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चीन ने खोजा मुस्लिमों को परेशान करने का नया तरीका, बना रहा है बंधुआ मजदूर

News18Hindi
Updated: December 31, 2019, 8:59 PM IST
चीन ने खोजा मुस्लिमों को परेशान करने का नया तरीका, बना रहा है बंधुआ मजदूर
चीन में अब उइगर मुसलमानों को सैनिक स्टाइल में जबरन नौकरी करा रहा है

चीन उईगर मुसलमानों पर नकेल कसने के लिए तमाम तरीके अपनाता रहा है. अब वो एक और नए तरीके को अपना रहा है. इसमें चीनी बहुल इलाके के गांवों के मुसलमानों से जबरिया छोटी-मोटी नौकरियां करने के लिए घर से दूर भेजा जा रहा है. वो अपने बच्चों को साथ नहीं रख सकते और ना ही नौकरी से इस्तीफा दे सकते हैं.

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  • Last Updated: December 31, 2019, 8:59 PM IST
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चीन उइगर मुसलमानों को परेशान करने के तरीके लगातार अपनाता रहा है. जिसे लेकर लंबे समय से उसकी आलोचना भी होती रही है लेकिन अपने तौरतरीकों से शायद ही बाज आता हो. अब चीन ने मुस्लिम बहुत इलाके के लोगों को मुश्किल में डालने के लिए नया काम शुरू किया. वो गांव के लोगों को बंधुआ मजदूर बनाकर चीन में दूरदराज के इलाकों में भेज रहा है. कोई भी मुस्लिम इसे करने से ना तो मना कर सकता है और ना ही नौकरी छोड़कर जा सकता है.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस पर एक बड़ी रिपोर्ट प्रकाशित की है. इस रिपोर्ट के अनुसार चीनी अफसरों ने एक आदेश निकाला है. गांवों के अल्पसंख्यक मुस्लिमों को छोटी-मोटी नौकरियां करनी होंगी. चाहे उनका मन इसके लिए हो या ना हो. किसी ने अगर इसके प्रति अनिच्छा दिखाई तो उसे दंडित भी किया जाएगा.

मुस्लिम बहुल जिनजियांग प्रांत में इस कानून को सख्ती से लागू कर दिया गया है. इस आदेश का क्रियान्वयन आक्रामक तरीके से किया जा रहा है. जिनजियांग में आमतौर पर उइगर और कजाक मुसलमान रहते हैं. चीन चाहता है कि इन मुस्लिमों को छोटे-मोटे कामों के लिए एक बड़ी फोर्स में बदल देना. ये मुस्लिम उन सभी बड़ी फैक्ट्रियों में काम करें, जो दूर-दराज में हैं, जहां छोटे कामों के लिए मजदूर नहीं मिलते.

इस कानून की जद में गांवों में रहने वाले वो सभी मुसलमान आ रहे हैं, जो किसान या छोटे व्यापारी या फिर बेरोजगार हैं. इन सभी को ट्रेनिंग दी जाती है और कुछ हफ्तों से लेकर महीनों के ऐसे कोर्स कराए जाते हैं कि वो कपड़े सीने, जूते बनाना, सड़कें साफ करने या छोटे मोटे जॉब के लायक हो जाएं.


ताकि अपनी जड़ों से कट जाएं उइगर मुस्लिम
इस मजदूरी प्रोग्राम को लागू करने के पीछे कोई और नहीं बल्कि चीनी राष्ट्रपति यी जिनपिंग का दिमाग है ताकि मुस्लिम बहुल इलाकों पर पकड़ को और मजबूत किया जाए, खासकर उन इलाकों में जहां मुस्लिमों की आबादी कुल जनसंख्या की आधी है. लिहाजा ये प्रोग्राम रणनीति के लिहाज से सरकार का बहुत अहम प्रोग्राम बन गया है. उइगर मुसलमानों को कैंपों में रखकर ट्रेंड करने के साथ साथ ये प्रोग्राम चलाने को मुख्य उद्देश्य सामाजिक तौर पर फिर से इंजीनियरिंग करना है. इस कानून से वो सभी इलाके प्रभावित होंगे, जहां दस लाख या इससे ज्यादा उइगर या कजाक मुस्लिम रहते हैं.चीन उन्हें काहिल और सुस्त के साथ अनुशासनहीन मानता है
लेबर ब्यूरो ने इन मुस्लिमों के लिए आदेश दिया है कि उन्हें सेना की तरह कड़ी ट्रेनिंग से गुजारा जाए ताकि वो आज्ञाकारी वर्कर बन सकें. यही नहीं वो अपने मालिकों और सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए वफादार साबित हों. चीनी सरकार का मानना है कि गांवों में रहने वाले मुसलमान काहिल, सुस्त, धीमे, आवारा और मनमर्जी वाले होते हैं, उन्हें अनुशासन में ढालना जरूरी है.

चीनी सरकार का मानना है कि उइगर और कजाक मुस्लिमों के गांवों में सरप्लस मजदूर हैं, उसमें से ज्यादातर बेरोजगार हैं, जो सामाजिक स्थायित्व के लिए खतरा हैं. लिहाजा इन मुसलमानों को सरकार से मंजूर किये कामों में लगाना जरूरी है, इससे गरीब खत्म होगी साथ मुस्लिमों का अतिवादी धार्मिक रवैया और जातीय हिंसा पर भी रोक लगेगी.

