क्या चीन ने सच में बना ली है एलियंस के जैसी उड़नतश्तरी? जानिए पूरा मामला

चीन की एयरफोर्स में जल्द शामिल होगी ये उडनतश्तरी

चीन की एयरफोर्स में जल्द शामिल होगी ये उडनतश्तरी

चीन उड़नतश्तरी के आकार वाले एक ऐसे हेलीकॉप्टर को बनाने पर काम कर रहा है, जो सुपरसोनिक स्पीड से आसमान में विचरण करेगा. रडार भी इसको नहीं पकड़ सकेंगे. ये मिसाइल दागकर दुश्मन देशों में तहलका भी मचाएगा

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 16, 2019, 9:32 PM IST
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निश्चित तौर पर आपने सुना होगा कि दूसरे ग्रहों से एलियंस पृथ्वी पर आते हैं. कई जगहों पर उड़नतश्तरी देखे जाने की बातें भी सामने आती रही हैं. पूरी दुनिया में इन्हें यूएफओ (UFO) यानी अनआइडेंटीफाइड फ्लाइंग आब्जेक्ट्स (Unidentified flying object) कहा जाता है. चीन ने ऐसी ही उड़नतश्तरी बनाने का दावा किया है. ये आसमान में तेजी से उड़ती नजर आएगी. यही नहीं वो दुश्मनों को मिसाइल और बम से मार भी कर सकेगी. ये भविष्य की नई डिजिटल तकनीक से लैस होगी.

यानी जो चीजें अब तक आपने साइंस फिक्शन फिल्मों में देखी होंगी, वो हकीकत में बदलने जा रही हैं. अब यूएफओ की तरह ऐसी उड़नतश्तरियां आसमान में नजर आएंगी, जिसमें एलियंस नहीं मनुष्य होंगे.

हालांकि कुछ देशों ने कुछ दशक पहले उड़ने वाली उड़नतश्तरियां बनाने की कोशिश की थी लेकिन इस प्रयास में वो सफल नहीं हो पाए थे. क्योंकि उड़नतश्तरियों को उड़ाने के लिए जो खास तकनीक और आकार की जरूरत थी, उसमें वो कामयाब नहीं हो पाए.



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हाल ही में चीन के तियानजिन प्रांत में एक एयरशो हुआ, जिसमें चीन की एयरफोर्स और पीपुल्स आर्मी ने शिरकत की. इसमें चीन के नए हथियारों और नई जेनरेशन के लड़ाकू विमानों की नुमाइश की गई. साथ ही ऐसे फ्यूचर के हथियार भी प्रदर्शित किये गए, जिस पर चीन काम कर रहा है.

इसी एयरशो में चीन ने एक ऐसा गोलनुमा आकार का विमान रखा था, जिसे देखकर हर कोई ठिठक रहा था. बाद में चीन के "ग्लोबल टाइम्स" ने इस पर फोटो गैलरी देते हुए इसे भविष्य की तकनीक के आधार पर बनने वाला चीनी हेलीकॉप्टर बताया.

बिल्कुल उड़नतश्तरी की तरह 
ये बिल्कुल गोल आकार का है. देखने में उड़नतश्तरी की तरह. इसकी लंबाई साढ़े सात मीटर और ऊंचाई तीन मीटर के आसपास है. इसकी तस्वीर अगर आप भी इस खबर के साथ देख रहे होंगे तो आपको इसे देखकर हैरानी हो रही होगी. इस गोलनुमा आकार वाले हेलीकॉप्टर में ना तो कोई डैने हैं और ना कोई ऐसे यंत्र, जिससे लगे कि ये उड़ भी सकता है.

लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्टर की मिली जुली तकनीक
चीन का दावा है कि ये ना केवल उड़ेगा बल्कि हाईस्पीड हेलीकॉप्टर का काम करेगा. इसकी गति  सुपरसोनिक विमानों की तरह होगी. चीन का कहना है कि ये दुनिया के बेहतरीन लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्टर की मिली-जुली तकनीक से लैस है. उन्होंने इसे फ्यूचर डिजिटल तकनीक से युक्त बताया. उनका दावा है कि ये जल्द आसमान में होगा.

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नाम होगा सुपर ग्रेट व्हाइट शार्क 
इस उड़नतश्तरी को उन्होंने "सुपर ग्रेट व्हाइट शार्क" कहा है यानी हवा में उड़ती हुई शार्क. इसे चीनी सेना और एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चीन मिलकर बनाकर रहे हैं. ये जमीन पर दौड़ सकता है. पानी पर भी तैर सकता है. जब हवा में उड़ान भरेगा तो रडार के लिए इसे पकड़ना बहुत मुश्किल होगा. चीन के एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ने हाल के बरसों में ऐसे फाइटर जेट बनाए हैं कि दुनियाभर में उसके काम की धाक जम चुकी है.

