चीन बना रहा है एलन मस्क के स्टारलिंक से भी तेज सैटेलाइट नेटवर्क

अमेरिका से होड़ के चलते चीन (China) अब सैटेलाइट नेटवर्क में भी अमेरिका से आगे निकलना चाहता है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

अमेरिका से होड़ के चलते चीन (China) अब सैटेलाइट नेटवर्क में भी अमेरिका से आगे निकलना चाहता है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

एलन मस्क (Elon Musk) के स्टारलिंक की तरह चीन (China) भी अपना एक सैटेलाइट नेटवर्क (Satellite Network) बनाने की तैयारी में है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2021, 1:18 PM IST
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हाल ही में एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी स्टारलिंक (Starkink) ने भारत सहित दुनिया में अपने सैटेलाइट हाई स्पीड इंटरनेट सेवा (Internet Services) के लिए  बुकिंग शुरू कर दी है. बताया जा रहा है. इससे उन इलाकों में काफी तेज इंटरनेट सेवा उपलब्ध हो सकेगी जहां ब्रॉडबैंड जैसी सुविधा उपलब्ध नहीं है. लेकिन इसी चीन से अब अपने लिए ही अंतरिक्ष में खुद का सैटेलाइट नेटवर्क (Satellite Netork) बनाने की तैयारी में है जो दूसरों से ज्यादा तेज इंटरनेट सेवाएं दे सकेगा.

ऐसे मिले संकेत

चीन के एरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप के साइंस एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक और चाइनीज पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस के सदस्य बाओ वेइमिन ने हाल ही में चीनी मिडिया से साक्षात्कार के दौरान कहा कि चीन स्पेस सैटेलाइट विकसित करने की योजना बना रहा है.

परीक्षण भी हो चुका है
वेइमिन ने बताया कि इसके लिए चीन टेस्ट सैटेलाइट भी कर चुका है. उन्होंने कहा, “ हम एक नेशनल सैटेलाइट नेटवर्क कंपनी भी स्थापित करेंगे जो जिसकी जिम्मेदारी स्पेस सैटेलाइड इंटरनेट नेटवर्क निर्माण कार्यों और नियोजन का समन्वय करना होगा.

पहले से ही शुरू हो चुका है इस नीति पर काम

साल 2020 में सैटेलाइट इंटरनेट चीन के नए अधोसंरचना नीति नवाचार के दायरे में शामिल कर लिया गया था जिससे इससे इस क्षेत्र में बहुत तेज गति से वृद्धि होने की स्थिति आ गई थी. अंतरिक्ष में सैटेलाइट इंटरनेट लोगों को, खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में बहुत सी एप्लिकेशन्स को प्रदान करने का काम करता है. लेकिन प्रमुखतया सैटेलाइट इंटरनेट एक तेज गति वाला संचार नेटवर्क है जो अंतरिक्ष में बहुत सारे सैटेलाइट का उपयोग कर ब्रॉडबैंड संचार नेवचर्क सेवा देता है.



मोबाइल टावर की तरह काम करेंगे सैटेलाइट

यह सेवा उन इलाकों के लिए बहुत मुफीद है जहां जनसंख्या बिखरी हुई है वहां दूरसंचार सेवा केंद्र के बिना ही संचार सेवाओं को देने की जरूरत है. लेकिन इंटरनेट सेवाओं के अलावा  सैटेलाइट नेटवर्क संचार समाधान, रिमोट सेंसिंग तकनीकी समाधान,  नेविगेशन आदि उपलब्ध करा सकते हैं. इस तरह अधोसंरचना के लिहाज से ये अंतरिक्ष में मोबाइल टावर की तरह काम करते हैं.

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फिलहाल सैटेलाइट नेटवर्क बनाने में एलन मस्क (Elon Musk) एक हजार से ज्यादा सैटेलाइट भेज चुके हैं. (फाइल फोटो)


ये सेवाएं भी मिल सकेंगी

5 जी, इंडस्ट्रियल इंटरनेट, इंटरनेटऑफ थिंग्स, के साथ मिलकर यह बहुत विशाल एप्लिकेशन समृद्ध परिदृश्य बन सकता है जिसमें 5 जी की सुविधा के साथ ब्रॉडबैंड संचार, कैमरों से सुसज्जित रिमोट सेंसिंग, स्वचालित यातायात को सहयोग कनरे वाला बेहतर नेवीगेशन मिल सकते हैं.

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ये सेवाएं भी मिल सकेंगी

5 जी, इंडस्ट्रियल इंटरनेट, इंटरनेटऑफ थिंग्स, के साथ मिलकर यह बहुत विशाल एप्लिकेशन समृद्ध परिदृश्य बन सकता है जिसमें 5 जी की सुविधा के साथ ब्रॉडबैंड संचार, कैमरों से सुसज्जित रिमोट सेंसिंग, स्वचालित यातायात को सहयोग कनरे वाला बेहतर नेवीगेशन मिल सकते हैं.

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अभी सैटेलाइट नेटवर्क (Satellite Network) के जरिए केवल हाई स्पीड इंटरनेट सेवा देने की बात हो रही है.. (तस्वीर: shutterstock)


बहुत लाभ कारी व्यवसाय होगा ये

माना जा रहा है कि सैटेलाइट विकास में अधोसंरचना, जमीन पर सुविधाएं, सैटेलाइट विकास और प्रक्षेपण आदि जैसे खर्चों को शामिल किया जाए तो सैटेलाइट समूह के संचालकों को खर्चे से दोगुना लाभ होगा. वहीं उद्योगों के लिए एप्लिकेशन्स और अन्य सेवाएंसे 7 गुना आय मिल सकेगी.

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अनुमान है कि भविष्य में पृथ्वी की निचली कक्षा में एक लाख सैटेलाइट भेजे जा सकते हैं. उनमें से 50-60 सैटेलाइट अमेरिका से, 30 से 40 हजार चीन से और 10 से 20 हजार यूके, भारत, रूस और अन्य देशों के होंगे. अकेले स्पेसएक्स ने एक हजार से ज्यादा सैटेलाइस पिछले डेढ़ साल में भेजे हैं. भविष्य में  हजारों सैटेलाइट हर साल अंतरिक्ष में जाएंगे.
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