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china to install first solar power plant in space by 2028 viks

क्या बदलाव ला सकता है अंतरिक्ष में स्थापित होने वाला चीन का सौर ऊर्जा संयंत्र

यह पहली बार होगा जब अंतरिक्ष में कोई सूर्य (Sun) की रोशनी के लिए  ऊर्जा संयंत्र लगेगा.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

यह पहली बार होगा जब अंतरिक्ष में कोई सूर्य (Sun) की रोशनी के लिए ऊर्जा संयंत्र लगेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

चीन (China) ने ऐलान किया है कि वह अंतरिक्ष में सौर ऊर्जा संयंत्र (Solar Power Plant) लगाने अपनी महत्वाकांक्षी को साल 2028 में प्रक्षेपित कर पूरा कर लेगा. इस सौर ऊर्जा संयंत्र का लक्ष्य सौर ऊर्जा को पहले बिजली में बदलना और फिर उसके बाद माइक्रोवेव (Microwave) में बदल कर उसे बिना किसी तार की मदद के सीधे पृथ्वी तक पहुंचाना है. इस ऊर्जा का उपयोग सैटेलाइट को आउनकी कक्षा में पहुंचाने के लिए भी किया जाएगा.

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    अंतरिक्ष के क्षेत्र (Space Sector) में चीन (China) तेजी से आगे बढ़ते हुए एक के बाद एक सफलताएं हासिल कर रहा है. पहले मंगल पर पहले ही अभियान से एक साथ ऑर्बिटर, रोवर और लैंडर भेजने के बाद उसने चंद्रमा से भी मिट्टी के नमूने पृथ्वी पर सफलतापूर्वक लाने का काम किया. अब उसने कई सालों से बन रही अंतरिक्ष में सौर ऊर्जा संयंत्र (Solar Power Plant) स्थापित करने की योजना पर काम करना शुरू कर दिया है और साल 2028 तक उसे पूरी तरह से सक्रिय भी करने का ऐलान कर दिया है. अगर चीन ने यह कर दिया तो वह ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश होगा.

    छह साल में शुरू कर देगा काम
    अगर अंतरिक्ष पर आधारित सौर ऊर्जा की यह परियोजना सफल रही तो उसके बाद लोगों को छतों पर सौर पैनल लगाने की जरूरत  नहीं होगी. इसके बाद ऊर्जा संयत्रों पर दबाव बहुत ही कम हो जाएगा और पवन टरबाइन से भी यह विकल्प बेहतर हो जाएगा. इस परियोजना के शुरुआती चरणों पर काम शुरू हो चुका है और चीन की स्पेस एजेंसी इसे पूर्वनिर्धारित तिथि से दो साल पहले साल 2028 में प्रक्षेपित कर देगी.

    सौर ऊर्जा से बिजली और फिर माइक्रोवेव
    इस सौर अंतरिक्ष स्टेशन का लक्ष्य सौर ऊर्जा का बिजली में बदलकर माइक्रोवेव में बदलना है. इन माइक्रोवेव का उपयोग सैटेलाइट को कक्षाओं में पहुंचाने में हो सकता है और इसके बाद बेतार वाले ऊर्जा संचारण के जरिए एक निश्चित दिशा में निर्देशित की गई  ऊर्जा बीम के जरिए धरती पर पूर्व निर्धारित जगहों पर भेजा जा सकेगा.

    प्राथमिक चरणों का सफल परीक्षण
    चीन की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार यह अध्ययन जिडियान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया था. इस सौर स्टेशन की खास बात यह होगी कि वह सौर ऊर्जा को पृथ्वी तक पहुंचने में सक्षम होगा  और तो और इसका प्राथमिक चरणों के परीक्षण पहले ही सफल हो चुका हैं. यह स्टेशन तकनीकी का एक हॉटस्पॉट साबित होगा जिसका उपयोग भावी अभियान अंतरिक्ष में ऊर्जा उत्पादन के लिए करेंगे.

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    चीन (China) ने हाल के कुछ सालों में अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ाए हैं.
    (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    एक बड़ी योजना का हिस्सा
    इस पॉवर प्लांट की क्षमता 10 किलोवाट है. इसी तरह का संयंत्र जिडियान यूनिवर्सिटी में वहां के छात्रों और शोधकर्ताओं ने भी बनायाहै. 75 मीटर की ऊंची संरचना में पांच उपतंत्र बनाए गए हैं जो सौर ऊर्जा के पैनलों की शृंखला की प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करेंगे.  यह परियोजना ओर्बशेप मेम्बरेन एनर्जदी गैदरिंग ऐरे यानि ओमेगा (OMEGA) का हिस्सा है. ओमेगा अंतरिक्ष में सौरऊर्जा पैदा करने की योजना है जो साल 2014 में लोगों के सामने लाई गई थी.

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    क्या होगा सौर ऊर्जा का
    भूस्थिर कक्षा में खुद को सफलतापूर्वक स्थापित करने के बाद ओमेगा का मुख्य लक्ष्य सौर ऊर्जा को जमा करना होगा. इसके बाद इसे विद्युत ऊर्जा में बदला जाएगा, और अंतिम चरण के रूप में ऊर्जा को पृथ्वी पर भेजा जाएगा. चॉन्गक्विंग के बिशान क्षेत्र में 33 एकड़ की टेस्टिं फेसिलिटी बनाई जा रही है जहां अंतरिक्ष आने वाली ऊर्जा प्राप्त की जाएगी.

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    चीन (China) इस समय दुनिया का सबसे बड़ा कार्बनडाइऑक्साइड उत्सर्जनकर्ता देश है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    इस बात का भी होगा अध्ययन
    चॉन्गक्विंग कोलैबोरेटिव इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर सिविल मिलिट्री इंटीग्रेशन के डिप्टी हेड झी जेंगजिन ने बताया, “इस जगह पर यह शोध किया जाएगा कि कैसे जीवित प्राणी माइक्रोवेव विकिरण से प्रभावित होता है जो अंतरिक्ष से पृथ्वी पर ऊर्जा के रूप में आएगा. इसके साथ ही अंतरिक्ष प्रसारण तकनीक पर भी यहा काम किया जाएगा.”

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    वैसे तो इस परियोजना में कई चुनौतियां हैं जिसमें लागत एक बड़ी चुनौती है, लेकिन फिर भी भविष्य मे जिस तरह से ऊर्जा की मांग बढ़ रही है और दुनिया के देशों पर जीवाश्म ऊर्जा का उपयोग छोड़ने का दबाव बढ़ रहा है यह तकनीक एक गेमचेंजर साबित हो सकती है क्योंकि चीन पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जक देश है और साल 2050 तक दुनिया की ऊर्जा की मांग दोगुनी होने की उम्मीद है.

    Tags: China, Research, Science, Space, World

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