Home /News /knowledge /

जानें, किस वजह से इस बार मार्केट में हुआ चाइनीज पटाखों का सफाया

जानें, किस वजह से इस बार मार्केट में हुआ चाइनीज पटाखों का सफाया

चीन से पटाखों का आयात पूरी तरह से मना है

चीन से पटाखों का आयात पूरी तरह से मना है

हर साल दिवाली के दौरान देश में लगभग 20 खरब (($242.2 मिलियन) कीमत के पटाखों की बिक्री होती है. इस बिक्री का एक चौथाई हिस्सा चीन से आए पटाखों का रहता है.

    साल 2018 में सरकार ने चाइनीज पटाखों (Chinese Crackers) पर बैन लगा दिया. इस मामले में जारी नोटिस में साफ लिखा है कि चीन से पटाखों का आयात पूरी तरह से मना है. अगर कोई भी चाइनीज पटाखे रखता है, बेचता या किसी भी तरह से इससे डील करता है तो उसे 3 साल की कैद और 5000 रुपयों का जुर्माना हो सकता है. Violation of the Indian Customs Act 1962 के तहत ये नोटिस जारी किया गया है, जो किसी भी आर्टिकल के आयात-निर्यात पर नजर रखता है, जिसमें पटाखे भी शामिल हैं.

    किसलिए लगा है बैन
    चीन से आए पटाखे कम कीमत के तो होते ही हैं, साथ ही इनकी आवाज भी देसी पटाखों से जोरदार होती है. इसमें कई तरह के प्रयोग भी होते रहते हैं. यही वजह है कि देश में चीन से आए पटाखों का बाजार तेजी से फैला. हालांकि इसका दूसरा पक्ष काफी वक्त तक नजरअंदाज किया गया. ये देश के विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 2008 का खुलेआम उल्लंघन करता है.. चीनी पटाखों में खतरनाक केमिकल्स जैसे लेड, कॉपर, ऑक्‍साइड और लीथियम जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल होता है. ये रसायन पर्यावरण के साथ-साथ इंसानी सेहत के लिए भी खराब हैं, इसी के मद्देनजर इन रसायनों के पटाखे या आतिशबाजी में एक स्तर से ज्यादा इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया गया.

    सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद दिवाली पर चाइनीज पटाखों का आयात चोरी-छुपे हो रहा


    जनता की भागीदारी की अपील
    चाइनीज पटाखों में इसकी खुलकर अनदेखी की जाती है. यही वजहें हैं, जिनके चलते भारत में चाइना के पटाखा मार्केट को खत्म करने की पहल की गई. नोटिस में आम जनता और दुकानदारों से चाइनीज पटाखों न लेने-देने की अपील की गई. साथ ही ये सलाह भी दी गई कि पटाखों की लेबलिंग डीटेल देखकर ही उनकी खरीददारी करें. अगर किसी को प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री की सूचना मिले तो वो चेन्नई के कस्टम कंट्रोल रूम के नंबर पर फोन कर सूचित कर सकता है. इसके लिए विभाग ने नंबर 044-25246800 जारी किया है.



    चोरी-छिपे हो रहा चाइनीज पटाखों का व्यापार
    वैसे सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद दिवाली पर चाइनीज पटाखों का आयात हो रहा है. Mail Today की एक रिपोर्ट के अनुसार गाजियाबाद और मेरठ के रास्ते चाइनीज पटाखे लाए जा रहे हैं और इन्हें बड़े-बड़े गोदामों में भरकर रखा जा रहा है. यहीं से दुकानदार इन्हें उठा और अपनी दुकानों में सजा रहे हैं. इनमें चकरी, अनार, रॉकेट, रोमन कैंडल और रावण बम जैसे पटाखे हैं. हालांकि पुलिस इसपर कड़ी नजर रखे हुए हैं. दिल्ली पुलिस ने कुछ दिनों पहले ही द्वारका के एक गोदाम से 146 किलोग्राम चाइनीज पटाखे पकड़े. Directorate of Revenue Intelligence (DRI) ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि है कि इस तरह की गतिविधियों पर नजर रखी जाए और पकड़े जाने पर कड़ी कारवाई हो.

