क्यों इंडियन स्टार्टअप्स में पैसा लगाने के लिए मजबूर हो गया है चीन?

चीनी कंपनियों ने शुरू में बेशक इंडियन स्टार्टअप के लिए ठंडा रुख दिखाया था लेकिन अब अगर वो आगे बढ़ रहे हैं तो निश्चित तौर पर अपने नफे-नुकसान का आंकलन करके ही आए हैं

News18Hindi
Updated: July 29, 2019, 9:14 PM IST
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एक जमाना था जब साल 2010 के बाद इंडियन स्टार्टअप्स ने नए आइडियाज के साथ न्यू टैक्नॉलॉजी आधारित नए बिजनेस शुरू किये तो अमेरिका, यूरोप और जापान ने पूरी दिलचस्पी दिखाई लेकिन चीन इससे दूर ही रहा. ना जाने क्यों चीन के लिए इंडियन स्टार्टअप उनके प्रतिद्वंद्वी थे. लिहाजा चीन के निवेशकों ने उसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. मगर अब अचानक उल्टा होने लगा है. बड़ी चीनी कंपनियां इंडियन स्टार्टअप्स पर अपना प्यार लुटाने लगी हैं.

पिछले एक साल में अचानक चीनी इनवेस्टर्स के रुख में जो बदलाव आया है, वो तो वाकई हैरान करने वाला है. ये तो साफ है कि चीनी इनवेस्टर दुनियाभर में कहीं भी आंख बंद करके कभी अपना पैसा नहीं लगाता बल्कि पहले ये साफतौर पर समझता है कि वो जहां पैसा लगा रहा है, उससे फायदा होगा या नहीं. अब अगर चीनियों का रुख बदला है तो उसका मतलब है.

इसके दो तीन मतलब तो बहुत स्पष्ट हैं. इंडियन स्टार्टअप्स को शुरु हुए सात - आठ हो चले हैं. इतने सालों में इंडियन स्टार्टअप सेक्टर मेच्योर होने लगा है. ना केवल उसकी बिजनेस की समझबूझ और बढ़ी है तो तकनीक के इस्तेमाल और नए आइडियाज पर काम ज्यादा हो चला है.

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फिर दुनियाभर में पिछले कुछ सालों में ये संदेश लगातार लगाया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की जमीन दमदार है, टेक्नॉलॉजी के ट्रैक पर भारतीयों ने लगातार खुद को ना केवल साबित किया है बल्कि आगे भी बढाया है. भारत में लेबर कमोवेश सस्ता है, ब्राइट ब्रेन के युवाओं की तादाद काफी ज्यादा है.

इंडियन स्टार्टअप ब्राइट आइडियाज से लैस
इंडियन स्टार्टअप की बात की जाए तो इस सेक्टर में नए आइडियाज से लैस यंग इंडियंस ही ज्यादा कदम रख रहे हैं, जो बिजनेस को परंपरागत तरीके से अलग ढंग से करना चाहते हैं. तो ये सारे वो कारण हैं जो चीनियों के लिए अब इंडियन स्टार्टअप से हाथ मिलाने के मुफीद कारण बन गए हैं. चीनियों के बारे में ये हमेशा से कहा जाता है कि वो जल्दबाजी में नहीं बल्कि फूंक-फूंक कर कदम बढाते हैं लेकिन ये कदम सधे हुए होते हैं.
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पिछले एक साल से चीनी निवेशकों ने भारतीय स्टार्टअप में अचानक ज्यादा दिलचस्पी दिखानी शुरू की है


हालांकि इंडियन स्टार्टअप के प्रति चीनियों के उपजे प्यार की वजह ये भी है अमेरिका से उनका व्यापार कम हो रहा है. भविष्य में ये और कम हो सकता है. यानि अमेरिका- चीन के संबंधों पर ट्रेड वार का असर नजर आने लगा है. इसका असर चीन में स्टार्ट अप डील्स पर भी पड़ने लगा है. इसके बाद चीन के निवेशक बाउंड्रीज से बाहर की ओर देखने लगे.

कौन सी हैवीवेट चीनी कंपनियां बढ़ा रही हैं कदम 
चीन की हैवीवेट कंपनियां शुनवेई कैपिटल, फोजुन इंटरनेशनल, टेशेंट होल्डिंग्स, जियोमी और अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग की अगुवाई में भारत के स्टार्ट अप में लगाने के लिए कमर कस चुकी हैं.इसके लिए बैंक ऑफ चीन और कामर्शियल बैंक ऑफ चाइना ने मिलकर इसके लिए पिछले साल मई में एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनाया था. कई चीनी वैंचर कैपिटलिस्ट्स भी ऐसा ही प्लेटफॉर्म बना रहे हैं. नीतिगत  स्तर भारत इसका स्वागत कर रहा है. चीन में भारत का दूतावास खासतौर पर इन मामलों में सहायक बन रहा है. दोनों ही देशों को लगतार है कि साथ में काम करना दोनों के लिए लाभदायक होगा.

