वो चीनी नेता, जो अपने साथ युवा लड़कियों का डांस ग्रुप लेकर यात्राएं करता

उम्र बढ़ने के साथ माओ में औरतें के साथ की इच्छा और बढ़ती चली गई

उम्र बढ़ने के साथ माओ में औरतें के साथ की इच्छा और बढ़ती चली गई

चीन के शासक माओ जेडोंग (Mao Zedong) अपने साथ युवतियों का डांस ग्रुप लेकर ट्रैवल करते. इसे Cultural Work Troupe कहा जाता था, जिसका काम था माओ के साथ नृत्य करना. नृत्य खत्म होते-होते माओ किसी एक को चुनकर अपने बेडरूम में ले जाते.

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माओ के फिजिशियन और बेहद करीबी रहे Li Zhisui ने अपनी किताब The Private Life of Chairman Mao में माओ के अजीबोगरीब रहनसहन का खुलकर जिक्र किया. वे कहते हैं कि माओ काफी रंगीनमिजाज थे. उन्हें हमेशा युवा स्त्रियों की चाहत रहती. साथ ही वे हाइजीन के मामले में काफी खराब थे. यही वजह है कि उनके साथ रहते हुए बहुत-सी युवतियों को यौन रोग हो गया. डरे हुए परिवार तब भी विरोध नहीं कर सके क्योंकि इससे उनकी जान को खतरा था.

नॉर्थ कोरिया के तानाशाहों के हरम की तर्ज पर माओ भी जहां जाते, अपने साथ युवा लड़कियों का डांस ग्रुप ले जाते. इसे Cultural Work Troupe कहा जाता था, जिसका काम था माओ के साथ नृत्य करना. हालांकि नृत्य खत्म होते-होते माओ ग्रुप में से किसी एक को चुनकर अपने साथ अपने बेडरूम में ले जाया करते. उम्र बढ़ने के साथ माओ में औरतें के साथ की इच्छा और बढ़ती चली गई और वे उनसे घिरे रहने लगे.

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चीनी कहावत के अनुसार वे मानते थे कि ऐसा करने पर उनका पौरुष लौट आएगा. माओ का डॉक्टर इसपर उन्हें चेताता भी था लेकिन उन्होंने ये जारी रखा. माओ के साथ रह चुकी बहुत सी युवतियों को यौन रोग हो गया जो कि उन्हीं से ट्रांसफर हुआ था लेकिन युवतियों के लिए ये badge of honor था और कभी किसी ने खुलकर विरोध नहीं किया. वैसे विरोध न करने की एक साफ और असल वजह ये भी हो सकती है कि माओ उस दौर में चीन का सबसे शक्तिशाली शख्स था, जिसके बारे में कुछ भी कहना जान गंवाना था.

माओ उस दौर में चीन का सबसे शक्तिशाली शख्स थे, जिनके बारे में कुछ भी कहना जान गंवाना था


माओ को डेंटल हाइजीन से कोई मतलब नहीं था. वे लगातार पहले अपने डॉक्टरों और फिर अपने कार्यकर्ताओं के बीच भी ये स्वीकारा करते थे. उनका कहना था कि वो रोज सुबह उठकर गर्म चाय से दांत साफ करते हैं. डॉक्टर ली ने अपनी किताब में लिखा है कि चाय से दांत साफ करने का तरीका खास बढ़िया नहीं था. इसका रिजल्ट माओ के दांतों पर दिखा. उनपर काली-हरी गंदगी जमी हुई थी और जल्दी ही उनके मसूड़े सड़ने लगे और उनमें मवाद बनने लगा. हालांकि तब भी माओ ने डॉक्टरों की सलाह मानने से इनकार कर दिया. उनका तर्क था कि शेर मुंह नहीं धोता इसलिए उसके दांत इतने नुकीले होते हैं.

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चीन के इस नेता को नहाने से भी सख्त बैर था. वैसे ये बात और है कि स्विमिंग माओ का शौक था और वे स्विमिंग में ठीक भी थे. साल 1966 में वे 70 के हो चुके थे लेकिन खुद को उतना ही जवान और चुस्त दिखाने के लिए उन्होंने Cross-Yangtze Swimming Competition आयोजित किया. Yangtze नदी पर आयोजित इस प्रतियोगिता में देश के 5000 तैराक शामिल हुए. प्रतियोगिता शुरू हुई और माओ जीत गए. दावा किया गया कि 70 साल के नेता ने 15 किलोमीटर की दूरी महज 65 मिनट में तय की. यानी हर एक सेकंड में 3.8 मीटर. दुनिया के सबसे बढ़िया तैराक भी इतनी तेजी से तैराकी नहीं कर सके हैं. इसके बाद नेता के नदी पार करने का कोई वीडियो नहीं आया लेकिन चीन के अखबार दावा करते रहे कि उनके पास सुपर-ह्यूमन ताकत है, जिससे वे 70 की उम्र में ही किसी जवान से आगे हैं.

डॉक्टर ने ने अपनी किताब The Private Life of Chairman Mao में माओ के अजीबोगरीब रहनसहन का खुलकर जिक्र किया


माना जाता है कि खेतों और जंगलों के बीच पले माओ को टॉयलेट के इस्तेमाल से भी परहेज था. वे इसके लिए जंगलों में जाया करते और साथ में बॉडीगार्ड होते. माओ के बारे में एक दिलचस्प किस्सा है कि जब साल 1949 में वे मास्को (रूस) पहुंचे तो उन्हें यकीन था कि देश उनका खूब स्वागत करेगा. इसके उलट माओ के पहुंचते ही उन्हें होटल ले जाकर छोड़ दिया गया और बार-बार खाना भेजा गया.

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गुस्से में माओ चीखने लगे कि वे यहां खाने और वॉशरूम जाने के लिए नहीं आए हैं. इधर स्टालिन को इंतजार था कि कब माओ टॉयलेट जाए और कब उनके मॉडिफाइट टॉयलेट से उनका मल-मूत्र इकट्ठा कर उसकी जांच हो सके. तब तत्कालीन सोवियत संघ के लीडर स्टालिन का मानना था कि माओ के अपशिष्ट में अगर पोटैशियम की भरपूर मात्रा नहीं मिले तो इसका मतलब है कि वे घबराए हुए हैं. तानाशाह स्टालिन को घबराए हुए नेता से किसी बात या करार का शौक नहीं था. और हुआ भी यही. काफी वक्त बाद माओ से मिलने के बाद भी स्टालिन ने उनके साथ किसी खास मुद्दे पर बात से इनकार कर दिया.
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