    क्यों है चाइनीज पटाखों की कम कीमत
    चीन से आयात होने के बावजूद पटाखों की कीमत कम क्यों है, ये सवाल भी उठा. काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ने इस पर बाकायदा रिसर्च की और पाया कि ड्रैगन से आए पटाखों में पोटैशियम क्लोरेट और पेराक्लोरेट का इस्तेमाल होता है, ये दोनों ही रसायन सस्ते हैं लेकिन पर्यावरण और सेहत के लिए काफी खतरनाक हैं. इन्हीं सस्ते केमिकल्स के कारण वहां से आए पटाखे सस्ते होते हैं. वहीं भारत में निर्मित पटाखों में पोटैशियम नाइट्रेट और एल्युमिनियम पाउडर रहता है, जो अपेक्षाकृत महंगा लेकिन सुरक्षित है. चीन के सस्ते पटाखों की वजह से दिल्ली में खासकर प्रदूषण का स्तर मानकों से काफी ऊपर हो गया. तभी सबसे पहले साल 2004 में इनका विरोध शुरू हुआ जो अब जाकर रंग ला रहा है.

    देसी ग्रीन पटाखों को बढ़ावा देने की पहल हुई है


    ग्रीन पटाखों को बढ़ावा देने की पहल
    चाइनीज पटाखों की जोड़ पर सरकार ने देसी ग्रीन पटाखों को बढ़ावा देने की पहल की है. केंद्र सरकार (Modi Government)द्वारा जारी Green crackers में कई तरह के प्रचलित पटाखे शामिल हैं, जैसे कि अनार, पेंसिल, चकरी, फुलझड़ी और सुतली बम. इन्हें इकोफ्रेंडली पटाखे भी कहा जा रहा है क्योंकि ये पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत काफी कम नुकसानदेह हैं. वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद या काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) ने इसका फॉर्मूला तैयार किया है. जिसपर करीब 230 सहमति-पत्रों और 165 नॉन डिसक्लोजर एग्रीमेंट्स (NDA) हुए हैं, जो पटाखा कंपनियों की तरफ से हैं.

    क्या हैं इकोफ्रेंडली पटाखे
    ग्रीन पटाखे असल में सामान्य पटाखों की तरह ही दिखते और आवाज करते हैं लेकिन इनमें रसायनों की वजह से प्रदूषण लगभग आधा रह जाता है. ग्रीन पटाखे मुख्य तौर पर तीन तरह के होते हैं. एक जलने के साथ पानी पैदा करते हैं जिससे सल्फ़र और नाइट्रोजन जैसी हानिकारक गैसें इन्हीं में घुल जाती हैं. इन्हें सेफ़ वाटर रिलीज़र भी कहा जाता है. दूसरी तरह के स्टार क्रैकर के नाम से जाने जाते हैं और ये सामान्य से कम सल्फ़र और नाइट्रोजन पैदा करते हैं. इनमें एल्युमिनियम का इस्तेमाल कम से कम किया जाता है. तीसरी तरह के अरोमा क्रैकर्स हैं जो कम प्रदूषण के साथ-साथ खुशबू भी पैदा करते हैं.

    ये भी पढ़ें :

    जानें क्यों चीनी लड़कियों से शादी कर चीन में बसने लगे हैं भारतीय लड़के

    खूबसूरत सहयोगी को हटाने वाला थाई किंग उल्टी-सीधी हरकतों के लिए मशहूर

    चीनी मीडिया ने क्यों भारतीय नौसेना को कहा 'अनप्रोफेशनल', तब मिला क्या जवाब 

    Tags: Diwali 2019, Diwali Celebration, Firecracker companies, Firecrackers, India and china

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर