चीन का नया पैंतरा: हांगकांग के स्कूल-कॉलेजों में मिलगी वफादारी की ट्रेनिंग

चीन का नया पैंतरा: हांगकांग के स्कूल-कॉलेजों में मिलगी वफादारी की ट्रेनिंग
अब हांगकांग के लोगों को चीन देशभक्ति की ट्रेनिंग देने जा रहा है

चीन की सरकार (Communist party of China) का मानना है कि हांगकांग (Hong Kong) के युवाओं को कभी देशभक्ति की सीख (patriotic education) नहीं मिली इसलिए उन्होंने चीन (China) के खिलाफ विद्रोह किया.

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कोरोना के मामले में चीन पहले से ही लापरवाही के आरोपों से घिरा हुआ है. इसके बाद भी उसका आक्रामक रवैया कम नहीं हुआ. भारत के लद्दाख में घुसपैठ की कोशिश के बाद अब वो साउथ-चाइना सी के 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से को अपना कह रहा है. इसी बीच हांगकांग में विवादित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू हो चुका है. अब चीन हांगकांग की बगावत को रोकने के लिए एक नया ही तरीका अपना रहा है. सूचना के मुताबिक अब वहां के लोगों को चीन देशभक्ति की ट्रेनिंग देगा. इसे नेशनल सिक्योरिटी एजुकेशन (national security education) कहा जा रहा है.

देशप्रेम का सबक
शेनजेन में अब हांगकांग के युवाओं को एक नया सबक सीखना होगा, जो चीन से मिलेगा. यहां वे देश की सुरक्षा के नाम पर देशप्रेम सीखेंगे, यानी कुल मिलाकर चीन से विद्रोह न करने की सीख लेंगे. चीन के सरकारी मीडिया शिन्हुआ समाचार एजेंसी में इस हवाले से खबर आई है. सिर्फ हांगकांग ही नहीं, बल्कि मकाऊ के लोग भी खुद को चीन का हिस्सा मानने का पाठ सीखेंगे. बता दें कि मकाऊ को भी चीन अपना हिस्सा मानता है. ये चीन का विशेष प्रशासनिक क्षेत्र माना जाता है, जिसे एक समझौते के तहत साल 1999 में पुर्तगाल ने चीन को सौंपा था.

चीन के किंडरगार्टन से लेकर यूनिवर्सिटी तक में देशभक्ति के प्ले होते हैं- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

क्यों पड़ रही जरूरत


असल में चीन हांगकांग में सुरक्षा कानून लाहू करने के दौरान हुए विरोध-प्रदर्शन से डरा हुआ है. उसे डर है कि इस वक्त, जबकि बहुत से देश उसके खिलाफ हैं और अपना व्यापार वहां से समेत रहे हैं, ऐसे में हांगकांग के लोगों पर सीधे दमन से काम नहीं चलेगा. जैसा उसने साल 1989 के अप्रैल में थियानमेन चौक में किया था. तब वहां लोकतंत्र के समर्थन में काफी बड़ा आंदोलन हुआ था. उसे रोकने में नाकाम चीनी सरकार ने आंदोलन कर रहे युवाओं पर मार्शल लॉ लगा दिया. इसके तहत आंदोलनकारियों पर गोलियों की बौछार करवा दी गई, जिसमें 10 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी मारे गए थे.

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क्या हैं सबक के मायने
अब चूंकि हांगकांग में सीधे कुचलने के काम नहीं बनेगा, लिहाजा वहां चीन नया पैतरा आजमा रहा है. चीन का मानना है कि अगर हांगकांग के लोगों को देश की सुरक्षा का पाठ पढ़ाया जाए तो उनका गुस्सा और बागी तेवर खत्म हो जाएगा और वे चीन से प्यार करना सीख सकेंगे. खासकर थियानमेन चौक की घटना के बाद से चीन में युवाओं को देश की सुरक्षा के सबक मिलने शुरू हुए. शी जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद से ही कम्युनिस्ट पार्टी का इस तरह के एजुकेशन पर जोर और बढ़ा. वॉशिंगटन पोस्ट की एक खबर के मुताबिक चीन की सरकार को लगता है कि दशकों तक चले एजुकेशन के कारण अब जाकर देश के लिए वफादार पीढ़ी तैयार हुई है.

खुद पेरेंट्स मानते हैं कि बच्चे अगर देशप्रेम सीखेंगे तो ही वे अपने पेरेंट्स से भी प्यार कर सकेंगे-सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


किस तरह से सिखाते हैं देशप्रेम
चीन के किंडरगार्टन से लेकर यूनिवर्सिटी तक में इस तरह के नाटक और प्रोग्राम करवाए जाते हैं जो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना और माओ जेडांग के गुण गाएं. साल के तीन हफ्तों तक हर जगह देशभक्ति के ही प्रोग्राम होते हैं. ये शी जिनपिंग के निर्देश पर चला कार्यक्रम है, जिसका मकसद देश के लिए वफादार पीढ़ियां तैयार करना है. ये हर स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई का अनिवार्य हिस्सा है.

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स्कूल और कॉलेजों में भी
वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक खुद पेरेंट्स मानते हैं कि बच्चे अगर देशप्रेम सीखेंगे तो ही वे अपने पेरेंट्स से भी प्यार कर सकेंगे. इसके लिए 5 साल की उम्र में ही बच्चों से एक प्ले करवाया जाता है- My Country Is a Garden. इस तरह के कई नाटक होते हैं. साथ ही बच्चों को उन जगहों का टूर करवाया जाता है, जहां जाकर उनमें देशभक्ति जागे. हाई स्कूल में किताबों में ही चीन का दर्शन सिखाए जाने की अनिवार्यता हो चुकी है. सरकार रिसर्च इंस्टीट्यूट को फंड करती है ताकि वे सोशलिज्म का सबक सिखा सकें. 30 यूनिवर्सिटीज में ये प्रोग्राम पूरे जोरों पर है.

अब patriotic education प्रोग्राम हांगकांग और मकाऊ में भी शुरू होने जा रहा है


अब patriotic education प्रोग्राम हांगकांग और मकाऊ में भी शुरू होने जा रहा है. इस बारे पार्टी के अधिकारी शेन चु्न्याओ ने कहा कि युवाओं और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए ये जरूरी होगा. इसके तहत ये भी सिखाया जाएगा कि कैसे पश्चिमी देशों और खासकर अमेरिका ने चीन को हमेशा परेशान किया और आगे बढ़ने से रोका. इसके लिए ऐतिहासिक उदाहरणों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है और उन्हें नाटकों, गीतों के माध्यम से सिखाया जाता है.

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अब हांगकांग में भी पढ़ाई का यही सिस्टम लागू किया जाएगा. चीनी सरकार को यकीन है कि हांगकांग के लोगों को अगर सिखाया जाए कि चीनी पहचान उनके लिए ज्यादा फायदेमंद है तो वे सीख सकेंगे. साथ ही ये भी माना जा रहा है कि चूंकि हांगकांग के युवाओं को कभी देशभक्ति की सीख नहीं मिली इसलिए उन्होंने चीन के खिलाफ विद्रोह किया.
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