जानिए कितना अहम है चीन का अभी प्रक्षेपित हुआ प्रयोगात्मक अंतरिक्षयान

जानिए कितना अहम है चीन का अभी प्रक्षेपित हुआ प्रयोगात्मक अंतरिक्षयान
चीन (China) का कहना है कि यह अंतरिक्ष यान (Space Craft) दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

चीन (China) ने हाल ही में एक प्रोयगात्मक (Experimental) अंतरिक्षयान (Spacecraft) का प्रक्षेपण (launch) किया है जो दोबारा प्रयोग में लाया जा सकने (Reusable) वाला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 4, 2020, 7:37 PM IST
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दुनिया के कई देशों में अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) के लिहाज से प्रतियोगिता चल रही है. इसमें चीन (China) अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) को चुनौती देता दिख रहा है. नासा के मंगल (Mars) के लिए रोवर (Rover) प्रक्षेपण से पहले चीन ने मंगल के लिए बड़ा अभियान प्रपेक्षित किया था और अब उसने अंतिरिक्ष में ऐसा प्रयोगात्मक यान प्रक्षेपित किया है जो दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है.

पहले से चल रही थी तैयारी
चीन ने शुक्रवार को अपने इस अंतरिक्ष यान के सफल प्रक्षेपण की घोषणा की. चीन की स्टेट मीडिया ने इसकी खबर दी. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस प्रक्षेपण की काफी समय पहले से तैयारी चल रही थी, लेकिन चीन ने इस पूरे कार्यक्रम को गुप्त ही रखा.

तीन साल पहले की थी घोषणा
चीन साल 2017 में ही कहा था कि वह 2020 में दोबारा प्रयोग किया सकने वाले अंतरिक्ष यान का परीक्षण करेगा. यह कार्यक्रम भी चीनी एसोस्पेस साइंस एंट टेक्नोलॉजी कॉर्पोरेशन (CASC) की महत्वाकांक्षी योजनाओं का हिस्सा था. इसमें चीन साल 2040 तक नाभकीय शक्ति संपन्न अंतरिक्ष यान बनाना चाहता है.



समय और तस्वीरें नहीं कीं जारी
इस प्रपेक्षण को लॉन्ग मार्च 2एफ कैरियर के जरिए अंजाम दिया गया जिसने यान को उसकी कक्षा तक पहुंचाया. यह प्रक्षेपण किस समय हुआ था, इसकी जानकारी नहीं दी गई है. इसके अलावा इस प्रक्षेपण के तस्वीरें भी जारी नहीं की गई हैं. यह लॉन्ग मार्च 2 एफ कैरियर रॉकेट का 14वां अभियान बताया गया है.

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माना जाता है कि चीन (China) की अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Rserach) में भी उसके सामरिक हित छिपे रहते हैं.


चीनी लैंडिंग साइट पर लौटेगा
चीनी समाचार एजेंसी सिन्हुआ के ने बताया, “एक इनऑर्बिट ऑपरेशन के समय के बाद, अंतरिक्षयान चीन की एक लैंडिंग साइट पर लौट आएगा. अपनी इस उड़ान के बाद यह दोबारा उपयोग में लाई जा सकने वाली तकनीकों का परीक्षण करेगा और अंतरिक्ष के शांतिपूर्वक प्रयोग के लिए उपोयगी तकनीकों के लिए सहयोग करेगा.”

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चीन का दावा लेकिन
जहां चीन ने इस कदम को अंतरिक्ष के शांतिपूर्वक उपयोग की दिशा में प्रयास बताया है, अमेरिका की कांग्रेस की रिपोर्ट का कहना है कि चीनी सेना यानि कि पीएलए का सभी चीनी अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर पूरा नियंत्रण है और वह ऐसे तकनीक विकसित करने में लगा है जिससे अंतरिक्ष से मिसाइल, लेसर हथियारों का प्रयोग हो सके.

भारत इस पर कर रहा है काम
वहीं भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की बात की जाए तो भारत का लंबा अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम तो है, लेकिन उसमें फिर से उपयोग किया जा सकने वाले अंतरिक्ष यानों का विकास शामिल नहीं हैं. हां, भारत का इसरो दोबारा उपयोग में लाए जा सकते वाला प्रक्षेपण यान जरूर बनाने की कोशिश में हैं.

Astronauts, Research
अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) के लिहाज से इस साल बहुत ज्यादा सक्रियता (Activity) रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


मंगल को लेकर यह अभियान भी
वहीं चीन ने दो महीने पहले ही मंगल पर अभियान के लिए एक ऐसा यान भेजा है जो मंगल ग्रह के चक्कर तो लगाएगा, लेकिन उसके साथ ही वह मंगल की धरती पर भी उतरेगा. अगर वह सफल होता है कि ऐसा करने वाला वह पहला देश होगा. इसके अलावा वह अपना एक खुद का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन बनाने की तैयारी भी कर रहा है.

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साल 2020 अंतरिक्ष अनुसंधान के लिहाज से बहुत ही शानदार रहा है. इस साल एक क्रांतिकारी कदम के तहत दुनिया में पहले बार निजी कंपनी ने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में पहंचाया और उन्हें सुरक्षित वापस लाने में भी सफल हुई. इससे दुनिया में अंतरिक्ष व्यवासायिक प्रतियोगिता के एक नया दौर शुरू होने की उम्मीद है.
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