जानें कौन सा है रूस का वो शहर, जिस पर चीन ने जता दिया दावा

जानें कौन सा है रूस का वो शहर, जिस पर चीन ने जता दिया दावा
रूस का व्लादिवोस्तोक शहर आज से लगभग डेढ़ सौ साल पहले चीन का हिस्सा था (Photo-pixabay)

भारत के लद्दाख में घुसपैठ की कोशिश कर रहा चीन (India-China face-off) अब रूस की जमीन भी हथियाने की फिराक में है. चीन के सरकारी चैनल ने दावा किया है कि रूस का व्लादिवोस्तोक शहर असल में चीन (chinese media says Vladivostok territory was once part of China) का है.

  • Share this:
जमीन और व्यापार को लेकर चीन की भूख लगातार बढ़ती जा रही है. कोरोना के बाद भी भारत की गलवान घाटी पर चीनी सेना लगातार मोर्चाबंदी किए हुए है. माना जा रहा कि नेपाल को भी भारत की जमीन हड़पने के लिए उकसाने में चीन का ही हाथ है. अब चीन के सीजीटीएन चैनल के एडिटर ने ये कहकर नया विवाद छेड़ दिया कि रूस का व्लादिवोस्तोक शहर आज से लगभग डेढ़ सौ साल पहले चीन का हिस्सा था. इसके बाद से रूस में भी चीन के खिलाफ जमकर बातें हो रही हैं.

क्या है पूरा मामला
दरअसल व्लादिवोस्तोक सिटी के स्थापना दिवस को रूस ने धूमधाम से मनाया. इसकी तस्वीरें रूस के चीन स्थित दूतावास ने भी पोस्ट कीं. सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें देखते ही चीनी लोग पिल पड़े. वे लिखने लगे कि ये चीन का हिस्सा था. इसी बहस में चीनी मीडिया सीजीटीएन के संपादक शेन सिवई ने भी कह दिया कि रूस का व्लादिवोस्तोक साल 1860 से पहले चीन का हिस्सा था. इसे पहले हैशेनवाई शहर के नाम से जाना जाता था. लेकिन रूस ने एकतरफा संधि के जरिए चीन से ये शहर ले लिया और उसका नाम तक बदल दिया.





फिर शांत किया मामला
बाद में सोशल मीडिया पर मुद्दा तूल पकड़ने पर संपादक ने सफाई में कहा कि चूंकि सीमा संधि पर दस्तखत हो चुके हैं इसलिए चीन का दावा शहर को लेकर नहीं है. हालांकि इसके बाद से मामला गरमाया हुआ ही है. माना जा रहा है कि चीन का सरकारी मीडिया असल में कम्युनिस्ट पार्टी की सोच का चेहरा है. और अगर इतने बड़े सरकारी चैनल का संपादक ये लिख रहा है तो कहीं न कहीं सरकार के मन में भी ये बात होगी.



साल 1860 में रूस की मिलिट्री ने इस शहर को बसाया और इसे नाम दिया व्‍लादिवोस्‍तोक (Photo-pixabay)वो शहर, जिसे लेकर बहस हुई
साल 1860 में रूस की मिलिट्री ने इस शहर को बसाया और इसे नाम दिया व्‍लादिवोस्‍तोक, जिसका अर्थ है पूरब का राजा. ये रूस के प्रिमोर्स्की क्राय राज्य की राजधानी है. पहले ये शहर वाकई में चीन का हिस्सा था. 1860 से ठीक पहले चीन ने Treaty of Aigun और Treaty of Peking के तहत अपना ये हिस्सा रूस को दे दिया. इसके बाद से ही इस इलाके का लगातार विकास हुआ. फिलहाल ये शहर प्रशांत महासागर में रूस के सैनिक बेड़े का एक बेस है. व्यापारिक तौर पर भी ये शहर रूस के लिए काफी अहम है. रूस से होने वाले व्यापार का काफी हिस्सा व्‍लादिवोस्‍तोक पोर्ट से होकर गुजरता है.

ये भी पढ़ें: किन देशों में सेना और पुलिस में शामिल किए जाते हैं ट्रांसजेंडर?

समुद्री व्यापार आय का स्त्रोत
इसके अलावा शहर का ऐतिहासिक महत्व भी है, जैसे पहले वर्ल्ड वॉर के दौरान व्‍लादिवोस्‍तोक पोर्ट यूएस से भेजे जा रहे मिलिट्री उपकरणों के लिए एंट्री पॉइंट रहा था. युद्ध के दौरान यहां काफी संख्या में जापानी फौज जम गई जो साल 1922 तक निकाली नहीं जा सकी थी. उनके जाते ही यहां रूस ने पूरी तरह से अपना वर्चस्व जमा लिया. वर्तमान में शहर के लोगों की आय का स्त्रोत समुद्री व्यापार से संबंधित है. यहां की आय का तीन-चौथाई हिस्सा फिशिंग से आता है. इसी पोर्ट से जापान की गाड़ियां लाई जाती हैं. रूस में उनकी काफी मांग है. ये भी शहर की आय का बड़ा जरिया है.

लोगों की आय का मुख्य स्रोत समुद्री व्यापार, मछली पकड़ना और रूसी नौसेना से जुड़े कामकाज हैं


भारी संख्या में चीन के लोग आ चुके हैं
हालांकि अब इसमें काफी बदलाव आते दिख रहे हैं. रूस के इस शहर को विकसित करने के लिए चीन ने अरबों डॉलर का निवेश किया है. यही निवेश दोनों देशों के बीच तनाव की वजह बन गया. दरअसल निवेश के तहत शहर को डेवलप करने के लिए भारी संख्या में चीन से इंजीनियर और मजदूर आ रहे हैं.

ये भी पढ़ें: बीजिंग के नीचे बसा खुफिया शहर, जिसे लाखों लोगों ने हाथों से खोदकर बनाया

इससे यहां लाखों चीनी लोग जमा हो गए हैं. यहां तक कि उनके अलग बाजार और अलग तौर-तरीके भी शहर में दिखने लगे हैं. अब कूटनीतिज्ञों को डर लग रहा है कि जैसे ही चीन की सैन्य और परमाणु ताकत रूस के मुकाबले पहुंचेगी, वो अपना इलाका वापस पाने की कोशिश जरूर करेगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading