चीन बना रहा संसार की सबसे तेज ट्रेन, एक घंटे में पहुंचा सकती है दिल्ली से लखनऊ

चीन बना रहा संसार की सबसे तेज ट्रेन, एक घंटे में पहुंचा सकती है दिल्ली से लखनऊ
इस हाई स्पीड मैग्लेव ट्रेन की अधिकतम गति 600 किमी प्रति घंटा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

चीन (China) में हाल ही में 600 किमी प्रति घंटे से गति से दौड़ने वाली ट्रेन (High speed Train) का सफल परीक्षण किया है.

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नई दिल्ली: इस समय दुनिया भर की निगाहें चीन (China) पर हैं. इस साल की शुरुआत में कोरोना वायरस (Corona virus) के प्रसार की शुरुआत के चर्चा में रहा चीन हाल ही में भारत के सीमा पर विवादास्पद झड़प के कारण से तो चर्चा में रहा है, लेकिन वह अपने तकनीकी विकास कार्यक्रमों तेजी के कारण भी चर्चा में है.  इस बार वह बहुत ही तेज गति से चलने वाली ट्रेन (High speed train) के  परीक्षण की वजह से चर्चा में है. यह ट्रेन दुनिया की सबसे तेज ट्रेन मानी जा रही है और यह दिल्ली से लखनऊ के बीच की दूरी एक घंटे  से भी कम के समय में तय कर सकती है.

हवाई यात्रियों को धरती पर तेज गति का यातायात
चीन के इस परीक्षण को देख कर कई लोगों का मानना है कि वह अपने हवाई यात्रियों की धरती पर लाने की तैयारी कर रहा है.  उसने रविवार को शंघाई में टोंगजी यूनिवर्सिटी पर मैगलेव रेलवे लाइन पर एक हाई स्पीड मैगलेव टेस्ट व्हीकल की सफलतापूर्वक परीक्षण किया जिसकी 600 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड के लिए डिजाइन किया गया है.

यह अंतर कम करने की तैयारी
फिलहाल चीन में बुलेट ट्रेनों की अधिकतम गति 300 किलोमीटर प्रति घंटा है. जबकि हवाई यात्री जहाजों की अधिकतम गति 800 किलोमीटर प्रतिघंटा है.  शोधकर्ताओं को विश्वास है कि यह मैगलेव ट्रेन इस अंतर को और ज्यादा पाटने में मददगार होगी.



क्या हुआ था टेस्ट में
रविवार को शंघाई में हुए टेस्ट में 1.5 किलोमीटर लंबे मैगलेव टेस्ट ट्रैक पर इस ट्रेन के प्रोटोटाइप की पहला डायनामक ऑपरेशन ट्रायल किया गया. हालांकि इस ट्रेन को 600 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से नहीं चलाया गया और उसकी गति काफी कम रही, यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे ट्रायल से बड़े और खास आंकड़े मिलेंगे जो मैगलेव सिस्टम के विकास में योगदान देंगे. इस शोध के प्रमुख डियांग सानसन का कहना है कि इस बहु स्थिति जांच के दौरान, व्हीकल ने स्थिर सस्पेंशन गाइडेंस और मजबूत ऑपरेशन स्थिति का प्रदर्शन किया. सभी डिजाइन की आवश्यकताओं और अपेक्षा के तकनीक पहलुओं का हासिल कर लिया गया.

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इस ट्रेन से बीजिंग शंघाई तक का 1200 किमी का सफर साढ़े तीन घंटे में पूरा हो सकेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


तो अब क्या
चीन के रेलवे रोलिंग स्टॉक कॉर्पोरेशन (CRRC) को उम्मीद है कि साल 2020 के अंत तक पांच हाई स्पीड मैगलेव व्हीकल का उत्पादन हो चुका होगा. इसके अलावा तब तक इसके लिए पूरा इंजीनियरिंग सिस्टम भी तैयार हो चुका होगा. यानि कि तब तक चीन इसकी पूरी तकनीकी और इंजीनियरिंग  क्षमता में विशेषज्ञता हासिल कर चुका होगा.

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यह है लक्ष्य
अब इस दिशा में अगला कदम तकनीक का औद्योगिकरण है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि उससे पहले तमाम तरह के टेस्ट किए जाने होंगे जिसमें सालों का समय लग सकता है. उसी के बाद इसका व्यवसायिक उपयोग संभव है. चीन का लक्ष्य है कि साल 2025 तक वह 500 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों का व्यवासायिक तौर पर उपयोग शुरू कर दे.

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चीन साल 2025 तक 500 किमी प्रति घंटा की रफ्तार वाली ट्रेने शुरु करने की तैयारी में है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


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14 साल पहले दिया गया था प्रस्ताव
इस प्रोजेक्ट को सबसे पहले साल 2006 में प्रस्तावित किया गया था. इससे होंगझोऊ शहर से शंघाई तक की दूरी केवल 20 मिनट में ही तय हो जाएगी. इस प्रोजेक्ट को आर्थिक और पर्यावरण  के कारणों से कई बार टाला जा चुका है.

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क्या फायदा होगा इस प्रोजेक्ट से
चीन में 600 किमी प्रति घंटा की हाई  स्पीड मैगलेव ट्रांसपोर्ट सिस्टम को 2016 में शुरू किया गया था. यह चीन के विज्ञान और प्रोद्यौगिकी मंत्रालय के एडवांस रेल ट्रांजिट प्रोग्राम का एक प्रमुख प्रोजक्ट है. हाई स्पीड मैगलेव ट्रेन की खासियत बहुत तेज गति, सुरक्षा, विश्वसनीयता, विशाल यात्री क्षमता, समय कार्यनिष्पादन, पर्वायवरण सुरक्षा, न्यूनतम देखरख खर्च है. इसका लक्ष्य जेट विमान यात्रियों को जमीन पर 1500 किमी की दूरी से ज्यादा के लिए तेज वाहन संसाधन देना है जिसमें बीजिंग शंगाई की 1200 किमी की दूरी शामिल है. अगर इसमें तैयारी का समय शामिल कर लिया जाए तो विमान से यह दूरी साढ़े चार घंटे, तेज ट्रेन से साढ़े पांच घंटे, और मैगलेव से यह दूरी साढ़े तीन घंटे में तय हो जाएगी.
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