जानें किस तरह चीन अब उइगर मुसलमानों से अलग कर रहा है उनके बच्चे

चीन चाहता है कि वो उइगर मुसलमानों के बच्चों को चीन के कल्चर में इस तरह ढाले कि वो अपनी जड़ों और कल्चर से कट जाएं. ये काम लंबी योजना के तहत जिनजियांग प्रांत में लगातार कुछ सालों से हो रहा है

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 9:20 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 9:20 PM IST
पिछले दो तीन सालों में चीन के जिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिम परिवारों के हजारों बच्चे गायब हो चुके हैं. अब ये पता लग रहा है कि ये बच्चे किसी और ने नहीं बल्कि खुद चीनी सरकार ने गायब कराए हैं. इन बच्चों को गायब करके कड़ी सुरक्षा वाले किंडरगार्टेन स्कूलों और बोर्डिंग स्कूलों में डाल दिया जाता है. जहां वो चीन के तौरतरीकों से बड़े होते हैं.

इन बोर्डिंग स्कूलों और किंडरगार्टेन में सुरक्षा इतनी जबरदस्त होती है कि कोई उइगर बच्चा किसी हालत में यहां से बाहर नहीं निकल सकता है. इनके चारों को कंटीले तारों की बाड़ होती है और जगह-जगह कैमरे, साथ ही प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा. पिछले कुछ सालों में चीन के जिनजियांग प्रांत में बड़े पैमाने पर किंडरगार्टेन और बोर्डिंग स्कूलों की बड़ी बड़ी नई इमारतें खड़ी की जा रही हैं.

इस हफ्ते इंटरनेशनल मीडिया ने इस पर बड़ी खबर की है. बीबीसी और सीबीएस न्यूज के वीडियो वाकई हैरान करने वाले हैं. सीबीएस न्यूज के वीडियो में तुर्की में रह रहे उन पीड़ित परिवारों के दुख को सामने लाया गया है कि किस तरह उनके बच्चे चीन में गायब हो गए और कैसे उन्हें पता लगा कि चीन ये काम सुनियोजित तरीके से कर रहा है.

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इसी तरह जुलाई के पहले हफ्ते में बीबीसी ने एक बड़ी रिपोर्ट की किस तरह जिनजियांग प्रांत में देखते ही देखते नए बोर्डिंग स्कूल और किंटरगार्डन बनाए जा रहे हैं, जहां इन परिवारों से अलग किए गए बच्चों को कड़े अनुशासन में रखा जा रहा है.

चीन चाहता है खत्म हो उइगर मुसलमानों की पहचान
जिनजियांग चीन का सबसे बड़ा प्रांत है. जहां बड़े पैमाने पर उइगर मुस्लिम रहते हैं. पिछले कुछ सालों से योजनाबद्ध तरीके से चीन इन उइगर मुस्लिमों के दमन में लगा है. चीन को लगता है कि उइगर मुसलमान ना तो अपने कल्चर को छोड़ने को तैयार हैं और ना ही धर्म और ना ही अपनी भाषा. इसे चीन अपने देश के लिए बड़ी मुश्किल मानता है. लिहाजा वो बड़े पैमाने पर वो सबकुछ कर रहा है, जिससे अगले कुछ सालों में उइगर मुसलमानों की अपनी अलग पहचान चीन हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो जाए.
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गायब हुए बच्चों की तस्वीरें, हालांकि ऐसे बच्चों की संख्या हजारों में है (साभार बीबीसी)


इसी कड़ी में पहले वहां की मस्जिदें तोड़ी जानी शुरू हुईं तो उसके बाद मदरसों का नंबर आया. अब ये कोशिश है कि उइगर मुसलमानों की नई पीढी को ही उनसे पूरी तरह काट दिया जाए. इसी के चलते चीन की सरकार जिनजियांग प्रांत में रह रहे मुस्लिमों पर नजर रखने लगी. ये पता लगाने में जुट गई कि कहां किस परिवार में कितने बच्चे हैं और उनकी उम्र क्या है. ये लिस्ट तैयार होने के बाद चीन का उइगर मुस्लिमों से उनके बच्चे अलग करने का अभियान शुरू हो गया.

