चीन का हाइपरसॉनिक एयरक्राफ्ट, भारत के लिए कितना खतरनाक?

चीन ने दुनिया का पहला हाइपरसॉनिक एयरक्राफ्ट लॉन्च किया है. चीन का दावा है कि वो आवाज़ की रफ्तार से 6 गुना ज्यादा तेज उड़ान भरने में सक्षम है.


Updated: August 13, 2018, 8:22 PM IST
चीन का हाइपरसॉनिक एयरक्राफ्ट, भारत के लिए कितना खतरनाक?
चीन ने दुनिया का पहला हाइपरसॉनिक एयरक्राफ्ट लॉन्च किया है. चीन का दावा है कि वो आवाज़ की रफ्तार से 6 गुना ज्यादा तेज उड़ान भरने में सक्षम है.

Updated: August 13, 2018, 8:22 PM IST
चीन रक्षा क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल करते हुए दुनिया का पहला हाइपरसॉनिक एयरक्राफ्ट लॉन्च किया है. चीन का दावा है कि वो आवाज़ की रफ्तार से 6 गुना ज्यादा तेज उड़ान भरने में सक्षम है. ऐसा दावा किया जा रहा है कि चीन का ये नया एयरक्राफ्ट परमाणु हमला करने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

इसके साथ ही इसकी तेज रफ्तार के कारण इसे किसी भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम से ट्रैक करना भी मुश्किल है. जानिए क्या है इस हाइपरसॉनिक विमान की खासियत और चीन के दुश्मनों के लिए ये कितना खतरनाक?

चीन का नया हथियार
बीजिंग के चाइना एकेडमी ऑफ एयरोस्पेस एयरो डायनामिक्स के मुताबिक चीन ने 3 अगस्त को अपना ये हाइपरसॉनिक एयरक्राफ्ट लॉन्च किया था. रिपोर्ट के मुताबिक इस एयरक्राफ्ट ने 30km ऊंची उड़ान भरी.

जबकि इसकी रफ्तार 7300 किमी/घंटा से ज्यादा थी. इसकी खासियत है कि ये बीच फ्लाइट में अपना लक्ष्य बदल सकती है. इससे ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम के रडार पर भी नहीं आ सकता.

स्टैरी स्काई-2 नामक ये एयरक्राफ्ट मल्टीस्टेज रॉकेट है. ये एक वेवराइडर व्हीकल जैसा है, जो अपनी ही शॉकवेव की मदद से हवा में तैरता है.



रफ्तार इसकी ताकत?
इस एयरक्राफ्ट की रफ्तार ही इसकी ताकत है. 7000 किमी प्रति घंटा से ज्यादा की स्पीड से उड़ने वाले स्टैरी स्काई को कोई एयर डिफेंस सिस्टम नहीं पकड़ सकता. इसके जरिए हमले को आसानी से अंजाम दिया जा सकता है. चीन साल 2014 से हाइपर सॉनिक वाहन के परीक्षण पर काम कर रहा था. लेकिन स्टैरी स्काई-2 का टेस्ट अब हुआ है.

अमेरिका-रूस अब तक तैयारी में
चीन ने जो करिश्मा करके दिखा दिया है. अमेरिका और रूस अभी तक उसकी तैयारी में लगा है. अप्रैल 2018 में अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन को हाइपरसॉनिक मिसाइल बनाने के लिए 92.8 करोड़ डॉलर का कॉनट्रेक्ट मिला था.

सवा घंटे में अमेरिका
इसकी रफ्तार का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि महज एक घंटे कुछ मिनट में ही ये चीन से अमेरिका पहुंच सकता है. चीन और अमेरिकी के बीच की दूरी 11671 किमी है.

अगर पड़ोसी भारत की बात की जाए तो कुछ ही मिनटों में ये भारत के किसी भी कोने में पहुंच सकता है. चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस एयरक्राफ्ट के जरिए परमाणु हमला भी किया जा सकता है.



चीनी एयरफोर्स की बढ़ेगी ताकत
अगर सब कुछ तय कार्यक्रम के मुताबिक हुआ तो चीन इस एयरक्राफ्ट को जल्द ही अपनी एयरफोर्स में शामिल करेगा. ऐसा करने वाला चीन, दुनिया का पहला मुल्क होगा. ऐसा होने के बाद चीनी एयरफोर्स की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. भारत का पड़ोसी मुल्क होने के चलते, इसका सबसे बड़ा खतरा भी हमें ही है.
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