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चीनी डॉक्टर कर रहे शोध, क्या पुरुषों की सेक्स लाइफ को भी खराब कर रहा है कोरोना

Vikas Sharma | News18Hindi
Updated: March 29, 2020, 5:47 PM IST
चीनी डॉक्टर कर रहे शोध, क्या पुरुषों की सेक्स लाइफ को भी खराब कर रहा है कोरोना
चीन में वुहान के डॉक्टर कोरोना वायरस के दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं.

चीन में वुहान (Wuhan) क डॉक्टर इस बात पर लंबा शोध करने की तैयारी कर रहे हैं कि कोरोना वायरस (Corona Virus) पुरुषों के प्रजनन तंत्र (Male Reproductive System) कितना बुरा असर डाल रहा है. शुरुआती अध्ययन ने उन्हें इस दिशा में काम करने के संकेत दिए हैं.

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  • Last Updated: March 29, 2020, 5:47 PM IST
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पिछले साल के अंत में चीन के वुहान (Wuhan) शहर में जानलेवा कोरोना वायरस (Corna Virus) फैलना शुरू हुआ था. दुनिया में अब तक छह लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं. दुनिया के कई देशों में इसके चलते लॉकडाउन की स्थिति बन चुकी है. वहीं लंबे समय बाद वुहान शहर धीरे धीरे सामान्य स्थिति में लौटता दिख रहा है. अब चीनी वैज्ञानिक कोरोना वायरस के लोगों पर पड़े लम्बी अवधि वाले प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं इसमें पुरषों सेक्स हारमोन में कमी का अध्ययन प्रमुखता से शामिल है.

क्या शोध करने की है तैयारी
वुहान के डॉक्टर अपने शहर के मरीजों में पुरुष प्रजनन तंत्र (Male Reproductive System) पर दीर्धकालिक प्रभाव का अध्ययन कर रहे हैं. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में प्रकाशित लेख के अनुसार डॉक्टरों को इससे पहले हुए शोध से दिशा मिली है.  इससे पहले छोटे स्तर पर किए गए शोध में पाया गया था कि कोरोना वायरस पुरुषों के सेक्स हारमोन स्तरों पर प्रभाव डाल सकता है.

कोरोना के संक्रमण के बढ़ती संख्या दुनिया में लोगों को चिंता में डाल रही है.
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क्या पाया गया है शुरुआती शोध में


हालांकि यह अध्ययन केवल प्राथमिक ही है और इसकी पूरी तरह से समीक्षा नहीं हुई है, लेकिन  यह कोविड-19 के प्रभावों में को अध्ययन के मामले में अपने तरह का पहला क्लीनिकल अध्ययन है जिसमें इस बात का पता लगाने की कोशिश की गई कि कोरोना वायरस का युवाओं के मेल रिप्रोडेक्टिव सिस्टम पर क्या प्रभाव पड़ा है.

इन मरीजों के लिए गए नमूने
चीन में medRxiv.org में प्रकाशित रिपोर्ट में वुहन यूनिवर्सिटी के जोंगनान हॉस्पिटल और हुबेई रिसर्च सेंटर फॉर पैरेंटल डायग्नोसिस एंड बर्थ हेल्थ के शोधकर्ताओं ने जनवरी में भर्ती होने वाले 20 से 54 साल के कोरोना संक्रमित पुरुषों के खून के नमूने लिए थे.

क्या जांचा गया अध्ययन में
इन पुरुषों की औसत आयु 38 साल थी और उनमें से करीब 90 प्रतिशत में केवल हलके लक्षण थे. नमूने उनके अस्पताल में रहने वाले अंतिम दिनों में लिए गए थे. इन नमूनों में टेस्टेरोन और ल्यूटिनाइजिंग हारमोन का अनुपात निकाला गया.  कम अनुपात का मतलब था कि टेस्टिकल्स सही काम नहीं कर रहे हैं जिसके कारण वे सेक्स हारमोन कम पैदा कर रहे हैं. इस स्थिति को हायपोगोनाडिज्म (hypogonadism) कहते हैं.

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वुहान की इस महिला को हुआ था दुनिया में सबसे पहले कोरोना संक्रमण.


क्या पाया गया
इन मरीजों का औसत अनुपात 0.74 पाया गया जो कि  सामान्य से आधा पाया गया. टेस्टटोरोन पुरुषों में प्रमुख सेक्स हारमोन हैं और वह उनमें सेक्स संबंधित गुणों के विकास में अहम भूमिका निभाता है जिसमें टेस्टेस, मसल्स, बोन मास और शरीर के बाल प्रमुख हैं.  वहीं ल्यूटिनाइजिंग हारमोन पुरुष और महिला दोनों में ही पाया जाता है.

क्या हैं इस समस्या के लक्षण
हायपोगोनाडिज्म के लक्षणों में असामान्य रूप से बड़े स्तन और स्तंभन दोष (erectile dysfunction) जैसी समस्या शामिल हैं. यह लाइलाज नहीं है. शोधपत्र में शोधकर्ताओं कहना है कि इस मामले में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि नतीज निर्णायक नहीं थे और खून के नमूने सेक्स संबंधी समस्याओं के सीधे सबूत नहीं होते है. फिर भी दवाइयां और प्रतिरोधी तंत्र की प्रतिक्रिया की वजह से भी हारमोन में बदलाव हो सकते हैं.

अब क्या है आगे की शोध योजना
शोधकर्ता कह रहे हैं कि वे लंबे अध्ययन की योजना बना रहे हैं. जिसमें वे स्पर्म के नमूने और कोरोना के मरीजों के इंटरव्यू भी ले सकते हैं. पहले के अध्ययनों ने संकेत दिए थे कोरोना वायरस टेस्टिकल्स की प्रोटीन सेल से खुद को जोड़ सकता है. वुहान के तोंग्जी हॉस्पिटल के रिप्रोडक्टिव मेडिसन के प्रोफेसर ली युफेंग ने अपने अध्ययन में आशंका जताई थी कि टेस्टिकल्स कोरोना वायरस आक्रमण के बड़े शिकार हो सकते हैं.

ज्यादातर देशों में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज के लिए एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग दिया जा रहा है
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पहले भी आशंका जताई जा चुकी है
दूसरे अध्ययन भी संदेह जता चुके हैं कोरोना वायरस का पुराना संस्करण सार्स टेस्टिकल्स में जलन पैदा कर सकता है. फिलहाल ये जानकारियां भले ही प्रमाणिक न हों, लेकिन ये शोधों को अहम दिशा जरूर दे रही हैं.

एक शोधकर्ता  का कहना है कि बहुत से वायरस फ्रटिलिटी पर असर डालते हैं, लेकिन हर वायरस महामारी नहीं फैलाता. अगर असर दीर्धकालिक होता है तो यह समस्या हो सकती है.

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First published: March 29, 2020, 1:34 PM IST
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