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मुस्लिम महिलाओं से चीन की ‘गंदी हरकत’, बनाया जा रहा है पराए पुरुषों के साथ सोने का दबाव

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: November 7, 2019, 9:18 PM IST
मुस्लिम महिलाओं से चीन की ‘गंदी हरकत’, बनाया जा रहा है पराए पुरुषों के साथ सोने का दबाव
उइगर मुस्लिम महिलाओं से चीन ऐसा काम करा रहा है, जो वाकई आपत्तिजनक है

चीन ने करीब डेढ़ लाख उइगर मुस्लिमों को कैंपों में बंदी बनाया हुआ है और उनके घरों पर मौजूद महिलाओं के साथ रहने के लिए चीनी पुरुषों को भेज रहा है. उइगर मुस्लिम महिलाओं को उनके साथ एक ही बिस्तर पर सोना भी पड़ता है

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  • Last Updated: November 7, 2019, 9:18 PM IST
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चीन (China) अपने उत्तर पश्चिम इलाकों में रहने वाले उइगर मुसलमानों (Muslims) के खिलाफ दमन के नए तरीके आजमाता रहा है. उसका नया तरीका ना केवल होश उड़ाने वाला है बल्कि बेहद भद्दा और गंदा भी. इसे घोर आपत्तिजनक और अनैतिक भी कहा जा रहा है. चीन उइगर मुस्लिम (Uighur Muslims) महिलाओं के लिए "जोड़ी बनाओ और परिवार बनो" प्रोग्राम चला रहा है. इसके तहत वो चीनी पुरुष अधिकारियों को उनके घरों पर भेजता है, जिसमें महिलाओं को एक ही बिस्तर पर साथ सोने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

दुनियाभर में निर्वासन में रह रहे उइगर मुसलमान इस प्रोग्राम का जबरदस्त विरोध कर रहे हैं. इसे अपमान बता रहे हैं लेकिन चीन इसे सही ठहराया है. "जोड़ी बनाओ और परिवार बनो" प्रोग्राम जिनजियांग (Xinjiang) के उइगर स्वायत्तशासी इलाकों में करीब तीन साल से चलाया जा रहा है. लेकिन अब तक इसके बारे में खबरें बाहर नहीं आ पाईं थीं.

"जोड़ी बनाओ और परिवार बनो"  कार्यक्रम चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा बनाया गया है. इसके लिए पार्टी कैडर के एक लाख अधिकारियों की नियुक्ति की गई है. उन्हें इस प्रोग्राम में "रिलेटिव्स" यानि "रिश्तेदार" कहा जाता है, जो अकेली उइगर मुस्लिम महिलाओं के घरों में पूरे अधिकार से जाते हैं.

एक रिलेटिव यानि एक चीनी अधिकारी को कई उइगर मुस्लिमों के घर अलॉट किए जाते हैं. ये खासकर वो घर होते हैं, जिनके पुरुष सदस्य चीन के कैंपों में भेजे जा चुके हैं. ये कैंप जेल की तरह ही होते हैं. आमतौर पर उइगर इलाके के कस्बों में ज्यादातर पुरुष इन कैंपों में भेजे जा चुके हैं. इन इलाकों के घरों में अब या तो महिलाएं बची हैं या फिर बच्चे.



आंकड़ों के अनुसार करीब दस लाख उइगर मुस्लिम पुरुष कैंपों में रखे गए हैं. चीन मानता आया है कि उइगर जिस तरह धर्म के प्रति कट्टर और अलग सियासी सोच रखते हैं, उसके चलते वो देश के लिए खतरनाक है. इसे खत्म किया जाना जरूरी है. इसी परिप्रेक्ष्य में चीन अतीत में भी कई कदम उठाता रहा है, जिसमें मस्जिद तोड़ने से लेकर उर्दू या उइगर भाषा पर रोक और उइगर बच्चों को अलग कर देने जैसी बातें शामिल रही हैं.

हाल में रेडियो फ्री एशिया (आरएफओ) ने एक बड़ी रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें उसने सभी पक्षों से बात की. इसके बाद दुनियाभर की मीडिया का ध्यान इधर गया है. इसे लेकर हाल में कई रिपोर्ट भी आई हैं.
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चीनी पुरुषों को साथ रखने से नहीं रोक सकतीं उइगर महिलाएं 
रिपोर्ट कहती है चीनी पुरुष अधिकारी यानि "रिलेटिव" जिस भी उइगर मुस्लिम महिला के घर में भेजा जाता है, वहां रहने से उसे कोई नहीं रोक सकता. उसे रखना बाध्यता है. ये पुरुष कम से कम छह दिन महिलाओं के साथ रहते हैं.

सुबह से लेकर शाम उनकी हर गतिविधि में हिस्सा लेते हैं. उनसे बात करते हैं. वो घर में कहीं भी जा सकते हैं. उनकी कोशिश इन अकेले रह रहीं उइगर महिलाओं को भावनात्मक तौर पर करीब लाकर चीन की मुख्यधारा में लाना होता है. कुल मिलाकर महिलाओं को उन्हें अपना रिश्तेदार समझना होता है. वैसा ही व्यवहार करना होता है.

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एक ही बिस्तर पर उइगर महिला के साथ सोते हैं
सबसे हैरानी की बात ये भी है कि रात में जब सोने की बारी आती है तो उइगर मुस्लिम महिला ना तो उन्हें अलग कमरे में सोने को कह सकती है और अलग कोई बिस्तर दे सकती है. बल्कि इन महिलाओं को रिलेटिव बनकर आए चीनी पुरुषों को अपने साथ उसी बिस्तर पर सुलाना होता है, जिस पर वो खुद सोती हैं.

