होम /न्यूज /ज्ञान /

लीथीयम के पीछे क्यों पड़ी हैं चीन की कंपनियां?

लीथीयम के पीछे क्यों पड़ी हैं चीन की कंपनियां?

लीथियम (Lithium) की आने वाले समय में बहुत मांग बढ़ने वाली है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

लीथियम (Lithium) की आने वाले समय में बहुत मांग बढ़ने वाली है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

चीन (China) और जिम्बॉब्वे (Zimbabwe) दुनिया के सबसे ज्यादा लीथियम (Lithium) भंडार वाले देशों में शामिल है. लेकिन हाल ही में चीन ने कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद जिम्बाब्वे की एककंपनी लीथियम खनिज प्राप्त करने का सौदा हासिल किया है. जिम्बॉब्वे से भी ज्यादा लीथियम निक्षेप वाला देश होने के बाद भी चीन दूसरे देशों लीथियम खनिज ले रहा है, यह उसकी दूरगामी योजनाओं का हिस्सा है.

अधिक पढ़ें ...

    पिछले कुछ सालों में लीथियम (Lithium) की मांग बहुत बढ़ी है. हाल ही में जिम्बाब्वे (Zimbabwe) की एक बड़ी उत्खनन कंपनी ने यह समझौता किया है कि वह अलगे साल साल चीन (China) को लीथियम वाला स्पोडूमीनी नाम का खनिज निर्यात करेगी. इसके लिए चीनी कंपनी ने तगड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना किया था. सवाल यह है कि आखिर चीन की कंपनियां लीथीयम के पीछे क्यों पड़ी हैं और उन्हें इसके लिए इतनी प्रतिस्पर्धा का सामना क्यों करना पड़ रहा है. इसकी सबसे प्रमुख वजह लीथीयम की बैटरी में होने वाला उपयोग है जिनकी बढ़ती मांग लीथीयम को इतना कीमती बना दिया है.

    लीथियम की अहमियत
    लीथियम को दुनिया में कितनी अहमियत दी जा रही है इससे समझा जा सकता है कि चंद्रमा को लेकर हो रही अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा की एक वजह वहां पर लीथीयम के भंडार को भी माना जा रहा है. इसके अलावा कई विशेषज्ञ रूस यूक्रेन संघर्ष के पीछे के कारणों में से एक कारण यूक्रेन में लीथियम के भंडार को भी मानते हैं. जबकि लीथियम दुनिया में बहुत प्रचुर मात्रा में उपलब्ध नहीं है.

    इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग
    दरअसल अब लीथीयम की मांग केवल मोबाइल और लैपटॉप की बैटरी के लिए ही नहीं रह गई है. जिस तरह से पिछले कुछ सालों में और खास तौर रूस यूक्रेन युद्ध के बाद जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता खत्म होने की जरूरत तेज हो गई है. ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों को भविष्य के परिवाहनों के तरह देखा जा रहा है और इस तेजी से अभी बढ़ाने का प्रयास किए जाने की मांग भी बढ़ रही है.

    जिम्बॉब्वे में भी लीथियम भंडार
    इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी में भी लीथियम होता है. इस लिहाज से लीथियम की मांग बढ़ना तय है. लीथियम की उपलब्धता को देखते हे जिम्बाबवे की खदानों में भी उत्खनन की मांग बढ़ गई है जहां लीथियम के विशाल निक्षेप हैं. गौरतलब है कि स्टैटियाडॉटकॉम के मुताबिक जिम्बॉब्वे, चिली, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का सबसे ज्यादा लीथियम भंडार वाला देश है.

    Science, China, Zimbabwe, Electric Vehicles, EV Battery, EV Battery Market, Lithium,

    इलेक्ट्रिक वाहनों में लीथियम बैटरी (Lithium Battery) की मांग बढ़ने से लीथियम की मांग बढ़ रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    बहुत सारे निवेशकों में चीनी कंपनी की जीत
    जूलू लीथियम माइन्स, प्रीमियर अफ्रीकन मिनिरल्स की सहायक कंपनी है, कंपनी के चीफ एक्जीक्यूटिव जॉर्ज रोच के अनुसार कंपनी ने बहुत सी चीनी, यूरोपियन और ऑस्ट्रेलाई निवेशकों में से शुझोउ टीएएंडए अल्ट्राक्लीन टेक्नोलॉजी कंपनी को चुना है. एकसमय पर खुद रोच 11 अलग अलग कंपनियों के लोगों से बातचीत में शामिल थे जो इस काम में शामिल होना चाहते थे.

    यह भी पढ़ें: परमाणु युद्ध का आज क्या होगा पृथ्वी पर असर- शोध ने बताया

    लीथियम बैटरी की सप्लाई चेन में
    शुझोउ ने जूलू खान के एक पायलट संयंत्र के निर्माण में 3.5 करोड़ डॉलर का निवेश करने पर सहमति जताई है. इससे इस खान से हर साल करीब 50 हजार टन की लीथियम वाले पत्थरों का उत्पादन होगा. इस निवेश से कंपनी को अपने लीथियम बैटरी की आपूर्ति शृंखला में वर्टिकल इंटीग्रेशन का मौका मिलेगा.

    Science, China, Zimbabwe, Electric Vehicles, EV Battery, EV Battery Market, Lithium,

    चीनी कंपनियां (Chinese companies) भविष्य में लीथियम की बढ़ती मांग को देखते हुए इस तरह से अतिमहत्वाकांक्षी निवेश कर रही हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    एक और कंपनी भी
    शुझोऊ भी स्पूडमीने कंसंट्रेट का आपूर्तिकर्ता होने केसाथ चीन की प्रमुख लीथियम उत्पादक कंपनी यीबिन तियानयी का सीएटीएस के साथ संयुक्त मालिक है. सीएटीएल चीनी बैटरी उत्पादक कंपनी है जो दुनिया में लीथियम आयन बैटरी का 30 प्रतिशतसे ज्यादा हिस्से का उत्पादन करती है. इसी तरह से चीन की झेजियांग हुआयू कोबाल्टने पिछले महीने ही जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे के पास लीथीयम के खनिज उत्खनन के लिए 30 करोड़ डॉलर निवेश करने योजना का ऐलान किया है.

    यह भी पढ़ें: आखिर यूरोपीय संघ का सदस्य क्यों बनना चाहता है यूक्रेन?

    इलेक्ट्रिक वाहनों में लीथियम बैटरी के उपयोग की बढ़ती संभावना ने लीथियम और इलेक्ट्रिक वाहनों दोनों को बाजार को प्रभावित किया है. पहले जहां इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं द्वारा निकल मैग्नीज कोबाल्ट (NMC) बैटरी पर जोर दिया जाता था, वहीं अब लीथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) की लोकप्रियता बढ़ रही है. ऐसे में चीन की नजरें लीथियम के बाजार पर हैं. लेकिन खुद चीन के पास भी लीथियम के विशाल भंडार हैं ऐसे में लगता है कि वह अमेरिकी की तेल उप्तादन नीति पर चलने का इरादा रखता दिख रहा है.  खुद के स्रोत भविष्य के लिए बचा कर रखा जाए!

    Tags: China, Research, Science, World

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर