जानिए क्या मायने हैं चीन के Long March 5B यान प्रक्षेपण की नाकामी के

चीन के स्पेस स्टेशन का पहला माड्यूल तिहान्हे (Tianhe) इस रॉकेट में ले जाया जा रहा था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Axel Monse / shutterstock)

चीन के स्पेस स्टेशन का पहला माड्यूल तिहान्हे (Tianhe) इस रॉकेट में ले जाया जा रहा था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Axel Monse / shutterstock)

चीन (China) का लॉन्ग मार्च 5 बी (Long March 5B) यान अनियंत्रित हो कर पृथ्वी (Earth) के वायुमंडल में प्रवेश करने वाला है. इस नुकासन से चीन उबरने में सक्षम है.

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यह कोई पहली बार नहीं है कि किसी अंतरिक्ष यान (Space craft का प्रक्षेपण नाकाम हुआ हो और उसका कचरा पृथ्वी की वायुमंडल में प्रवेश करने जा रहा हो. लेकिन चीन (China) के लॉन्ग मार्च 5बी (Long March 5B) यान की नाकामी पर बड़ी हायतौबा हो रही है. इसका कचरा महासागरों के अंतरराष्ट्रीय पानी में गिरने की संभावना बताई जा रही है. यह कितना नुकसानदेह है और इस अभियान की नाकामी चीन और दुनिया के लिये क्या मायने रखती है हम इसी की चर्चा करेंगे.

स्पेस स्टेशन का पहला मॉड्यूल ले जा रहा था यान

लॉन्ग मार्च 5 बी पिछले महीने की 29 तारीख को चीन के हाइनान द्वीप से प्रक्षेपित हुआ था जो चीन के इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के प्रमुख मॉड्यूल तियान्हे को पृथ्वी की निचली कक्षा की ओर ले जा रहा था. इसमें तीन चीनी यात्रियों को इसी महीने पहुंचना था जो तीन महीनों के लिए इस स्पेस स्टेशन में रह कर जरूरी प्रयोग करने करने वाले थे.

नुकसान की संभावना पर शोर?
बताया जा रहा है कि यह यान फिर से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने वाला है और इसका मलबा कहीं गिर कर नुकसान पहुंचा सकता है. नासा का कहना है कि वह स्थिति पर नजर रखे हुए है, लेकिन यह नहीं बता सकता है कि मलबा कहां और कब तक गिरेगा. वहीं ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि रॉकेट का अनियंत्रित होना और यह कि वह नुकासानदेह हो सकता है केवल पश्चिम की हायतौबा है.

क्या होता है रॉकेट के मलबों का

आमतौर पर ज्यादातर रॉकेट के मलबा पृथ्वी के वायुमंडल के पुनःप्रवेश पर जल जाता है और धरती पर उसका बहुत ही छोटा हिस्सा पहुंचता है. इस बात का उल्लेख ग्लोबल टाइम्स ने भी किया है. लेकिन लॉन्गमार्च बी5 एक बहुत बड़ा रॉकेट है इसलिए यह संभावना जताई गई कि उसका बड़ा हिस्सा गिर कर नुकसान पहुंचा सकता है. वायुमंडल में यह प्रवेश 8 मई को होने की उम्मीद है. नासा सुरक्षा के लिहाज से कोई कसर नहीं छोड़ रहा है तो चीन भी पीछे नहीं है.



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इस रॉकेट के 8 मई को पृथ्वी (Earth) के वायुमंडल में प्रवेश करने की संभावना है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

चीन की भी है तैयारी

वहीं चीन भी अपने इस गिरते यान पर नजरें जमाए हुए है. अगर अंतरराष्ट्रीय पानी में गिरने वाली जगह पर कोई जहाज हुआ तो इससे बचने के लिए जरूरी कदम उठाएगा. चीन का कहना है कि लॉन्गमार्च 5बी का ईंधन पर्यावरण के लिए नुकसानदेह नहीं है और महासागरों को प्रदूषित नहीं करेगा.

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लेकिन चीन को कितना बड़ा झटका

लेकिन इस संभावित नुकसान से भी ज्यादा बड़ा सवाल है कि इस घटना से चीन को कितना बड़ा झटका लगा है और इससे उसके स्पेस स्टेशन के कार्यक्रम पर क्या और कितना असर होगा. बेशक यह चीन के लिए एक नुकसान तो है ही, लेकिन अगर यह माना जाए कि चीन अपने कार्यक्रम से पीछे हट जाएगा यह सरासर गलत होगा. चीन इस अभियानकी तैयारी 1992 से कर रहा है और इतिहास गवाह है कि ऐसे अंतरिक्ष अभियानों की संख्या कम नहीं है जो पहली बार असफल हुए हों और बाद में सफल.

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चीन (China) की योजना साल 2022 तक अपने स्पेस स्टेशन स्थापित करना है. प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

किसी पर निर्भर नहीं है चीन

इससे भी बड़ी बात यह है कि चीन का यह पूरी तरह से स्वदेशी कार्यक्रम था. वैसे तो उसने इसमें कई देशों की भागीदारी हासिल की है, लेकिन स्पेस स्टेशन के निर्माण का पूरा काम उसने अपने ही हाथों में ले रखा है. ऐसे में उसे अपने कार्यक्रम में बदालव करने में किसी और पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है.

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चीन अपने इस कार्यक्रम को ज्यादा टालने से परहेज करेगा इसकी पूरी उम्मीद है. वह इसे जल्द पूरा कर अंतरिक्ष में रूस और अमेरिका के और नजदीक आने के प्रयास में है. लॉन्ग मार्च सीरीज के रॉकेट पहले भी असफल हो चुके हैं लेकिन चीन उनमें सफल भी हुआ है चीन इस बार की खामी से उबर सके यह नामुमकिन बिलुकल नहीं माना जा सकता है.

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