छोटे छोटे कस्बों से गायब हुए सैकड़ों बच्चे
पिछले कुछ सालों में ये खबरें लगातार आ रही थीं कि बड़े पैमाने पर जिनजियांग के हर उस कस्बे से बडे़ पैमाने पर बच्चे गायब होने लगे हैं, जहां उइगर मुसलमान रहते हैं. गायब होने वाले बच्चों की उम्र आमतौर पर तीन साल से लेकर 10-12 साल के बीच होती है. एक बार गायब हुआ बच्चा फिर कभी कहीं नहीं मिलता है, कितनी भी खोज के बाद भी उनके परिवारों को निराशा और दुख ही हाथ लगता है.

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गायब हो रहे बच्चों के बारे में परिवार के लोगों ने लगातार शिकायतें कीं लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि उनकी शिकायतें या तो सुनी नहीं जा रही हैं या फिर चीनी अधिकारी उनके बच्चों को खोजने में कतई दिलचस्पी नहीं लेते. बाद में गायब हुए कई बच्चे सोशल मीडिया या वीडियो पर देखे गए लेकिन वेशभूषा, बात करने का तरीका और लेंग्वेज बदल चुकी थी. जब उन्होंने इस बारे में चीनी अफसरों को बताया तो कोई नतीजा नहीं निकला.

तुर्की में शरण लेने वाले उइगर मुसलमान बता रहे हैं कि किस तरह उनके परिवारों के बच्चे पिछले कुछ सालों में गायब हो गए


कहां गए गायब हुए बच्चे 
इन सबके बाद जिनजियांग के उइगर मुसलमानों को समझ में आने लगा कि कौन उनके बच्चों को गायब कर रहा है और वो कहां जा रहे हैं. कुछ बच्चे तब गायब हो गए, जब वो अपने घरों से बाहर निकले, कुछ तब जब वो स्कूल गए हुए थे. कुछ तब लापता हो गए, जब उनके पेरेंट्स को पकड़ कर चीनी पुलिस इंटर्नमेंट कैंपों में ले गई. ये सिलसिला अब भी चल रहा है.

जिनजियांग प्रांत में हालत ये हो गई है कि पेरेंट्स को पकड़कर कैंपों में डाला जा रहा है,जहां उन्हें चीनी राष्ट्रवाद में ढलने का और चीनी भाषा सीखने का पाठ पढाया जाता है और धर्म-संस्कृति दूर होकर चीन के कल्चर में ढलने के लिए आगाह किया जाता है. कुछ कैंप ऐसे हैं, जहां उइगर मुस्लिमों को कुछ दिनों के लिए रखा जाता है लेकिन कुछ ऐसे कैंप हैं, जो अपने आपमें शहर का रूप ले चुके हैं, यहां पर उइगर मुस्लमानों को कड़े अनुशासन और चीन के तौरतरीकों के बीच ही दिन गुजारने होते हैं.



तुर्की में शरण लेने वाले उइगरों ने बयां किया ये सब
दरअसल दुनिया को ये तो पता है कि जिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के साथ कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है. वहां से बड़े पैमाने पर पलायन भी हो रहा है, पिछले दिनों में बड़े पैमाने पर उइगर मुसलमानों ने तुर्की में शरण ली. तभी से पता लगना शुरू हुआ कि चीन ऐसा भी काम कर रहा है यानि ऐसी योजना पर अमल कर रहा है, जो कोई दूर दूर तक नहीं सोच सकता.

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तुर्की गए उइगर मुसलमानों के पास अपने उन जिगर के टुकड़ों की तस्वीरें हैं, जो गायब हो चुके हैं, जिनके दोबारा मिलने की कोई उम्मीद अब बाकी नहीं रह गई है. क्योंकि उन्हें मालूम है कि उनके बच्चे जब बड़े होंगे तो उन्हें सबकुछ भूल चुका होगा कि उनके पेरेंट्स कौन थे, उनका कल्चर या भाषा क्या थी. वो एक कल्चर में ढल चुके हैं. अगले कुछ सालों में चीन में उनका बखूबी ब्रेनवॉश हो चुका होगा. अगर चीन ने अपना ये काम कई सालों तक बरकरार रखा तो वो उइगर मुसलमानों को उनकी जड़ों से काटने के मकसद में कामयाब भी हो चुका होगा.

