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आखिर चांद पर पौधा उगाने में क्यों जुटा है चीन? जानें पूरा प्लान

News18Hindi
Updated: January 16, 2019, 11:10 PM IST

चीन अपने स्पेस प्रोग्राम को चीन दुनिया में उसकी बढ़ती ताकत के एक प्रतीक के रूप में देखता है.

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  • Last Updated: January 16, 2019, 11:10 PM IST
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कीड़े, पौधे, आलू के बीज और अराबिडोप्सिस नाम का एक छोटा सा फूल वाला पौधा. ये सारी चीजें चीन का चैंग ई-4 लैंडर एंड रोवर दिसंबर में चांद पर ले गया है. चीन चांद के न दिखने वाले हिस्से पर एक छोटा सा बायोस्फीयर यानी जैव पर्यावास बनाना चाहता है, जहां पर पौधे होंगे, फूल होंगे और रेशम के कीड़े होंगे. उसकी योजना के मुताबिक, ये सारे ही चीज़े आपसी सहयोग से ऑक्सिजन रहित चांद पर जीवित रहेंगे. चीन का चांद पर उगाए जाने वाला कपास का पौधा भी इसी प्लान का हिस्सा है.

इस साल के आखिरी में चांद पर जीवन की संभावना के सिलसिले में किया गया चीन का यह प्रयोग अपने आप में अकेला और अनोखा था. इसे इंसानों के चांद पर जाकर बसने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

बाल्टी जैसी संरचना में बनाया जाएगा यह जैव पर्यावास
इन सारी ही चीजों को 18 सेमी ऊंचे बाल्टी जैसे एक टिन में रखा गया है. यह बाल्टी जैसा टिन मिश्रित एल्युमिनियम धातुओं से बना है. इस बाल्टी में पानी और पोषक तत्व भी डाले गये हैं. साथ ही इसमें पड़ा है एक कैमरा और एक डाटा ट्रांसमिशन सिस्टम. इन्हीं के जरिए इस बाल्टी में जीवन पनपने की तस्वीरें साझा की गई हैं.



इस बाल्टी को एक छोटी ट्यूब के जरिए प्राकृतिक सूर्य का प्रकाश दिया जा रहा है, जिससे पौधों और आलू के बीजों को उगने में मदद मिल सके. भले ही चंद्रमा का यह हिस्सा धरती से दिखाई न देता हो लेकिन इसे भी उतनी ही धूप सूर्य से मिलती है, जितनी चंद्रमा के उस हिस्से को मिलती है, जिसे हम धरती से देख सकते हैं.



इस तरह से एक-दूसरे पर निर्भर होंगे पौधे और जीव
इस प्लान के अगले हिस्से में यह देखा जाएगा कि क्या पौधों से निकलने वाली ऑक्सीजन के जरिए रेशम के कीड़ों को अपने कोकूनों को अपने जैसे कीड़ों का रूप देने में मदद मिल रही है?

चीनी वैज्ञानिकों ने कहा है कि रेशम के कीड़े जिस कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन करेंगे, इसके साथ ही वे जिस मल का त्याग करेंगे, उससे पौधों को बढ़ने में मदद मिलेगी.

इस प्रयोग के चीफ डायरेक्टर और चोंगक्विंग यूनिवर्सिटी के वाइस प्रेसिडेंट प्रोफेसर लियु हानलोंग ने चीनी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ से बातचीत में कहा, हमारा प्रयोग चांद पर एक जैव पर्यावास का बेस बनाने की जानकारी जुटाने और कुछ वक्त बाद चांद पर इंसानी घरों को बनाने में मदद कर सकता है.

ऐसा जैव पर्यावास बनाने में क्या-क्या मुश्किलें आ सकती हैं सामने?
एस्ट्रोनॉट पहले भी इंटरनेशनल स्पेस सेंटर में पौधे उगा चुके हैं, जबकि चीनी एस्ट्रोनॉट जिन्हें 'टाइकोनॉट्स' कहते हैं, उन्होंने भी चीनी अंतरिक्ष लैब तियानगौंग-2 पर चावल और अराबिडोप्सिस उगाए थे.

लेकिन वे एक्सपेरिमेंट्स धरती की करीबी कक्षा में किया गया था. जो धरती से मात्र 400 किमी की ऊंचाई पर था. चीनी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने बताया है कि चांद का पर्यावरण, धरती से 3 लाख 80 हज़ार किमी ऊपर है और यह ज्यादा जटिल है.

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साथ ही चांद पर गुरुत्वाकर्षण, धरती के गुरुत्वाकर्षण का मात्र 16 फीसदी है. जो प्रोजेक्ट की सफलता में एक बड़ी बाधा साबित हो सकता है.

माना जा रहा था कि चांद के कठिन मौसम में जीवन का फलना-फूलना मुश्किल साबित हो सकता है, क्योंकि यहां तापमान न्यूनतम -100 डिग्री सेल्सियस से लेकर अधिकतम 100 डिग्री सेल्सियस तक रहता है, लेकिन अब साबित हो चुका है कि यह इतना भी मुश्किल नहीं है.

इस प्रयोग के चीफ डिजाइनर शी गेन्गसिन कहते हैं, हम मिनी बायोस्फीयर में तापमान को 1 डिग्री से 30 डिग्री के बीच रखने का प्रयास करेंगे और पूरी तरह से नमी और पोषण का स्तर सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे.

आलू और रेशम के कीड़े


इस स्पेस प्रोग्राम के लिए आलू क्यों बन गया है खास?
इस प्रयोग में आलुओं और अराबिडोप्सिस को ही इसलिए चुना गया है, क्योंकि वे जल्दी-जल्दी बढ़ते हैं और उनके विकास पर नज़र रखना भी आसान होता है.

प्रोफेसर लियु ने यह भी कहा कि भविष्य के अंतरिक्षयात्रियों के लिए आलू खाने का एक प्रमुख स्त्रोत बन सकता है.

चुपचाप चांद के धरती से न दिखने वाले हिस्से पर उतरना अंतरिक्ष के क्षेत्र में चीन की हालिया प्रमुख सफलता है. 2003 में चीन खुद अपने रॉकेट से किसी इंसान को अंतरिक्ष में भेजने वाला तीसरा देश बन गया था. इससे पहले यह कारनामा केवल सोवियत रूस और अमेरिका ने ही किया था. दस साल बाद चीन चांद पर मिशन भेजने वाला भी दुनिया का तीसरा देश बना.

चीन के मिशन के जानकार बताते हैं कि चीन का मिशन 2030 से कुछ वक्त बाद इंसान को चांद पर उतारने का है. जबकि पिछले साल एक चीनी अधिकारी ने कहा था कि बीजिंग की ओर से एक बार अनुमति मिल जाने के बाद चांद पर इंसान को उतारने में चीन को बिल्कुल वक्त नहीं लगेगा.

चीन अपने स्पेस प्रोग्राम को चीन दुनिया में उसकी बढ़ती ताकत के एक प्रतीक के रूप में देखता है.

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First published: January 15, 2019, 3:13 PM IST
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