म्यांमार का वो टेरर ग्रुप, जिसे भारत में आतंक फैलाने के लिए चीन दे रहा है हथियार और ट्रेनिंग

चीन म्यांमार के आतंकी समूह अराकान आर्मी की आर्थिक मदद कर रहा है (सांकेतिक फोटो)

अब चीन की एक और करतूत सामने आई है. वो भारत को कमजोर करने के लिए म्यांमार के एक आतंकी समूह अराकान आर्मी (China supports terror group Arakan Army in Myanmar) को हथियार और लगभग 95 प्रतिशत खर्च देता है.

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    कोरोना वायरस (coronavirus) मामले में चीन की लापरवाही से परेशान दुनिया के सामने चीन का नकाब लगातार उतरता दिख रहा है. भारत के मामले में चीन खासतौर पर आक्रामक रहा. उसने लद्दाख सीमा पर अपनी दावेदारी जताने की कोशिश की. इसी के साथ-साथ कूटनीतिक तौर पर चीन भारत के उन सारे पड़ोसियों को उकसाने की कोशिश में दिख रहा है, जिनसे देश के अच्छे संबंध रहे. पाकिस्तान के साथ चीन की मिलीभगत पहले से ही सामने आती रही है. अब नई चीज सामने आई है. चीन म्यांमार के आतंकी समूह अराकान आर्मी की आर्थिक मदद कर रहा है. चीन का एजेंडा है कि टेरर ग्रुप के जरिए वो म्यांमार के साथ भारत के हालात भी खराब कर सकेगा.

    क्या है पूरा मामला
    रूस के सरकारी चैनल Zvezda में एक इंटरव्यू के दौरान म्यांमार के सेना प्रमुख जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने कहा कि उनके देश में जो आतंकी समूह हैं, उनके साथ मजबूत ताकतें काम कर रही हैं. इस ताकत का मतलब चीन से जोड़ा जा रहा है. जनरल ने आतंक के खात्मे के लिए इंटरनेशनल मदद भी मांगी. सेना प्रमुख मुख्य तौर पर देश में अराकान आर्मी (एए) का जिक्र कर रहे थे.

    चीन का एजेंडा है कि टेरर ग्रुप के जरिए वो म्यांमार के साथ भारत के हालात भी खराब कर सकेगा- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


    क्या है चीन का इरादा
    चीन के म्यांमार में आतंक मचाने के पीछे ये वजह है कि वो देश में अपने कई प्रोजेक्ट्स की मंजूरी चाहता है. फिलहाल ऐसा मुमकिन नहीं दिख रहा इसलिए वो अराकान आर्मी की मदद से सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. दूसरी ओर भारत से दुश्मनी भी चीन के इस काम के पीछे काम कर रही है. भारत-म्यांमार संबंध राजनैतिक और व्यापारिक दृष्टि से मजबूत रहे हैं. दोनों एक साथ 1640 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं.

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    साल 2017 में भारत को म्यांमार में सड़क बनाने का 220 मिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट मिला. इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत भारत-म्यांमार के साथ थाइलैंड भी इंटरनेशनल राजमार्ग पर काम कर रहा है ताकि तीनों देशों में कारोबार और पर्यटन जैसी चीजें आसान हो सकें. वहीं म्यांमार ने चीन की वन बेल्ट- वन रोड परियोजना का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया. इन सारी वजहों से भड़के चीन ने अराकान आर्मी पर पैसे लगाने शुरू किए.

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    कैसे काम कर रही है अराकान आर्मी
    ये आतंकी संगठन म्यांमार के चीन से सटे हुए हिस्से राखिन स्टेट में काम कर रहा है. अप्रैल 2009 में बना ये ग्रुप देश का सबसे बड़ा सशस्त्र आतंकी समूह माना जाता है. इसे खुद देश की एंटी-टेररिज्म कमेटी ने देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. ये संगठन रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए सशस्त्र संघर्ष कर रहा है और इसके अधिकतर सदस्य बांग्लादेश से आए अवैध शरणार्थी हैं. संगठन पुलिस, सेना के अलावा आम लोगों पर भी लगातार हमले करने के लिए कुख्यात रहा है. हालांकि आतंकी संगठन का कहना है कि उसने आम लोगों पर हमला नहीं किया और वो सिर्फ बौद्ध बहुमत के दमन के खिलाफ हथियार उठाता है.

    चीन म्यांमार को राजनैतिक और कूटनीतिक तौर पर कमजोर रखना चाहता है


    इस तरह दे रहा चीन मदद
    इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के मुताबिक अराकान आर्मी एक चरमपंथी संगठन है, जिसके नेता विदेशों और खासकर चीन में हथियार चलाने, लोगों को अपने साथ मिलाने और प्लानिंग की ट्रेनिंग लेते हैं. खुद म्यांमार के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल जॉ मिन टुन के अनुसार साल 2019 से ये आतंकी चीन में बने हथियारों से लगातार म्यांमार आर्मी पर हमले कर रहे हैं. उसी साल एक छापे के दौरान आतंकियों के पास से लगभग 90 हजार डॉलर की कीमत के हथियार मिले, जो मेन इन चाइना थे. माना जाता रहा है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और पीपल्स लिबरेशन आर्मी के अराकान आर्मी से काफी गहरे संबंध हैं. चीन से लगातार हथियारों, पैसों की सप्लाई के अलावा हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी इन्हें दी जाती है.

    इसके साथ ही चीन म्यांमार को राजनैतिक और कूटनीतिक तौर पर कमजोर रखना चाहता है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एक स्त्रोत ने कहा कि केवल अराकान आर्मी ही नहीं, चीन म्यांमार में आतंक फैलाने के लिए कई समूहों को आर्थिक और हथियारों की मदद दे रहा है. उसका एजेंडा है कि इससे देश अपनी ही लड़ाई में फंसा रहे और दूसरे देशों और खासकर भारत और विकसित पश्चिमी देशों से उसके संबंध मजबूत न हों सकें.

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