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पहले मंगल अभियान के लिए चीन तैयार, अंतरिक्ष में वर्चस्व कायम करने का है इरादा

पहले मंगल अभियान के लिए चीन तैयार, अंतरिक्ष में वर्चस्व कायम करने का है इरादा

यह रोवर नासा के मंगल पर मानव भेजने के अभियान के लिए बहुत अहम माना जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

यह रोवर नासा के मंगल पर मानव भेजने के अभियान के लिए बहुत अहम माना जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

चीन (China) अगले महीने ही अपने पहले मंगल अभियान (Mars Mission) की शुरुआत करना चाहता है इससे वह अंतरिक्ष की दुनिया के नेतृत्व में शीर्ष तक पहुंच सकता है.

नई दिल्ली: इस समय चीन (China) को दुनिया भर में पसंद नहीं किया जा रहा है. कोरोना वायरस (Corona virus) के प्रसार के लिए दुनिया के कई पश्चिमी देश चीन को किसी न किसी तरह से जिम्मेदार मान रहे हैं. चीन और अमेरिका में पहले से ही तनातनी चल रही है. चीन की भी विश्व शक्ति बनने की महत्वाकांक्षा किसी से छिपी नहीं है. अब चीन अंतरिक्ष (Space) में भी अपना वर्चस्व कायम करने की जल्दी में हैं. इसके लिए वह अगले महीने एक खास मंगल अभियान (Mars Mission) शुरू करने की तैयारी कर रहा है

नासा के पर्सिवियरेंस के साथ ही प्रक्षेपण की तैयारी?
नासा के अपने पर्सिवियरेंस रोवर को मंगल पर भेजने की घोषणा के बाद, चीन ने भी अपने पहले स्वतंत्र मंगल अभियान की घोषणा की है. इस अभियान के लिए चीन गंभीरता से तैयारी कर रहा है. इस अभियान को चीन ने तियानवेन-1 नाम दिया है. तियानवेन का मतलब होता है ‘स्वर्ग के सच का प्रश्न’

एक झटके में शीर्ष पर पहुंचने की कवायद
यदि चीन का यह अभियान सफल हो गया तो वह चीन को दुनिया के अंतरिक्ष नेतृत्व के शीर्ष के साथ ला खड़ा कर देगा. साइंसमैगडॉटओआरजी के मुतबिक यह काफी मुमकिन है. यह अपने तरह का एकमात्र मिशन है और इससे पहले इस तरह का अभियान कभी नहीं भेजा गया. इस एक ही अभियान में ऑर्बिटर, रोवर और एक लैंडर एक साथ शामिल हैं. ऐसा अब तक किसी भी देश ने नहीं किया. चीन भारत, अमेरिका, रूस और यूरोपियन यूनियन से एक ही झटके से आगे निकलने के लिए इस अभियान में ऑर्बिटिंग, लैंडिंग और रोविंग तीनों एक साथ शामिल कर रहा है.

बहुत कठिन है मंगल पर उतरना
मंगल पर उतरना अंतरिक्ष अभियानों में सबसे कठिन काम माना जाता है. चीन के मिशन इसी साल जुलाई में लॉन्च किया जाएगा इसी महीने नासा का पर्सवियरेंस भी प्रक्षेपित किया जाना तय हुआ है. अभी तक मंगल पर कुल 18 अभियान भेजे जा चुके हैं उनमें से केवल 10 ही सफल हुए हैं.  इन दस में से नौ नासा के हैं.

चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन की ओर से मंगल मिशन के रखे गए नाम 'तियानवेन' का मतलब 'स्वर्गीय प्रश्न' या 'स्वर्ग से प्रश्न' है.


मंगल पर एक असफल प्रयास कर चुका है चीन
इससे पहले चीन चंद्रमा पर कई अभियान भेज चुका है. लेकिन मंगल पर उसने एक ही प्रयास किया है. साल 2011 में इसने मंगल के उपग्रह (फोबोस) पर अपना ऑर्बिटर भेजा था, लेकिन यह अभियान तब असफल हो गया जब यह यान मंगल के वायुमंडल पर घुसने के साथ ही जल गया.

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प्रेस से बात नहीं कर सकते हैं इस अभियान के वैज्ञानिक
रिपोर्ट में कहा है कि इस अभियान पर काम करने वाले वैज्ञानिकों पर चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (CNSA) ने प्रेस से बात करने पर पाबंदी लगाई है. कुछ रिपोर्ट का मुताबिक यह कदम लोगों की जुलाई अभियान के प्रति ज्यादा उम्मीदें बढ़ने को रोकने के लिए लगाई गई हैं.

चीन की योजना उसी अभियान से मंगल पर रोवर उतारने की भी है.(प्रतीकात्मक तस्वीर)


तियानवेन सीरीज के ही होंगे भविष्य के ऐसे अभियान
चीनी समाचार एजेंसी के मुताबिक, चीन के CNSA का कहना है कि भविष्य में चीन के सभी ग्रह अन्वेषण अभियान तियानवेन सीरीज के ही होंगे. यह चीनी राष्ट्र के ब्रह्माण्ड और प्रकृति के अन्वेषण  और विज्ञान और सत्य की सतत खोज को दर्शाता है.

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चीन के वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि तियानवेन-1 को मंगल तक पहुंचने में 7 महीने का समय लगेगा. इसके लिए चीन ने लॉन्गमार्च 5 रॉकेट विकसित किया है. चीन की साल 2022 तक खुद का एक स्वतंत्र स्पेस स्टेशन स्थापित करने की योजना है. इसी बीच खबर है कि नासा  ने अपने पर्सिवियरेंस के प्रक्षेपण कार्यक्रम में थोड़ा सा बदलाव किया है. अब 20 जुलाई को होने वाला यह प्रक्षेपण 22 जुलाई को होगा.

Tags: China, Mars, Nasa, Research, Science

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