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चीन की महिलाएं क्यों कर रही हैं अपने खून की तस्करी

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: October 14, 2019, 10:08 PM IST
चीन की महिलाएं क्यों कर रही हैं अपने खून की तस्करी
चीन से रोज बड़े पैमाने पर हो रही है चीनी महिलाओं के खून की तस्करी

चीन (China) में रोज हजारों महिलाएं अपना खून चुपचाप बाहर भेजती हैं. चीन सरकार चाहकर भी इस पर रोक नहीं लगा पा रही. इसके पीछे कई रैकेट काम कर रहे हैं.

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  • Last Updated: October 14, 2019, 10:08 PM IST
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चीन में महिलाओं के खून की तस्करी का मामला सामने आया है. माना जा रहा है कि पिछले कुछ सालों से चीन की महिलाओं का खून शीशियों में भरकर बाहर ले जाया जा रहा था. हाल में जब कुछ जगहों पर इन्हें बरामद किया गया तो पता लगा कि खून की तस्करी हो रही है. चीन की सरकार इसे रोकने की कोशिश कर रही है लेकिन ये उसके लिए बहुत मुश्किल साबित हो रहा है.

इस काम के लिए एक बड़ा रैकेट चीन में काम कर रहा है. इसकी वजह अगर आप जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे. पिछले दिनों चीन में कई ऐसे मामले पकड़े गए जबकि चीनी महिलाएं अंर्तवस्त्र में छिपाकर खून की शीशियां लेकर जा रही थीं.

हाल ही में एक ऐसी महिला भी गिरफ्तार की गई, जो बैग लेकर जा रही थी. जब वो चीन से हांगकांग के एक एंट्री पाइंट पर चेकिंग से गुजर रही थी तो उसके बैग से खून टपकता हुआ दिखा. जब अधिकारियों ने इसे देखा तो उन्होंने महिला को रोककर उसका बैग चेक किया. पता लगा कि उसके बैग में खून के 200 से ऊपर पाउच रखे हुए थे लेकिन गरमी के कारण खून ने टपकना शुरू कर दिया.



स्कूली बच्ची के बैग में खून के पाउच
इसी तरह चीन से हांगकांग के एक और एंट्री पाइंट पर 12 साल के एक स्कूली लड़की पकड़ी गई. उसके पीठ पर लटका हुआ बैग जांच अधिकारियों को संदिग्ध लगा. जब उन्होंने इसकी जांच की तो उसमें भी सौ से ऊपर ब्लड के पाउच थे. ये सारे ब्लड पाउच चीनी महिलाओं के ही थे.

चीन से हांगकांग में जाना-आना सामान्य है. रोजाना हजारों चीनी हांगकांग से चीन मेनलैंड में आते जाते हैं. इसमें पढ़ने वाले बच्चों की भी ठीक-ठाक संख्या होती है.
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चौंकाने वाली वजह
जब चीन के अधिकारियों ने पता लगाना शुरू किया कि आखिर क्या वजह है कि चीन से महिलाओं का खून हांगकांग में स्मगल हो रहा है तो उन्हें चौंकाने वाली जानकारी मिली.
दरअसल, चीन में पिछले कुछ सालों से एक बच्चे की नीति बनी हुई थी. हालांकि 2015 में चीन ने इस पॉलिसी को लचीला कर दिया है. यानि चीन के नागरिक अब दो बच्चे पैदा कर सकते हैं. लेकिन चीन के बहुत से दंपत्ति ऐसे हैं, जो वित्तीय वजहों से दो बच्चे पैदा ही नहीं करना चाहते. वो एक बच्चा ही चाहते हैं. ये बेबी भी वो बेटा चाहते हैं. ऐसे में ये प्रवृत्ति खासी बढ़ रही है कि गर्भ में पल रहे बच्चे के सेक्स की जांच करा ली जाए.

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धडल्ले से चीनी महिलाओं का खून जा रहा है बाहर
यही वजह है कि चीन से पिछले कुछ सालों में धड़ल्ले से महिलाओं का खून शीशियों और पाउच में भरकर हांगकांग और दूसरे देशों में जा रही है. क्योंकि इसके जरिए वो लैब्स में ये पता कर सकते हैं कि उनके पेट में जो बच्चा पल रहा है, वो बेटा है या फिर बेटी.

चीन में हाल में महिलाओं के खून से भरी शीशियां या पाउच बड़ी संख्या में बरामद किये गए हैं


चीन में फल-फूल रहा है रैकेट
चूंकि चीन में लिंग परीक्षण पर पाबंदी है और साथ में कड़ी सजा का प्रावधान भी, लिहाजा चीन में प्रेग्नेंट महिलाओं द्वारा ये पता करना असंभव है कि उनकी बेबी का जेंडर क्या है. इसके जरिए हाल के बरसों में चीन में ऐसा रैकेट फलने फूलने लगा है जो महिलाओं के खून के नमूनों को पड़ोसी देशों में भेजता है और उसके जरिए उन्हें मुश्किल से एक हफ्ते में पता लग जाता है कि उनके पेट में पलने वाले बेबी का जेंडर क्या है.

