कौन है वो जांबाज महिला पत्रकार, वुहान के हालात दिखाने पर China ने जिसे जेल में डाला

महिला पत्रकार झांग झान (Photo- news18 English via YOUTUBE / AFP)

महिला पत्रकार झांग झान (Photo- news18 English via YOUTUBE / AFP)

पेशे से वकील झांग झान ने वुहान के अस्पतालों से लाइव रिपोर्टिंग की. अब वे 4 से 5 सालों के लिए कैद में हैं, जहां ट्यूब के जरिए उन्हें जबरन खाना दिया जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 2, 2021, 7:43 AM IST
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कोरोना वायरस को लेकर अब भी चीन पर राज छिपाने के आरोप लग रहे हैं. लगातार कई ऐसे डॉक्टरों को चीन ने प्रताड़ित किया, जो वायरस के बारे में दुनिया को सचेत कर रहे थे. अब उसकी तलवार एक पत्रकार पर गिरी है, जो कोरोना संक्रमण की रिपोर्टिंग वुहान से कर रही थी. महिला पत्रकार झांग झान (journalist Zhang Zhan) को 4 साल की कैद सुनाई गई है. उनका अपराध है- लड़ाई-झगड़ा और मुश्किलें पैदा करना.

आपको याद तो होगा कि आज से ठीक एक साल पहले वुहान से ही कोरोना संक्रमण की छुटपुट खबरें आनी शुरू हुई थीं. जिसके बाद तेजी से बीमारी ने दुनियाभर को गिरफ्त में ले लिया. इसके कुछ समय बाद कई चीनी विशेषज्ञों ने अपने ही देश की सरकार पर आरोप लगाया कि बीमारी संक्रामक है, ये जानने के बाद भी सरकार चुप रही. हालांकि वे सारे डॉक्टर इसी बीमारी की चपेट में आकर या तो मारे गए या फिर रहस्यमयी तरीके से गायब हो गए.

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अब अगला नंबर महिला पत्रकार झांग का है. झांग ने वुहान के ढेरों अस्पतालों में जाकर रिपोर्टिंग की, जब कोरोना अपने पीक पर था. साथ ही उन्होंने पत्रकारों के अरेस्ट के खिलाफ भी रिपोर्टिंग की, जो कोरोना के चलते स्थानीय प्रशासन की कैद में थे.

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जिस तरह से सरकार ने कोरोना को कंट्रोल किया, वो तरीका अपने आप में काफी बुरा था- सांकेतिक फोटो (pixabay)

37 साल की झांग पेशे से एक वकील और शंघाई की रहने वाली हैं. वे फरवरी में वुहान पहुंची, जब वहां कोरोना संक्रमण अपने चरम पर था. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चल रहा था कि चीन के इस हिस्से में लगाता श्मशान घाट चालू हैं. हालांकि खुद चीन ने ऐसा कोई खुलासा नहीं किया. इंडियन एक्सप्रेस ने अमेरिकी मीडिया न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से बताया है कि इस दौरान चीन सरकार वायरस का संक्रमण रोकने में इतनी व्यस्त थी कि दूसरे राज्यों से आने वालों पर रोक नहीं लगा सकी. इसी बात का फायदा उठाते हुए दूसरे राज्यों के चीनी नागरिक यहां के हालात जानने आए. झांग इसी का हिस्सा थीं.

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झांग हालांकि पेशेवर वकील थीं, लेकिन वुहान के हालात ने उन्हें पत्राकारिता पर मजबूर कर दिया. वे कैमरा लेकर स्थानीय भीड़भाड़ वाले अस्पताल जाने लगीं और वहां लोगों से बात करने लगीं. लाइव वीडियो बनाने के अलावा वे आर्टिकल लिखकर सोशल मीडिया पर भी डालने लगीं. इस दौरान वुहान के बाहर रह रहे चीनी लोगों ने वहां के असल हालात के बारे में जाना.

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बाद में झांग ने कहा कि जिस तरह से सरकार ने कोरोना को कंट्रोल किया, वो तरीका अपने आप में काफी बुरा था. नियंत्रण के लिए धमकियों का सहारा लिया गया. झांग ने इसे देश का दुर्भाग्य कहा. ये झांग के आखिरी शब्द थे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया.

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कोरोना वायरस को लेकर अब भी चीन पर राज छिपाने के आरोप लग रहे हैं सांकेतिक फोटो (pixabay)

14 मई को झांग एकाएक गायब हो गईं और अगले रोज पता चला कि वे हिरासत में हैं. नवंबर में झांग पर औपचारिक चार्ज लगे. कहा गया कि वे वीडियो, टेक्स्ट आदि के जरिए सोशल मीडिया पर गलत जानकारियां फैला रही थीं. बता दें कि झांग ने चीन के सोशल मीडिया वी चैट के अलावा ट्विटर और यूट्यूब का भी इस्तेमाल किया था. चीन में ये दोनों मीडिया बैन हैं, लेकिन वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) की मदद से ऐसा बहुतेरे लोग करते हैं ताकि वे दुनिया से कनेक्ट रह सकें.

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गलत जानकारियां फैलाने के अलावा झांग पर विदेशी मीडिया को इंटरव्यू देने का भी आरोप लगा है. स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल झांग को 4 से 5 साल की कैद सुनाई है. इसी दौरान जेल में ही उनका ट्रायल होगा. इधर झांग अपनी हिरासत के खिलाफ अकेली डटी हुई हैं. वे लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं और उनकी सेहत लगातार गिर रही है. उनके वकील का कहना है कि झांग को जबर्दस्ती नली के सहारे खाना दिया जा रहा है और उनके हाथ भी बांध दिए गए ताकि वे नली निकाल न सकें.

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पहले भी कोरोना पर ही रिपोर्टिंग के लिए चीन ने कई रिपोर्टरों को हिरासत में लिया था- सांकेतिक फोटो (pixabay)

वैसे झांग अकेली नहीं, उनके पहले भी कोरोना पर ही रिपोर्टिंग के लिए चीन ने कई रिपोर्टरों को हिरासत में लिया था. बीबीसी की एक रिपोर्ट में ऐसे कई नामों का खुलासा हुआ है. कई अपने परिवार समेत नजरबंदी में हैं तो कुछ अब भी लापता हैं.

अब मानवाधिकार कार्यकर्ता झांग की हिरासत के खिलाफ आवाजें उठा रहे हैं. इसके साथ ही अमेरिका और यूरोपियन यूनियन भी झांग को रिहा करने की मांग कर रहे हैं. इधर कई डॉक्टर लापता हैं, जो कोरोना की संक्रामकता और सरकार की लापरवाही पर बोल रहे थे. कोरोना वायरस से सबसे पहले अधिकारियों को अलर्ट करने वाली चीन के वुहान शहर की डॉक्‍टर एई फेन का अब तक कोई अता-पता नहीं. वहीं उनके साथी डॉक्‍टर ली वेलिआंग की कोरोना से ही मौत हो गई.

इस बीच ये भी जान लें कि चीन में फ्री प्रेस या बोलने की आजादी नहीं. Committee to Protect Journalists की एक रिसर्च के मुताबिक साल 2020 में चीन अपने पत्रकारों के खिलाफ सबसे बड़ा जेलर बनकर सामने आया.

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