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चंद्रमा के नमूनों ने दिए ज्वालामुखी गतिविधि के नए संकेत, चीनी शोधकर्ता का दावा

चंद्रमा के नमूनों ने दिए ज्वालामुखी गतिविधि के नए संकेत, चीनी शोधकर्ता का दावा

चीन (China) के चंद्रमा से लाए गए नमूनों के विश्लेषण ज्वालामुखी गतिविधियों के बारे में ज्यादा संकेत दे रहे है. (तस्वीर: @CGTNOfficial)

चीन (China) के चंद्रमा से लाए गए नमूनों के विश्लेषण ज्वालामुखी गतिविधियों के बारे में ज्यादा संकेत दे रहे है. (तस्वीर: @CGTNOfficial)

चीन (China) में पिछले साल आए चंद्रमा के नमूनों (Moon Rock Samples) को लेकर चीनी शोधकर्ता का कहना है कि चंद्रमा पर ज्वालामुखी गतिविधियां (Volcanic Activity) दो अरब साल पहले तक चल रही थीं.

    चीन (China) द्वारा चंद्रमा से लाए गए चट्टानों (Rock Samples form Moon) के नमूने पिछले दिनों में खासी चर्चा में रहे. ये नमूने वैसे तो पिछले साल के अंत में चीनी रोबोट अंतरिक्ष यान द्वारा धरती पर उतारे गए थे. लेकिन इन पर हुए विश्लेषणों  ने बिलकुल नई जानाकरी दी है. इसमें यह बताया गया था कि ये नमूने जिस लावा से बने हैं, वे केवल 2 अरब साल पुराना ही है. इस बारे में एक चीनी शोधकर्ता ने मंगलवार को बताया कि इन नमूनों से पुरातन चंद्रमा की ज्वालामुखी गतिविधियों की जानकारी मिलती है. इस विश्लेषण से चंद्रमा के भूगर्भीय इतिहास की जानकारी (geological timeline of moon) में बड़ा बदलाव हो सकता है.

    क्या मिली है नई जानकारी
    चीनी शोधकर्ता ली जियानहुआ का कहना है कि नमूनों के विश्लेषण ने चंद्रमा की रासायनिक संरचना और उसके विकास पर ऊष्मा के प्रभाव की नई जानकारी का खुलासा किया है. ली ने बताया कि नमूनों का विश्लेषण बताता है कि  चंद्रमा पर हालिया ज्वालामुखी गतिविधि 2 अरब साल पहले तक होती रही थी, जबकि इससे पहले माना जाता रहा है कि ऐसे गतिविधियां 2.8 से 3 अरब साल पहले तक बंद हो गई थी.

    कब तक अंदर से गर्म था चंद्रमा
    ज्वालामुखी गतिविधियां चंद्रमा के लिए बहुत ज्यादा महत्व रखती हैं. उनसे चंद्रमा का अंदर के बारे में जानकारी तो मिलती ही है, साथ ही वे आंदरूनी ऊर्जा और पदार्थ चक्र को प्रदर्शित करती हैं.” ली  ने रिपोर्टरों को जानाकरी दी. अभी तक वैज्ञानिक लावा का इतने आधुनिक समय तक गर्म रहने के अन्य संभावित कारणों की भी पड़ताल कर रहे थे.

    समय का इतना अंतर खास
    गौरतलब है कि जो नमूने अपोलो अभियान के द्वारा पृथ्वी पर लाए गए थे उनके अध्ययन से पता चला था कि वे 3 से 2.8 अरब साल पुरानी ज्वालामुखी गतिविधि से बने थे. जबकि चीनी नमूनों का समय केवल 2 अरब साल पुराना बताया जा रहा है. इसका मतलब है कि केवल नमूनों के आधार ही चंद्रमा की भूगर्भीय गतिविधियों के समय को सुनिश्चित नहीं किया जा सकता.

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    चंद्रमा के नमूनों (Moon Samples) से पता चला है कि वहां ज्वालामुखी गतिविधियां 2 अरब साल पहले तक चली थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    पहले चीन और सोवियत लाए थे नमूने
    चीन से पहले साल 1970 के दशक में सोवियत संघ और अमेरिका के चंद्रमा अभियानों से चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाने का काम किया था. इसके बाद अब चीन ने यह सक्रियता दिखाई है. लेकिन चीन अब इससे भी आगे जाने का इरादा कर चुका है. अब वह रोबोटिक अभियान को आगे बढ़ाते हुए चंद्रमा के पीछे वाले हिस्से नमूने लाएगा.

    क्या और भी हो सकते हैं ऊष्मा के स्रोत
    ज्वालामुखी गतिविधि के अलावा कई वैज्ञानिक इस  बात की पड़ताल करने पर जोर देने की जरूरत पर बल दे रहे थे कि चंद्रमा को ऊष्मा ज्वालामुखी के अलावा भी किसी और गतिविधि से मिल सकती है. इसमें चंद्रमा के अंदर के रेडियोधर्मी गतिविधिया या फिर इसमें टाइडल क्रियाओं से पैदा हुई ऊष्मा का प्रभाव भी हो सकता है. यानि जिस तरह के चंद्रमा के गुरुत्व का प्रभाव पृथ्वी पर पड़ता है, उसी तरह पृथ्वी का गुरुत्व भी चंद्रमा को प्रभावित करता है.

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    कई वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा (Moon) के अंदर ऊष्मा पृथ्वी के टाइडल इफेक्ट की वजह से भी आ सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    अगले नमूनों का इंतजार
    वैज्ञानिकों को अब चंद्रमा की दूसरी जगहों के नमूनों आने का इंतजार है. नासा तीन साल बाद चंद्रमा पर दो लोगों को भेजेगा. इसके अलावा चीन के चंद्रमा के पीछे जाने वाले अभियान से भी बहुत उम्मीदें हैं. इस बार नमूने एटकेन बेसिन से लाए जाएंगे जिसके बारे में माना जाता है कि वह 4 अरब साल पहले बना था.

    जाहिर है चीन अंतरिक्ष अन्वेषण में जिस तेजी से बढ़ रहा है, वह उसे शीर्ष अंतरिक्ष शक्तियों में विशेष स्थान दिलाने में सक्षम है. उसका भी खुद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को शुरु करने के लिए उसके अंतरिक्ष यात्री स्टेशन पर ही काम कर रहे हैं. उसका एक रोवर चंद्रमा के पिछले हिस्से पर काम कर रहा है तो जुरोंग रोवर मंगल पर सक्रिय है.

    Tags: China, Moon, Research, Science, Space

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