इन महिलाओं को रिलेटिव बनकर आए चीनी पुरुषों को अपने साथ उसी बिस्तर पर सुलाना होता है, जिस पर वो खुद सोती हैं.


अगर कोई घर छोटा है या किसी घर में सोने की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है तो भी सभी के लिए एक ही जगह जमीन पर बिस्तर पर बिछाया जाता है. वैसे तो हिदायत ये है कि एक बिस्तर पर केवल दो लोग ही साथ सोएंगे, जिसमें एक चीनी पुरुष और एक उइगर महिला होगी लेकिन ज्यादा ठंड की सूरत में तीन लोग भी सो सकते हैं.

छह दिनों तक रहने के दौरान ये रिश्तेदार बहुत बारीक तरीके से उइगर महिला और उसके विचारों पर नजर रखता है. वो इस दौरान उससे तमाम तरह के सवाल पूछ सकता है. जिसके जवाब महिला को देने ही होंगे. इस दौरान वो स्टडी सेशन और अन्य गतिविधियां भी करते हैं. चीनी भाषा भी सिखाने की कोशिश करते हैं.

उइगर महिलाएं विरोध नहीं कर सकतीं
इस मामले में उइगर महिलाएं ना तो कोई विरोध कर सकती हैं ना ही इस व्यवस्था से अलग जा सकती हैं. उन्हें इसे मानना ही होगा. अन्यथा उन्हें दंडित किया जा सकता है, जेल भेजा जा सकता है. आरएफओ की रिपोर्ट कहती है कि हाल में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने इस व्यवस्था को देश के लिए बेहतर बताया है.

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का कहना है कि रिश्तेदार बनकर गए चीनी पुरुष अधिकारी हर परिवार में अच्छे और बेहतर इंसान के रूप में घुलने-मिलते हैं. चीन इनकार करता है कि कहीं भी इस प्रोग्राम का विरोध हो रहा है.

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उइगर संस्थाएं कर रही हैं विरोध 
हकीकत ये है कि दुनियाभर में रहने वाले उइगर मुस्लिमों की कई संस्थाओं ने अब इसके खिलाफ आवाज बुलंद करनी शुरू की है. जिनजियांग के काशगर कस्बे की स्थानीय कम्युनिटी के सदस्यों ने आरएफओ से पहचान बताने से इनकार करते हुए कहा, "हां, ये सही है कि चाइनीज पुरुष अधिकारी नियमित रूप से उइगर महिला सदस्यों के साथ एक ही बिस्तर पर सोते हैं. हालांकि महिलाएं कोशिश करती हैं कि वो उनसे सोते समय पर्याप्त दूरी बनाकर रखें.

चीन में उइगर मुस्लिम इलाकों में "जोड़ी बनाओ और परिवार बनो" प्रोग्राम 2016 से चलाया जा रहा है. इसमें चीनी अधिकारी नियमित रूप से उइगर घरों में जाते हैं. वहां वो एक सप्ताह ठहरते हैं. हर दो महीने के बाद वो ऐसा ही करते हैं.


न्यूयॉर्क आधारित एक मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वाच ने दिसंबर 2017 में रिपोर्ट दी कि चीन में उइगर मुस्लिम इलाकों में "जोड़ी बनाओ और परिवार बनो" प्रोग्राम 2016 से चलाया जा रहा है. इसमें चीनी अधिकारी नियमित रूप से उइगर घरों में जाते हैं. वहां वो एक सप्ताह ठहरते हैं. हर दो महीने के बाद वो ऐसा ही करते हैं.

महिलाओं के साथ फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट होती है
इसके बाद जब ये चीनी अधिकारी घर छोड़ने लगता है तो रिपोर्ट तैयार करता है, जिसमें वो परिवारों के साथ अपनी फोटो खींचता है. इसे वो बगैर किसी अनुमति के सोशल मीडिया पर पोस्ट करता है, इसमें परिवारों से कोई रजामंदी नहीं ली जाती, कुछ तस्वीरें जानबूझकर ऐसी ली जाती हैं जिसमें उइगर महिलाओं की नजदीकियां इन पुरुषों के साथ नजर आएं.

ह्यूमन राइट्स वाच संस्था का कहना है कि चीनी अधिकारियों का ये कृत्य खुलेआम मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, जिसे लेकर इलाके में खासा असंतोष भी है. म्युनिख में रहने वाले निर्वासित वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ग्रुप के अध्यक्ष डोल्कन इसा कहते हैं, "जोड़ी बनाओ और परिवार बनो" कार्यक्रम हमारी सुरक्षा और परिवारों के लिए बहुत बड़ा खतरा है. हमारे घर जेल में बदल गए हैं.

चीन में आमतौर पर जिन इलाकों में उइगर मुसलमान रहते हैं, वो इलाके पुरुष विहीन हो चुके हैं, वहां घरों में अब या तो महिलाएं हैं या फिर बच्चे


चीनी अधिकारी अपने साथ शराब और पोर्क भी लेकर आते हैं और उसे साथ ही बैठकर ना केवल खुद खाते हैं बल्कि मेजबान पर भी इसका सेवन करने का दबाव डालते हैं.

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First published: November 7, 2019, 9:10 PM IST
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