एक उइगर पेरेंट ने गायब हुए अपने बच्चे को एक साल बाद एक वीडियो में देखा, जिसमें वो चीनी भाषा में बोल रहा था


किस तरह गायब बच्चे को वीडियो पर देखा
तुर्की में शरण लेने वाले एक मुस्लिम बिजनेसमैन ने सीबीएस न्यूज को बताया कि जब वो एक बिजनेस के सिलसिले में चीन से कुछ दिनों के लिए बाहर गया तो लौटने पर उसे अपनी बीवी और छोटा बच्चा गायब मिला. बीवी तो कुछ दिनों बाद इंटर्नमेंट कैंप से वापस आ गई लेकिन बच्चे का कोई पता नहीं चला. कुछ दिनों बाद उसने वायरल हुए एक वीडियो पर अपने चार के बच्चे को चीनी भाषा में बोलते पाया, जिसमें वो कह रहा है कि चीन ही उसका देश है और चीन ही उसका पेरेंट्स.
इसी से मिलती जुलती कहानियां हजारों उइगर मुस्लिम पेरेंट्स की हैं. कुछ ने बाद में अपने बच्चों को बदली हुई वेशभूषा में सोशल मीडिया पर देखा. एक महिला बताती है कि उसकी बेटी को चीनी पोशाक से नफरत थी. लेकिन सोशल मीडिया पर चीन की परंपरागत पोशाक पहने हुए नजर आई.

अचानक बनने लगीं किंडरगार्टेन और बोर्डिंग स्कूलों की नई इमारतें
बीबीसी सर्वे का आंकड़ा कहता है कि चीन के दक्षिण जिनजियांग इलाके में तेजी से किंडरगार्टेन और बोर्डिंग स्कूलों की इमारतों का इजाफा हुआ है. कुछ नई इमारतें बन रही हैं. उसने अपनी रिपोर्ट में गूगल अर्थ के जरिए उन इमारतों को चिन्हित भी करने की कोशिश की है.पूरे चीन में जहां किंडरगार्टेन में आठ फीसदी बच्चे बढ़े हैं वहीं जिनजियांग में 82 फीसदी बच्चों के नामांकन बढ़े हैं और दक्षिण जिनजियांग प्रांत के उइगर इलाकों में ये तादाद 148 फीसदी तक जा पहुंची है. ये आंकड़े अपने आपमें ये बताने के लिए काफी हैं कि उइगर मुसलमानों के गायब बच्चे आखिर कहां जा रहे हैं.

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एक नए बोर्डिंग स्कूल या किंडरगार्टेन में सैकड़ों बच्चे एक साथ पढ़ और रह सकते हैं. यहां उनके पढने से लेकर खेलने और मनोरंजन की तमाम सुविधाएं ही हैं. लेकिन यहां वो वही करते हैं जो चीन चाहता है. वही सीखते हैं जो चीन की मर्जी होती है. यहां से बाहर निकलना उनके लिए असंभव सा है. यहां जगह जगह कैमरे हैं और जबरदस्त सुरक्षा.

चीन के जिनजियांग प्रांत में अचानक बोर्डिंग स्कूलों और किंडरगार्टेन की बड़ी बड़ी इमारतें बनने लगी हैं


क्या बताया गया विदेशी पत्रकारों को 
हाल में कुछ विदेशी पत्रकारों ने जब चीन के जिनजियांग प्रांत की यात्रा करनी चाही तो इक्का दुक्का पत्रकारों को इसकी अनुमति मिली. लेकिन उन पर लगातार नजर रखी गई और उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया गया. जब उन्होंने इस बारे में चीन के प्रोपेगेंडा डिपार्टमेंट से बात की, तो उन्होंने ऐसी बातों से साफ मना करते हुए ये जरूर कहा कि जिन उइगर परिवारों में हालत ठीक नहीं हैं या पेरेंट्स अपने बच्चों की सही तरीके से देखरेख नहीं कर पा रहे हैं, उन बच्चों को जरूर बोर्डिंग या किंडरगार्टन में रखा जा रहा है.

तूल पकड़ने लगा है ये मामला 
ये मामला तूल पकड़ रहा है. कुछ देश इसे संयुक्त राष्ट्र में भी ले जाने की बात कर रहे हैं. इसके जवाब में पाकिस्तान समेत कई देशों ने चीन का साथ देने की बात की है. चीन भी ये कह रहा है कि उसके दरवाजे विदेशी पत्रकारों के लिए खुले हैं, वो जब चाहे तब जिनजियांग की यात्रा कर सकते हैं लेकिन हकीकत यही है कि चीन उतना ही दिखाएगा, जितना वो चाहता है.

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First published: July 17, 2019, 9:20 PM IST
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