कितने दिनों बाद होता है ये टेस्ट
आमतौर पर चीन की महिलाएं प्रेग्नेंसी के छह या सातवें हफ्ते में ये टेस्ट कराती हैं. चीन में काम करने वाला ये रैकेट सोशल मीडिया के जरिए जेंडर टेस्ट का ऑफर देता है. चीन में सबसे लोकप्रिय माइक्रो ब्लागिंग साइट वीबो है. इसके जरिए कई इस तरह की एजेंसीज अपने ऑफऱ देती हैं. दिलचस्प बात ये है कि चीनी सरकार के नाक के ठीक नीचे चल रहीं इन एजेंसीज के फॉलोअर्स की संख्या लाखों में है.
कई बार महिलाएं अपने खून को शीशी में भरकर कूरियर या पोस्ट के जरिए भी हांगकांग के लैब्स में भेजती हैं लेकिन वो मामला रिस्की है. लिहाजा लैब्स ने अब उन्हें उस तरह स्वीकार करने से मना कर दिया है. एक बार जेंडर टेस्ट कराने की फीस 500 डॉलर के आसपास बताई जाती है.

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चीन ने खून बाहर ले जाने पर रोक लगाई
चीन ने हाल में इस मामले को रोकने के लिए धरपकड़ भी की लेकिन उसका कोई खास असर पड़ा हुआ तो नहीं दिखता है. चीन में ऐसे मामलों के सामने आने के बाद खून को बाहर ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है लेकिन इसके बाद ये तमाम तरीकों से चोरी-चुपके जारी है. हांगकांग में तो ये काम एक बड़ी अवैध इंडस्ट्री में तब्दील हो चुका है.

चीन में ऐसे मामलों के सामने आने के बाद खून को बाहर ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है लेकिन इसके बाद ये तमाम तरीकों से चोरी-चुपके जारी है


लिंग अनुपात में असंतुलन तेजी से बढ़ा
चीन में आमतौर पर एक बच्चे की नीति जारी रहने और बेटा चाहने की उम्मीद के चलते लिंगानुपात में तेजी से असंतुलन बढ़ा है. वहां की 140 करोड़ से ज्यादा की आबादी में पुरुषों की संख्या महिलाओं से 2017 के आंकड़ों के अनुसार 32 करोड़ ज्यादा हो गई थी. 1970 से 2017 के बीच वहां पर बड़े पैमाने पर गर्भपात के मामले सामने आए. आंकड़े ये भी कहते हैं कि इन गर्भपात के जरिए करीब 1.2 करोड़ लड़कियों की पैदाइश रोकी गई.

आमतौर पर इन एजेंसी के लोग महिलाओं से संपर्क साधकर उनसे उनका ब्लड शीशी और पाउच में लेते हैं,  और फिर इसे महिलाओं या अपने लोगों के जरिए हांगकांग भेज देते हैं. हांगकांग में दर्जनों की संख्या में लैब्स हैं. ये लैब्स डीएनए जांच के आधार पर बता देते हैं कि पैदा होने वाला बेटा होगा या फिर बेटी. इस डीएनए परीक्षण में करीब एक हफ्ते का समय लगता है.

कई बार चीन की महिलाएं ये काम खुद करती हैं और खुद ही चीन से अपने खून के लेकर हांगकांग जाती हैं


रोज हो रहा ये काम
हालांकि हांगकांग में लिंग परीक्षण की जांच वैधानिक नहीं है लेकिन वहां धड़ल्ले से चोरी चुपके इस काम को अंजाम दिया जाता है. इसके बदले मोटी फीस वसूली जाती है. कई बार चीन की महिलाएं ये काम खुद करती हैं और खुद ही चीन से अपने खून के नमूने लेकर हांगकांग जाती हैं और उन्हें वहां देती हैं. बताया जाता है कि चीन से रोज बड़ी संख्या में खून चुपचाप बाहर ले जाने का काम होता है. जो लोग ये काम करते हैं उन्हें 13-14 डॉलर से लेकर 40 डॉलर तक मेहनताना दिया जाता है.

गर्भवती महिलाओं के खून के नमूने लेने का भी धंधा चीन में इस रैकेट से जुड़ा हैं. इसमें खुद नर्स घर आकर खून इंजेक्शन से निकालकर शीशी या पाउच में भर देती है या फिर तय अस्पतालों में ये काम हो जाता है.

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First published: October 14, 2019, 9:50 PM IST
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