लेबर ब्यूरो ने इन मुस्लिमों के लिए आदेश दिया है कि उन्हें सेना की तरह कड़ी ट्रेनिंग से गुजारा जाए ताकि वो आज्ञाकारी वर्कर बन सकें.


इन बंधुआ मजदूरों को वालिंटियर कहा जाता है
सरकार ने इन बंधुआ मजदूरों को वालिंटियर कहा है. जबकि आलोचकों का कहना है कि चीन सरकार बहुत चतुराई के साथ सारे मामले में झांसा देने का काम कर रही है. वो इस तरह दिखा रही है कि वो गरीबी और बेरोजगारी दूर कर रही है जबकि हकीकत ये है कि वो मुस्लिमों को उनकी जड़ों से काटकर ऐसी जगहों पर भेज रही है, जहां से उनका वापस लौटना बहुत मुश्किल होगा. धीरे-धीरे उन पर नौकरियों में टिकने का दबाव इस तरह बढाया जाएगा कि वो कहीं आ-जा नहीं सकें.

विशेषज्ञों का कहना है कि इन कड़े तरीकों से चीन केवल बंधुआ मजदूरी में मुसलमानों को झोंकने का काम कर रहा है. जिन बड़े कारखानों में इन्हें बंधुआ मजदूर के तौर पर दूरदराज के कारखानों में झोंका जाएगा, वो दुनिया के बड़े ब्रांड्स के लिए भी सामान तैयार करती हैं. हालांकि मानवाधिकार संगठनों ने जब इस पर चिंता जाहिर की तो चीन ने इसे खारिज कर दिया.

खास यूनिफॉर्म में वो अलग ही नजर आते हैं
हालत ये है कि चीन के दूरदराज के इलाकों में जितने भी इंडस्ट्रिल डेवलपमेंट जोन बनाए जा रहे हैं, सबमें कंस्ट्रक्शन के काम में इन्हीं उइगर मुस्लिमों को भेजा जा रहा है.  इन कारखानों या कंस्ट्रक्शन के काम में लगे लोगों से सुबह सैनिकों की तरह ड्रिल कराई जाती है और फिर वो अपने काम पर लग जाते हैं. इन सभी मजदूरों को उनकी ग्रे-नारंगी रंग की यूनिफॉर्म के जरिए अलग ही पहचाना जाता है.

उइगर मुस्लिम महिलाओं को आमतौर पर उन बड़ी फैक्ट्रियों में भेजा जाता है, जहां स्कूल की यूनिफॉर्म सिलने का काम होता है


दरअसल चीन ने अपनी इस प्रोग्राम का टारगेट 2020 रखा था लेकिन उसने एक साल पहले ही ज्यादातर गांवों के मुसलमानों को दूरदराज के इलाकों में बनी फैक्ट्रियों में भेजने में सफलता हासिल कर ली. हालांकि फैक्ट्री मालिकों की शिकायत है कि ये उइगर मुस्लिम ज्यादा तेज काम नहीं करते. अब चीन सरकार चाहती है कि फैक्ट्रियों में छोटे कामों के  लिए उइगर मुसलमानों की संख्या को और बढ़ाया जाए.

चीन की राष्ट्रभक्ति की मुख्यधारा में लाना असली उद्देश्य 
ज्यादातर उइगर मुस्लिम महिलाओं को स्कूल यूनिफॉर्म बनाने वाली फैक्ट्रियों में काम करना होगा. उन्हें बहुत ज्यादा पैसा नहीं मिलता. इन्हें और इनके पतियों को सेना की देखरेख वाले कैंपों में रखा जाता है. ट्रेनिंग के दौरान उन्हें काम के अलावा मिलिट्री ड्रिल के साथ राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत चीन गाने सीखने पड़ते हैं. उनसे कहा जाता है कि वो इस्लामिक भावना को त्यागकर कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति नतमस्तक हों.

चीन के दूरदराज के इलाकों में अब तेजी से डेवलपमेंट जोन में फैक्ट्रियां बनाई जा रही हैं, जहां उइगर मुसलमानों को काम के लिए झोंक दिया जाता है


न बच्चे साथ रख सकते हैं और न नौकरी छोड़ सकते हैं
सरकार के आदेश के अनुसार वो अपने बच्चों को साथ नहीं रख सकते, बच्चों को केयरहमो में भेजना होगा. कोई भी मुस्लिम वर्कर अपने मन से काम नहीं छोड़ सकता, उसे इसके लिए कई स्थानीय अधिकारियों से इसकी लिखित अनुमति की जरूरत होगी, जो शायद ही मिले.  रिपोर्ट ये भी हैं कि इन सभी मजदूरों को न्यूनतम पगार से भी कम मजदूरी दी जाती है. जिसके खिलाफ कोई सुनवाई नहीं. कुछ मजदूरो को घर से दूर फॉर्म हाउसेस में भेज दिया जाता है, जहां उन्हें कड़ा काम करना होता है. जब फसल काट दी जाती है या फॉर्म हाउस का काम हो जाता है तो उन्हें फिर किसी और काम पर लगा दिया जाता है.

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First published: December 31, 2019, 8:59 PM IST
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