भारत की बड़ी कंपनियां हमेशा उन टेलीकम्युनिकेशन उपकरणों से बचती हैं, जो चीन में बने होते हैं. यहां तक कि चाइनीज मोबाइल और एप के बारे में ये चर्चाओं होती रही हैं कि ये भी चीन के जासूसी नेटवर्क के टूल की काम करते हैं. चीन की सबसे बड़ी कंपनी हुवेई पर तो अमेरिका से लेकर यूरोप के तमाम देशों ने इसकी आशंका ही जाहिर नहीं की बल्कि उस पर रोक भी लगाई जा रही है.

नेपाल में बढ़े स्टडी सेंटर्स के पीछे चीनी हाथ
एक रिपोर्ट ये भी कहती है कि पिछले कुछ सालों में नेपाल में भारतीय सीमा से जुड़े इलाकों में स्टडी सेंटर खुल गए हैं, इनके पीछे चीन का हाथ है, इनका असल काम भारत पर नजर रखना है. नजर रखने के ही उद्देश्य से चीन भारत के पड़ोसी देशों में अहम प्रोजेक्ट हासिल कर नजर रखने की कोशिश जारी रखी है. कुछ साल पहले एक खोजी नौका अंडमान के आसपास देखी गई, जो उस संवेदनशील भौगोलीय सामरिक इलाके की जानकारी इकट्ठा कर रही थी.

माना तो ये भी जा रहा है कि जिस तरह पूरी दुनिया में तमाम सामरिक इलाकों में चीन अपने सैन्य अड्डे बनाने में जुटा है, वैसा ही काम वो म्यांमार, श्रीलंका और मलेशिया में कर सकता है.

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First published: August 29, 2019, 4:03 AM IST
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