चीन ने बनाया एशिया का सबसे बड़ा एंटीना, उसके मंगल अभियान में आएगा काम

यह एंटीना (Antenna) एशिया का सबसे विशाल एंटीना बताया जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

यह एंटीना (Antenna) एशिया का सबसे विशाल एंटीना बताया जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

चीन (China) ने अपने तियानवेन-1 (Tianwen-1) अभियान से मिलने वाले संकेतों को पकड़ने के लिए एशिया का सबसे बड़ा एंटीना (Antenna) बनाया है जो काम शुरू करने वाला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 5, 2021, 6:08 PM IST
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इस समय मंगल ग्रह (Mars) के लिए केवल अमेरिका (USA) ने ही नहीं बल्कि दुनिया के बहुत सारे देशों ने अपने अभियान भेजे हैं. चीन (China) का तियानवेन-1 (Tianwen-1) अभियान अपनी तरह का पहला अभियान है और वह मंगल की ओर जा रहा है. इसमें एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर मंगल पर भेजा गया है. इनके मिलने वाले संकेतों के लिए चीन ने हाल ही में एशिया का सबसे विशाल एंटीना (Antenna) बनाया है जो काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है.

कितना बड़ा और वजनी है एंटीना

तियानवेन चीन का पहला मंगल अभियान है, लेकिन यह दुनिया का पहला ऐसा अभियान है जिसमें प्रोब, लैंडर और रोवर तीनों एक साथ भेजे गए हैं. इसे चीन ने पिछले साल जुलाई में प्रक्षेपित किया था. इनके लिए जो चीन ने एंटीना तैयार किया है वह 72 मीटर लंबा एंटीना है और इसका वजन 2700 टन है.

एक बड़ी चुनौती है इस एंटीना के लिए
इस एंटीना का आकार 10 बास्केटबॉल के कोर्ट जितना बड़ा है. ग्लोबल टाइम्स के अनुसार इसे उपयोग के लिए हाल ही में नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑबर्वेटरी ऑफ द चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेस को प्रदान किया गया है. न्यूज पब्लिकेशन से बात करते हैं इस प्रोजेक्ट के डिप्टी चीफ डिजाइनर ली चुनलेई ने बताया कि मंगल से वापस आंकड़े भेजना एक तरह से पृथ्वी पर एक चमकती लेजर प्वाइंटर भेजने के जैसा है.

दिशा की पहचान करने में भी सक्षम

यह दस फरवरी के आसपास मंगल की कक्षा में प्रवेश करेगा जो चीन के नए साल के ठीक एक दिन पहले का समय होगा. चीनी वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एंटीना दिशा की सटीकता से पहचान करने में भी सक्षम है. इस समय तियानवेन-1 पृथ्वी से 40 करोड़ किलोमीटर दूर है और जल्दी ही मंगल की गुरुत्व सीमा में प्रवेश करने वाला है.



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चीन (China) ने अपना महत्वाकांक्षी तियानवेन-1 (Tianwen-1) मिशन 23 जुलाई 2020 को प्रक्षेपित कर दिया था.


चीन का बढ़ जाएगा कद

इससे पहले की रिपोर्टों में बताया जा चुका है कि चीन का यह मंगल अभियान  चीन के विश्व अंतरिक्ष नेतृत्व में आगे खड़ा कर देगा क्योंकि इससे पहले इस तरह से ऑर्बिटर, रोवर और लैंडर एक साथ किसी देश ने कहीं नहीं भेजे हैं.

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लैंडिंग होगी चुनौतीपूर्ण

मंगल के अभियानों में सबसे चुनौतीपूर्ण काम मंगल ग्रह की सतह पर उतरना यानि लैंडिंग सबसे चुनौतीपूर्ण काम होगा. अभी तक लैंडर या रोवर युक्त कुल 18 अभियान मंगल ग्रह पर भेजे गए हैं.  इनमें से 10 नासा के हैं. वहीं चीन ने चंद्रमा के लिए तो बहुत से अभियान भेजे हैं, लेकिन मंगल के लिए उसने केवल एक ही प्रयास किया है.

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चीन के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण कार्य मंगल पर लैंडिंग होगी. (तस्वीर: Pixabay)


इससे पहले एक ही अभियान भेजा है मंगल पर

चीन ने अब तक मंगल की ओर केवल एक ही अभियान भेजा है. इसके तहत उसने मंगल के चंद्रमा फोबोस के लिए एक ऑर्बिटर भेजा था. लेकिन यह अभियान असफल हो गया था. जब ऑर्बिटर मंगल के वायुमंडल तक पहुंचने पर जल गया था. चीन ने हाल ही में पृथ्वी के चंद्रमा से मिट्टी के नमूने सफलतापूर्वक लाने में सफलता पाई है.

मंगल और आगे जाने के लिए काम की साबित हो सकती है यह तकनीक

चीन की महत्वाकांक्षा किसी से छिपी नहीं है. अमेरिका से प्रतिद्वंद्विता में आगे निकलने की चाह के साथ वह मंगल ग्रह के मामले में अमेरिका के अलावा, भारत, रूस और यूरोपीय यूनियन से आगे निकलना चाहता है. इसी लिए वह ऐसे अभियानों का चुनाव कर रहा है जो कुछ हटकर हों. इसमें चंद्रमा के पिछले हिस्से में यान पहुंचाना हो या फिर वहां से मिट्टी के नमूने हासिल करना जैसे काम शामिल है.
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