चीन ने अपने मंगल अभियान को दिया खास नाम, साल के अंत में होगी इसकी शुरूआत

चीन ने अपने मंगल अभियान को दिया खास नाम, साल के अंत में होगी इसकी शुरूआत
मंगल ग्रह पानी होने का यह अकेला प्रमाण नहीं है.

चीन ने कोरोना संकट के बावजूद अपने अंतरिक्ष योजनाओं में बदलाव नहीं किया है. साल के अंत तक वह अपने मंगल अभियान (Mars mission) जिसे उनसे तियानवेन-1 (Tieanwen-1 ) नाम दिया है, शुरू करेगा.

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नई दिल्ली: पिछले साल के आखिरी सप्ताह में चीन (China) में फैलना शुरू हुआ कोरोना वायरस दुनिया के लगभग हर कोने में पहुंच चुका है. चीन के बारे में कहा जा रहा है कि वहां सार्स कोव-2 के प्रसार का पहला चक्र पूरा हो गया है और अब दूसरा चक्र शुरू हो गया है. वहां अब उन लोगों में भी संक्रमण फिर से मिल रहा है जो कोविड-19 से ठीक हो चुके हैं. इसी बीच चीन ने मंगल अपने अंतरिक्ष दिवस (Space Day) पर अपने मंगल अभियान (Mars Exploration Mission) का नाम घोषित किया है जो इस साल के अंत में प्रक्षेपित किया जाएगा.

यह चीन के इस पहले मंगल अन्वेषण अभियान को तियानवेन-1 नाम दिया गया है. न्यूज ऐजेंसी सिन्हुआ के अनुसार चीन ने  शुक्रवार को यह घोषणा की. चीन ने 24 अप्रैल 1970 को अपना पहला अंतरिक्ष यान डोंग फांग होंग 1 प्रक्षेपित किया था. इसी की 50वीं सालगिरह पर चीन अपने मंगल अभियान की तैयारी कर रहा है.

क्यों नाम दिया है तियानवेन
चीन की नेशनल स्पेस एडमिस्ट्रेशन (CNSA) ने अपने अभियान को तियानवेन नाम दयाहै जिसका अर्थ ‘स्वर्ग के प्रश्न’ या ‘स्वर्ग से प्रश्न’ होता है  इस शीर्षक से चीन केविख्यात कवि क्यू युआन ने कविता लिखी थी. युआन 340 से 278 ईसा पूर्व के दौरान चीन के प्रख्यात कवि थे. उन्होंने अपनी कविता में आकाश, तारे और प्राकृतिक घटनाओं से कुछ सवल पूछे थे. ये सवाल उनके परंपराओं पर संदेहों पर आधारित थे. इसमें उनकी सत्य के प्रति जिज्ञासा परिलक्षित होती है.



चीन पहला ऐसा देश होगा जिसका यान मंगल का चक्कर लागने के बाद वहां उतरेगा.




आगे भी इसी नाम से होंगे ग्रहों के लिए अंतरिक्ष अभियान
चीनी स्पेस एजेंसी ने कहा है कि उनकी भविष्य में होने वाले सभी ग्रहों के नाम इसी तियानवेन सीरीज पर होंगे. जो चीन की सत्य और विज्ञान की खोज में प्रकृति और अंतरिक्ष के अन्वेषण को दर्शाएगी.

अंतरिक्ष अभियानों को लेकर बहुत महत्वाकांक्षी है चीन
उल्लेखनीय है कि चीन की अंतरिक्ष अभियानों के मामले में भी बड़ी महत्वाकांक्षा है. वह दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने चांद के पिछले हिस्से पर अपना अंतरिक्ष यान सहित रोवर उतारा है जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता. इतना ही नहीं वह अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की तैयारी में है.

क्या है मंगल को लेकर चीन की योजना
चीन का उद्देश्य दुनिया की उन ताकतों के बराबर आना है जो मंगल पर जाने की तैयारी कर रही है. इस समय केवल अमेरिका, रूस, भारत और यूरोपीय यूनियन ही मंगल पर अपने अन्वेषण यान भेजने की तैयारी कर रहे हैं. अमेरिका अपना एक यान मंगल पर उतार चुका है. चीन की योजना है कि उसका यान मंगल का चक्कर लगाए, वहां उतरे और एक रोवर वहां अध्ययन करे. और यह सब एक ही अभियान में करने वाला दुनिया का पहला देश होगा.

चीन की योजना उसी अभियान से मंगल पर रोवर उतारने की भी है.(प्रतीकात्मक तस्वीर)


पहले भी मंगल पर यान भेजने की कोशिश कर चुका है चीन
चीन इससे पहले भी मंगल पर अपना यान भेजने की तैयारी कर चुका है. उसने साल 2011 में  रूस के सहयोग से यिंगयुओ-1 मंगल पर भेजने की कोशिश की थी, लेकिन वह इस प्रक्षेपण के बाद ही नाकाम हो गया.

भारत भी मंगल यान भेज चुका है लाल ग्रह के लिए
गौरतलब है कि भारत मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक अपना एक अंतरिक्ष यान स्थापित कर चुका है. भारत ने अपना मंगलयान साल 2014 में भेजा था. ऐसा करने वाला वह पहला एशियाई देश है. पहले प्रयास में सफल होने वाला भारत एकमात्र देश है.

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First published: April 25, 2020, 8:08 PM IST
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