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चीन बना रहा है सूरज, इस साल के अंत तक हो जाएगा तैयार

News18Hindi
Updated: May 23, 2020, 3:56 PM IST
चीन बना रहा है सूरज, इस साल के अंत तक हो जाएगा तैयार
न्यूक्लियर पावर से काम करने वाला ये सूरज असली सूरज से भी ज्यादा तेज रोशनी देने वाला होगा (Photo-pixabay)

चीन (China) जल्दी ही अपने खास सूरज का निर्माण (manufacturing Sun) पूरा कर सकता है. न्यूक्लियर पावर (nuclear power) से काम करने वाला ये सूरज असली सूरज से भी ज्यादा तेज रोशनी देगा.

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वैज्ञानिक लगातार कह रहे हैं कि सूरज की रोशनी कम होती जा रही है. खुद नासा (NASA) के शोध भी यही बताते हैं कि आकाशगंगा (galaxy) के दूसरे तारों की अपेक्षा हमारा सूरज जल्दी कमजोर हो रहा है. इससे धरती पर हिमयुग जैसी आशंकाएं भी जताई जा रही हैं. हालांकि चीन (China) अब नकली सूरज (artificial sun) पर तेजी से काम कर रहा है और उसका दावा है कि ये असल सूरज से लगभग 13 गुना तक ज्यादा रोशनी और गर्मी देगा.

चीन (China) के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम सूरज (artificial sun) तैयार करने में सफलता हासिल कर ली है. ये एक ऐसा परमाणु फ्यूजन (nuclear fusion) है, जो असली सूरज से 13 गुना ज्यादा ऊर्जा देगा. कई सालों से चली आ रही ये रिसर्च (research) हाल ही में पूरी हुई है. Artificial sun के इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक वैज्ञानिक Duan Xuru ने एक इंटरव्यू में कहा कि इसी साल इसे अमल में लाया जा सकता है. ये खबर sciencealert में छपी है. वैसे चीन ही नहीं, बल्कि दुनिया के सारे देश सूरज बनाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन गर्म प्लाज्मा को एक जगह रखना और उसे फ्यूजन तक उसी हालत में रखना सबसे बड़ी मुश्किल आ रही थी.

चीन ही नहीं, बल्कि दुनिया के सारे देश सूरज बनाने की कोशिश कर रहे हैं (Photo-pixabay)




चीन में ये प्रोजेक्ट साल 2006 से चल रहा है. कृत्रिम सूरज को HL-2M नाम दिया गया है, जिसे चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन (China National Nuclear Corporation) और साउथवेस्टर्न इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स (Southwestern Institute of Physics) के वैज्ञानिकों ने मिलकर बनाया है. बता दें कि कृत्रिम सूरज बनाने की ये कोशिश काफी सालों से चली आ रही थी, ताकि प्रतिकूल मौसम में भी सोलर एनर्जी बनाई जा सके और उसका इस्तेमाल हो सके.






इस दिशा में प्रयोग के लिए चीन के Leshan शहर में रिएक्टर तैयार किया गया और काम शुरू हुआ. आर्टिफिशियल सूरज बनाने के लिए हाइड्रोजन गैस को 5 करोड़ डिग्री सेल्सियस के तापमान पर गर्म कर, उस तापमान को 102 सेकंड तक स्थिर रखा गया. असली सूरज में हीलियम और हाइड्रोजन जैसी गैसें उच्च तापमान पर क्रिया करती हैं. इस दौरान 15 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक ऊर्जा निकलती है. इसी उच्च ऊर्जा वाले तापमान को पैदा करने के लिए लंबा प्रयोग चला.

सूरज बनाने के दौरान इसके परमाणुओं को प्रयोगशाला में विखंडित किया गया. प्लाज्मा विकिरण से सूर्य का औसत तापमान पैदा किया गया, जिसके बाद उस तापमान से फ्यूजन यानी संलयन की प्रतिक्रिया हासिल की गई. फिर इसी आधार पर अणुओं का विखंडन हुआ, जिससे उन्होंने ज्यादा मात्रा में ऊर्जा उत्सर्जित की. ये प्रक्रिया लगातार और समय बढ़ा-बढ़ाकर दोहराई जाती रही. इस दौरान कई बार ऐसा भी हुआ कि न्यूक्लियर फ्यूज़न चैंबर का कोर इतने तापमान के आगे नहीं टिक पाया था.

उच्च ऊर्जा वाले तापमान को पैदा करने के लिए लंबा प्रयोग चला (Photo-pixabay)


काफी कोशिशों के बाद आखिरकार सफलता मिली. इस दौरान देखा गया कि नकली सूरज पर इस प्रयोग में असली सूरज से भी ज्यादा ऊर्जा पैदा की जा सकती है. ये ऊर्जा 200 मिलियन डिग्री सेल्सियस थी, यानी असल सूरज से 13 गुना ज्यादा. यह अविष्कार उस प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसके तहत न्यूक्लियर फ्यूजन से साफ-सुथरी एनर्जी प्राप्त की जा सके. माना जा रहा है कि सूरज की नकल के तरीके से मिलने जा रही ऊर्जा एनर्जी के दूसरे स्त्रोतों से कहीं अधिक सस्ती और पर्यावरण के लिए कम हानिकारक है.

अगर ये प्रयोग लागू किया जा सके तो जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी. ये भी माना जा रहा है कि इस सूरज में उत्पन्न की गई नाभिकीय ऊर्जा को विशेष तकनीक से पर्यावरण के लिये सुरक्षित ग्रीन ऊर्जा में बदला जा सकेगा. जिससे धरती पर ऊर्जा का बढ़ता संकट तरीकों से दूर किया जा सकेगा.

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First published: May 23, 2020, 3:55 PM IST
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