कुछ हद पिछले साल इसकी तस्वीर देखने को भी मिली, जबकि चीनी कंपनियों ने भारत में 2.5 बिलियन डॉलर का मोटा निवेश स्टार्ट अप में किया.  भारतीय कंपनियों के लिए भी चीनी निवेश दो तरह का फायदा देता है, वो वित्तीय के अलावा नॉलेज के रूप में होता है. वेंचर गुरुकुल, मीडिया नेट, स्नैलडील, डिजिटल पेमेंट प्रोवाइडर पेटीएम, आनलाइन ट्रेवल फर्म मेक माई ट्रिप, हाइक, हेल्थ टेक स्टार्टअप प्राक्टो और न्यूज एग्रीगेटर डेलीहंट को चीनी निवेश के साथ तकनीक स्तर पर भी मदद मिली.


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चीनी निवेशक अलग तरह के होते हैं
चीन के निवेशकों की अपनी शर्तें होती हैं. वो अमेरिकियों और यूरोपीयंस की तरह बहुत लचीले नहीं होते,  जो स्थानीय फर्मों को उनका स्पेस देने के लिए तैयार रहते हैं. चीनी इनवेस्टर्स लगातार एक्टिव दखल देता है.

चीनी निवेशक आसानी से नहीं मानते बल्कि दो-टूक साफ बात करते हैं. अगर समझ में आ जाए तो फिर आगे बढ़ जाते हैं


हालांकि इंडियन स्टार्टअप के एक सीनियर एग्जीक्यूटिव का कहना है कि अमेरिकी और यूरोपीय निवेशकों की तुलना चीनी निवेशक ज्यादा स्टेट फारवर्ड हैं. सीधी बात करना पसंद करते हैं. बहुत ज्यादा कागजी घुमावो-फिरावों और काल्पनिक हवाबाजी में नहीं उलझते. भारतीय स्टार्टअप के साथ चीनी इन दिनों इसलिए भी ज्यादा नजदीक आ रहे हैं, क्योंकि भारतीय बिजनेस मॉडल, कल्चर और आवश्यकताओं को  अपने आसपास पाते हैं.

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी चीन अगर पिछले साल इंडियन स्टार्टअप में करीब 2.5 बिलियन डॉलर का निवेश किया तो इस साल करीब एक बिलियन डॉलर लगा चुके हैं. वर्ष 2013 में चीन ने भारत के केवल एक स्टार्ट अप के साथ डील किया था, अब ये तादाद 27 हो गई है, जो और बढ़ने वाली है.

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ग्रामीण भारत और छोटे शहरों पर ज्यादा ध्यान
हालांकि चीनी निवेशकों की दिलचस्पी उन स्टार्टअप में ज्यादा है, जो ग्रामीण भारत पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. भारत में चीन के निवेश पर नजर रखने वाली एक कंपनी कहती है कि भारत में अब इकोनॉमी की गतिविधियां टायर टू और टायर थ्री सिटीज में ज्यादा देखने को मिल रही हैं, वो चीनी कंपनियों को शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा आकर्षित कर रहे हैं.

भारत सरकार ने भी पिछले कुछ बरसों में ये कोशिश की है कि चीनी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए राजी किया जाए


भारत स्टार्ट अप ही क्यों
सीट्रिप चीन की सबसे बड़ी आनलाइन ट्रेवल एजेंसी है, जिसने अप्रैल में मेक माई ट्रिप में 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी. सीट्रिप ग्लोबल टीम के सदस्य वेई युआन मिन ने चीन के साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट से कहा कि मेक माई ट्रिप ने आनलाइन मार्केट में तेजी से ग्रो किया है. वो भारत के बाजार में जाना पहचाना ब्रांड बन चुका है. उनके प्रोडक्ट्स और सर्विसेज, मैनेजमेंट टीम उम्मीद जगाने वाली है. फिर एक बार जो सबसे खास है वो है ग्रोथ. जिन स्टार्टअप में ग्रोथ नजर आ रहा है, उसमें निश्चित तौर पर चीन की दिलचस्पी है.

पिछले दिनों ये खबरें आईं थीं कि पेटीएम की बड़े हिस्सेदार अलीबाबा उसके प्रदर्शन से खुश नहीं है


भारत स्टार्ट अप के लिए तीसरा बड़ा इकोसिस्टम
अमेरिका और चीन के बाद भारत में दुनिया के तीसरे बड़े स्टार्ट अप का इकोसिस्टम है. वहां कई एंटरप्रेन्योर वेंचर विविधतापूर्ण तरीके से उभर रहे हैं. नैसकॉम का मानना है कि अगले साल तक देश में 12 हजार स्टार्टअप होंगे. पिछले साल इनकी संख्या 7200 थी. तब 1200 नई टेक फर्म्स ने इस सेक्टर में प्रवेश किया था.

बीजिंग की टेक्नॉलॉजी कंपनी जियोमी ने अगले पांच सालों में 100 भारतीय स्टार्टअप्स में एक बिलियन डॉलर लगाने का वादा किया है. ये सभी कंपनियां किसी ना किसी रूप में जियोमी के साथ बिजनेस कर रही हैं. ये मोबाइल गेमिंग,सर्विस प्रोवाइडर, वैल्यू एडेड सर्विस में हैं.

लेकिन अगर इंडियन स्टार्टअप सेक्टर के लिए ऊंची उम्मीदें तो कुछ निराश करने वाली खबरें भी हैं. मसलन पिछले दिनों ये रिपोर्ट थी कि पेटीएम की बड़ी शेयर होल्डर अलीबाबा भारतीय कंपनी के प्रदर्शन से खुश नहीं थी.

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First published: July 29, 2019, 9:07 PM IST
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