देखने में ऐसा लगता है कि कोई गोल चीज रखी हुई है. ये विमान तो बिल्कुल नहीं लगता लेकिन चीन ने अपने एयरशो में प्रदर्शित करके इसे हाईस्पीड हेलीकॉप्टर बताया है. विदेशी मीडिया इसे उड़नतश्तरी की तरह देख रहा है


मिसाइल और बम दागने में सक्षम
सीएनएन और पॉपुलर मैकेनिक्स की रिपोर्ट कहती हैं कि ये चीन का ऐसा नया हथियार है, जो दुनिया में उसकी धाक ही नहीं जमाएगा बल्कि हवा में उसकी ताकत में इजाफा भी करेगा. इसको बनाने में कितनी लागत आ रही है, इसका खुलासा नहीं हुआ लेकिन जो तस्वीरें और डायग्राम सामने आए हैं, वो बताते हैं कि इसके बाहरी कवच के अंदर रोटर्स और पॉवरफुल इंजन लगे होंगे. साथ ही तमाम नई खासियतों से युक्त होगा.

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इसमें अंदर मिसाइल दागने की तकनीक लगी होगी. ये बांबर यानी बमवर्षक का भी काम करेगा. इसकी कॉकपिट में दो लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी. इसके विंग उड़नतश्तरी में ही कॉकपिट में अंदरूनी तौर पर होंगे. इन्हें "विंग बॉडी फ्यूचन" का नाम दिया गया है.

कुछ इस तरह होगा इस उड़नतश्तरी का अंदरूनी हिस्सा और उसमें लगने वाले उपकरण


चीन के भविष्य के हथियारों पर काम कर रहा है
आप कह सकते हैं कि चीन ने अगर इसे सफलता के साथ हवा में उड़ाकर दिखा दिया तो विमानों और हेलीकॉप्टर्स की नई जेनरेशन की शुरुआत हो जाएगी. हर कोई मान रहा है कि भविष्य में जो युद्ध होने वाले हैं, वो परंपरागत युद्ध से अलग होंगे, वो हवा, स्पेस और साइबर में लड़े जाएंगे. लिहाजा चीन फ्यूचर के हथियारों की खेप पर व्यापक तौर पर काम कर रहा है.

अमेरिका और अन्य देश भी कर चुके हैं इस पर काम
चीन के इस आइडिया को नया तो नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि इस योजना पर एक जमाने में अमेरिका, रूस और कनाडा काम कर चुके हैं. 50 के दशक में अमेरिका ने उड़नतश्तरी के शक्ल की "एवरो कार" बनाई थी. जिस पर उसने काफी मेहनत और रिसर्च की थी.

1950 में अमेरिका ने एवरोकार कहे गए उड़नतश्तरी के आकार वाले विमान का परीक्षण किया था लेकिन ये सुपरफ्लॉप रहा.


जब अमेरिका ने इसका परीक्षण किया तो ये जमीन से कुछ ही ऊपर उठ पाई. इसकी स्पीड 35 मील प्रति घंटा की थी. कुछ समय तक अमेरिका ने इसे सुधारने की और कोशिश की लेकिन फिर इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया. हालांकि अमेरिका ने 1960 के दशक में चौकोर आकार के उड़ने वाले विमान बनाने की भी कोशिश की थी. लेकिन इनमें भी उसे पेचिदगियों और समस्याओं का सामना करना पड़ा. नतीजतन उसने इस पर भी काम बंद कर दिया.

कनाडा ने भी बंद कर दिया था प्रोजेक्ट
इसी तरह कनाडा ने एक प्रोजेक्ट शुरू किया. उन्होंने जब उड़नतश्तरी सरीखे इस विमान को उड़ाना चाहा तो ये जमीन से एक मीटर ऊपर उठ पाया. इसकी गति 56 किलोमीटर प्रति घंटा की थी. कनाडा ने भी इस प्रयोग में फिर धन और समय लगाने की जरूरत नहीं समझी. इसके साथ ही दुनिया में उड़नतश्तरी सरीखे विमान बनाने की कोशिशों पर विराम लग गया. ऐसा प्रयास बीच में रोमानिया के इंजीनियर्स ने भी किया था.

तकनीक से उड़नतश्तरी का सपना साकार होगा
अब चीन ने इसे बनाने का बीड़ा उठाया है. हालांकि सवाल वही है कि चीन अब कौन सी तकनीक का इस्तेमाल करने जा रहा है. वैसे ये बात भी सही है कि दो दशकों में तकनीक बहुत आगे बढ़ चुकी है. हो सकता है चीन सफल हो जाए.

चीन ने जिस आत्मविश्वास के साथ इस उड़नतश्तरी को एयरशो में पेश किया, उससे लगता है कि चीन इस मामले में आगे तो बढ़ चुका है. वैसे तियानजिन एयरशो में इस गोलाकार हेलीकॉप्टर को उड़ाया नहीं गया लेकिन निकट भविष्य में इसे हवा में उड़ाने की बात कही जा रही है.

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