क्यों चीन में भुखमरी के लिए एक पॉपुलर शो को दिया जा रहा दोष

क्यों चीन में भुखमरी के लिए एक पॉपुलर शो को दिया जा रहा दोष
चीनियों में बेहद लोकप्रिय इस शो में होस्ट खाते-खाते पूरा शो करता है- सांकेतिक फोटो (Photo-goodfreephotos)

मुकबंग (Mukbang) नामक शो पर संकट के बादल छाए हैं. चीन की सरकारी मीडिया (state media in China) के मुताबिक 'बड़े पेट वाले' इन लोगों के कारण भुखमरी फैली है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 18, 2020, 4:20 PM IST
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कोरोना के बाद चीन अब बाढ़ का सामना कर रहा है. देश के कई हिस्से पानी में डूबे होने के कारण देश में बुरी तरह से खाद्यान्न संकट आ चुका है. ऐसे में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक नया आदेश दे दिया. उन्होंने ऑपरेशन 'क्लीन योर प्लेट' कैंपेन शुरू किया है. इसके तहत खाने की थाली में उतना ही लेने की बात हो रही है, जितनी भूख हो. वैसे इसके कारण चीन के पॉपुलर शो मुकबंग पर संकट आ गया है. चीनियों में बेहद लोकप्रिय इस TV शो में होस्ट खाते-खाते पूरा शो करता है.

क्या है पूरा मामला
अटकलें हैं कि कोरोना के कारण चीन में काफी तबाही मची थी. प्रभावित लोगों का आंकड़ा उससे कहीं ज्यादा था, जो चीन ने दुनिया के सामने रखा. कोरोना पर जैसे-तैसे वहां लगाम तो लग सकी लेकिन अब चीन अनाज की कमी झेल रहा है. हाल ही में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसे दूर करने के लिए ऑपरेशन एम्प्टी प्लेट अभियान की शुरुआत की. इसके तहत लोगों से न केवल घरों में खाना बचाने की अपील हुई, बल्कि एक अनूठा तरीका निकाला गया.

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चीन में अब रेस्त्रां जाने पर वहां लोगों का वजन लिया जाता है और उसके मुताबिक ही उन्हें खाने की क्वांटिटी मिलती है. खुद स्टेट न्यूज एजेंसी शिन्हुआ में जिनपिंग ने रेस्त्रां मालिकों से एक डिश कम सर्व करने की बात की. इसके बाद से हालांकि लोग काफी परेशान तो हैं लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ खुलकर कुछ कह नहीं सकते.



न्यूज एजेंसी शिन्हुआ में जिनपिंग ने रेस्त्रां मालिकों से एक डिश कम सर्व करने की बात की (Photo-pixabay)


क्यों हो रही है इतनी सख्ती
वैसे खाद्यान्न की कमी का कारण कोरोना या बाढ़ ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों के साथ बढ़ता तनाव भी है. द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन लगभग 30% अनाज बाहर से मंगवाता है. अब तनाव बढ़ने के कारण चीन अपना फूड स्टोर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. क्लीन प्लेट कैंपेन इसी का हिस्सा है. खुद चीन के खाद्यान्न संबंधी विभाग के उप निदेशक वू जिदान के अनुसार, देश में 32.6 अरब अमेरिकी डॉलर के भोजन की बर्बादी होती है. ऐसे में खाना बचाना फिलहाल चीन के लिए सैन्य ताकत बढ़ाने जितना जरूरी हो चुका है.

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मुकबंग नाम के शो पर गिरेगी गाज
इस कैंपेन का असर चीन के ट्रेडिशनल शो मुकबंग पर पड़ने वाला है. मुकबंग दो शब्दों के मिलने से बना है, जिसका मतलब है खाते हुए ब्रॉडकास्ट होना. माना जाता है कि चीन ने इस शो का कंसेप्ट दक्षिण कोरिया से लिया था, जहां 2010 के दौरान ये काफी पॉपुलर था. इसके बाद से चीन ने भी हल्के-फुल्के बदलावों के साथ इसे अडॉप्ट कर लिया. China National Radio के मुताबिक इसमें होस्ट ढेर सारा खाना खाते हुए अकेले ही शो करता है. ये शो बाद में वेबकास्ट होता है. कई बार इसका लाइव भी होता है. इस शो की चीन में काफी लोकप्रियता है और एक होस्ट करोड़ों में कमाता है.

मुकबंग दो शब्दों के मिलने से बना है, जिसका मतलब है खाते हुए ब्रॉडकास्ट होना (Photo-pixabay)


शो को दिया जा रहा दोष
अब शी जिनपिंग के खाना कम खाने की अपील के बाद से स्टेट मीडिया इस शो की बुरी तरह से आलोचना कर रहा है. वो उन लोगों को लताड़ रहा है जो खुद को बड़े पेट का कहते हुए दूसरों से थोड़ा ज्यादा खाते हैं. चीनी मीडिया खुले तौर पर ऐसे लोगों को भुखमरी का दोषी कह रहा है. यही वजह है कि माना जा रहा है कि जल्द ही इस टीवी शो पर आधिकारिक तौर पर रोक लग सकती है.

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क्या होता है शो में
वैसे दक्षिण कोरिया से शुरू हुए इस शो के चीनी संस्करण में होस्ट ऑनलाइन चैट रूम में बैठता है. उसके पास खाने के लिए पास्ता से लेकर नूडल्स और कई तरह की डिशेज होती हैं. वो यही खाते हुए न केवल खाने, बल्कि दुनिया-जहान की बातें करता है. चीन में इस शो को Chibo भी कहते हैं. जापान में भी ये शो काफी पॉपुलर है. वहां खाना बनाने के बाद होस्ट ढेर सारा खाना खाता है और उतनी देर तक लगातार बोलता भी रहता है.

गौरैया मारने के कारण साठ के दशक की शुरुआत में चीन में भयंकर अकाल पड़ा


अनाज का संकट नया नहीं चीन में
ये देश पहले भी खाद्यान्न संकट झेल चुका है. दरअसल साल 1950 से देश आर्थिक संकट से जूझ रहा था. इससे उबरने के लिए जेडोंग ने Great Leap Forward प्लान बनाया. इसके कई हिस्से थे. इन्हीं में से एक था Four Pests Campaign. नेता के अनुसार ये एक तरह का हाइजीन कैंपेन था, जिससे लोगों की जान और अनाज दोनों बचने वाले थे.

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ये और बात है कि इस कैंपेन के तहत गौरैया मारने के बाद देश में खाद्यान्न संकट बुरी तरह से गहराया. यहां तक कि माओ को अपना आदेश वापस लेना पड़ा. उसने टिड्डियों को मारने का आदेश जारी किया. साठ के दशक की शुरुआत में चीन में भयंकर अकला पड़ा. माना जाता है कि इस दौरान 2.5 करोड़ से भी ज्यादा चीनी आबादी मारी गई. इसे Great Chinese Famine के नाम से जाना जाता है. वैसे चीन के सरकारी आंकड़ों में भुखमरी से मौत के आंकड़े 1.5 करोड़ बताए जाते हैं.
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