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चीन के इस राज्य की आबादी है 8 करोड़ और गरीबों की संख्या सिर्फ 17

News18Hindi
Updated: January 12, 2020, 8:27 PM IST
चीन के इस राज्य की आबादी है 8 करोड़ और गरीबों की संख्या सिर्फ 17
जियांग्सू को चीन का मैन्यूफैक्चरिंग हब माना जाता है और इसे एक्पोर्ट के पावरहाउस के तौर पर देखा जाता है.

चीन से एक ऐसी खबर आई जिसके बाद दुनिया के कई गरीब देश (Poor Countries) चीन (China) की तरफ आशा भरी नजरों से देख रहे हैं.

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  • Last Updated: January 12, 2020, 8:27 PM IST
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अंतरराष्ट्रीय मीडिया (International Media) में चीन की खबरें विशेष तौर पर दो बातों के लिए जगह पाती हैं-पहला आर्थिक विकास को लेकर और दूसरा उइगर मुस्लिमों (Uyghurs Muslims) पर विवाद के लिए. अब चीन से एक ऐसी खबर आई जिसके बाद दुनिया के कई गरीब देश चीन की तरफ आशा भरी नजरों से देख रहे हैं. दरअसल चीन के जियांग्सू प्रांत में सरकार ने दावा किया है कि अब प्रांत में सिर्फ 17 ही गरीब बचे हैं. हालांकि सरकार के इस दावे पर उंगलियां भी उठाई जा रही हैं. सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने में आ रही हैं. कई प्रतिक्रियाओं में कहा जा रहा है की चीन की सरकार ने यह बनावटी आंकड़ा पेश किया है.

शी जिनपिंग ने शुरू किए थे प्रयास
सरकारी आंकड़े के मुताबिक समुद्री इलाका जियांग्सू चीन का पहला प्रांत बन गया है जहां पूरी तरह से गरीबी उन्मूलन हो चुका है. साल 2011 में इस इलाके की प्रति व्यक्ति सालाना आय 2300 युआन (यानी 23,497 रुपए ) बताई गई थी जो अब करीब 6000 युआन हो गई (61,334 रुपए) है. सरकार ने इसे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम की सफलता के तौर दर्शाया है. हालांकि अभी पूरे देश के आंकड़े आने बाकी है लेकिन अगर 2018 के सरकारी आकंड़ो पर गौर किया जाए तो देश में करीब 1 करोड़ 66 लाख गरीबों की संख्या थी. बताया जा रहा है कि बीते साल में सरकारी प्रयासों से करीब 1 करोड़ लोग गरीबी रेखा के ऊपर आ चुके हैं.

चीन सरकार ने इस इलाके में बड़े स्तर पर गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम चलाया है.
चीन सरकार ने इस इलाके में बड़े स्तर पर गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम चलाया है.


क्या हैं सरकारी दावे
जियांग्सू की प्रांतीय सरकार के मुखिया झू गुओबिंग ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट अखबार को बताया है कि राज्य के करीब ढाई करोड़ गरीब लोगों में से 99.9 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के ऊपर आ चुके हैं. प्रांत में सालाना प्रति व्यक्ति आय करीब 6000 युआन हो गई (61,334 रुपए) है. सरकार का कहना है कि विश्व बैंक ने गरीबी की परिभाषा 1.90 डॉलर (134 रुपए) प्रतिदिन तय की है. हम अपने लोगों को इस रेखा से ऊपर लाने में कामयाब हुए हैं. हालांकि चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकार के इस दावे को लेकर मजाक भी उड़ रहा है. चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Weibo पर एक यूजर ने तंज करते हुए लिखा-'क्या संयोग है! मैं तो राज्य के उन्हीं 17 लोगों में हूं!'

मैन्यूफैक्चरिंग हब बना जियांग्सूजियांग्सू को चीन का मैन्यूफैक्चरिंग हब माना जाता है और इसे एक्पोर्ट के पावरहाउस के तौर पर देखा जाता है. ये देश का दूसरा सबसे बड़ा प्रांत है. सरकार ने इस इलाके में गरीबी हटाने के लिए लंबी अवधि की योजनाओं पर काम किया है. जिससे रोजगार सृजन में स्थायित्वता आ सके और योजनाओं के जरिए लंबे समय के लिए विकास किए जा सकें. राज्य के लोगों के लिए सरकार ने खाद्य सुरक्षा, कपड़े, जरूरी शिक्षा, सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करने की कोशिश की है. चीन की सरकार ने इसके लिए राज्य में बड़े स्तर पर निवेश किया है.



अब भी कई इलाकों में अस्थिरता का दौर
गरीबी उन्मूलन को लेकर बड़े स्तर कार्यक्रम चलाने वाला चीन अब भी कई जगह पर स्थानीय विरोधों का सामना कर रहा है. विशेष रूप जिनजियांग प्रांत में उइगर मस्लिमों के विरोध को लेकर सरकार को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. उइगर समुदाय पर कार्रवाई को लेकर चीनी सरकार को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आलोचनाओें का भी सामना करना पड़ा है. आर्थिक विकास की दौड़ में लगे चीन को अपने देश में सामाजिक विकास से जूझना पड़ रहा है.
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First published: January 12, 2020, 8:13 PM IST
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