अंतरिक्ष में भी अब चीन हो जाएगा बड़ी ताकत, जानें कैसे

चीन का ये स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में स्‍थापित होते ही चीन यहां भी सुपर पावर बन जाएगा. इसके आगे अमेरिका और रूस भी नहीं टिक पाएंगे.

News18Hindi
Updated: April 28, 2019, 8:57 PM IST
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Updated: April 28, 2019, 8:57 PM IST
धरती, आकाश और समुद्र के बाद अब चीन की नजर अतंरिक्ष एक ताकतवर उपस्थिति दर्ज कराने पर है. अंतरिक्ष में सुपर-पावर बनने के उद्देश्य से इसी सप्ताह 23 अप्रैल को चीनी अंतरिक्ष स्टेशन के बारे में एक वीडियो जारी किया गया.

हालिया जानकारी के अनुसार साल 2022 तक चीन अंतरिक्ष में अपना अंतरिक्ष स्टेशन "थिएन-कूंग" को स्थापित कर देगा. इसके बारे में बताया जा रहा है कि यह काफी लंबे समय तक अंतरिक्ष से ऐसी-ऐसी जानकारियां चीन तक पहुंचाता रहेगा, जिसके सामने कोई और नहीं टिक पाएगा.



चीन इसकी तैयारी काफी समय से कर रहा था. चीन ने बहुत चतुराई से रूस, जर्मनी, फ्रांस, इटली, संयुक्त राष्ट्र अंतरिक्ष विभाग, यूरोपीय अंतरिक्ष ब्यूरो के साथ अंतरिक्ष में अपना स्टेशन स्थापित कराने को लेकर समझौतों पर हस्ताक्षर करा लिए हैं.

साल 2018 में ही चीनी समानव अंतरिक्ष कार्यालय को लेकर वैज्ञानिक परीक्षण की घोषणा कर दी थी. इसके बाद चीन ने 27 देशों की ओर से कुल 42 प्रस्ताव पत्र हासिल कर चुका है. यह चीन की एक बड़ी जीत है जो अंतरिक्ष में अमेरिका और रूस को पीछे छोड़ सकता है. अंतरिक्ष स्टेशन स्‍थापित होने के बाद भारत तो चीन के सामने खड़े भी नहीं हो पाएगा.

क्या-क्या करेगा चीन का अंतरिक्ष स्टेशन
चीन की ओर से जारी की जानकारियों के अनुसार यह स्पेस स्टेशन चीन उपकरण विकास, अंतरिक्ष अनुप्रयोग, अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण, संयुक्त उड़ान और अंतरिक्ष चिकित्सा तक पर काम करेगा.


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इस परियोजना के प्रमुख डिजाइनर चाओ चैन पींग ने बताया कि इस स्टेशन से बड़े पैमाने पर अलग-अलग विषयों में अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सत्यापन और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

चाओ के बयान के अनुसार, इस अंतरिक्ष स्टेशन में चिकित्सा, अंतरिक्ष जीव विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण, अंतरिक्ष सामग्री, अंतरिक्ष नई तकनीक पर कई स्तर के परीक्षण किए जाएंगे.

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साथ ही इस अंतरिक्ष स्टेशन से चीन खगोलीय अवलोकन, पृथ्वी अवलोकन, अंतरिक्ष सामग्री विज्ञान पर भी काम करेगा. अगर इन विषयों की गहराई में जाने तो पता चलेगा कि इस अंतरिक्ष स्टेशन के बाद चीन अंतरिक्ष में इस स्तर पर काम करने वाला एकमात्र देश हो जाएगा. इससे पहले रूस और अमेरिका ने संयुक्त प्रयास से एक स्टेशन स्‍थापित किया है. लेकिन वह भी इतना उन्नत नहीं है.

भारत के पास मिलिट्री सेटेलाइट
भारत के पास कुल सात मिलिट्री सेटेलाइट है. इनमें GSAT 7A, GSAT 7 व माइक्रोसैट-आर (Microsat-R) सबसे नवीनतम हैं और आसमान से भारतीय सेना के लिए कई तरह की जानकारियां भेजती हैं.



भारतीय वायुसेना अतंरिक्ष में प्रभावशाली ऑपरेशन को अंजाम दे सकती हैं, बिना किसी को खबर लगे योजनाबद्ध तरीके से हमला कर सकती हैं. यह बात अब किसी से छिपी नहीं है. पर इसमें एक बेहद अहम भूमिका भारतीय अंतरिक्ष शोध संस्‍थान (ISRO) की रही है है. ISRO पाकिस्तान के करीब 87 फीसदी इलाकों के चप्पे-चप्पे की हाई-डेफिनेशन (HD) क्वालिटी की तस्वीरें व विजुअल इंडियन एयरफोर्स को मुहैय्या कर रहा है.

चीन के पास मिलिट्री सेटेलाइट
चीन ने कुल 68 मिलिट्री सेटेलाइट हैं. इनमें 36 मिलिट्री सेटेलाइट याओगन सिरीज अंतरिक्ष में भेजे हुए हैं. चीन की याओगन सिरीज की सेटेलाइट ही उनकी प्रमुख मिलिट्री के लिए अंतरिक्ष से सुरक्षा करती हैं. चीन इसी सिरीज की अब कुल 36 सेटेलाइट अंत‌रिक्ष में भेजी हैं. इसमें सबसे आधुनिक और नीवनतम याओगन 32A, 32B सेटेलाइट है. इसे चीन ने 9 अक्टूबर, 2018 को भेजी थी. इसके अलावा चीन ने एफएसडब्‍ल्यू सिरीज, बीडी सिरीज, एसटी सिरीज की सेटेलाइट भेज रखी है.

चीन की ओर से अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले सेटाइलटों के प्रमु ख नौ प्रकार हैं. चीन ने संचार, तेजी से चेतावनी, अंतरिक्ष विज्ञान, नेविगेशन, समुद्रों की पड़ताल, जांच-पड़ताल और ऑप्टिकल, रडार आदि के लिए हैं. कुछ और सेटेलाइट जिनकी पहचान नहीं हो पाई है.

हालांकि इसके अलावा भारत के किसी पड़ोसी देश के पास मिलिट्री सेटेलाइट नहीं है. बांग्लादेश, भुटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार ये सभी देश यह सुविधा जरूरत पड़ने से अपने मित्र देशों की सेटेलाइट से सुविधाएं मांगते हैं. लेकिन बात पश्चिमी देशों की करें तो वे भारत से इस मामले में काफी आगे हैं.

यूं तो विश्वपटल पर अपने देश के मिलिट्री के लिए अंतरिक्ष में सेटेलाइट भेजने के मामले में भारत छठे स्‍थान पर है. लेकिन पहले स्‍थान पर काबिल यूनाइटेड स्टेट (कुल 123 मिल‌िट्री सेटेलाइट) के सामने भारत (7 मिल‌िट्री सेटेलाइट) अभी काफी पीछे है. एक नजर विश्व के उन प्रमुख देशों की जिन्होंने अपनी मिल‌िट्री के लिए सेटेलाइट पर काम कर रहे हैं.

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