4 दिन में 3 अंतरिक्ष प्रक्षेपण, क्या अमेरिका से आगे निकलने की तेजी में है चीन

चीन (China) ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को कोविड-19 महामारी के पहले के स्तर पर ला खड़ा किया है. (तस्वीर: Testing/shutterstock)

China for Space Race: चीन ने हाल ही में चार दिनों के अंदर तीन अंतरिक्ष प्रक्षेपण (Space Launch) किए हैं इस तरह वह अंतरिक्ष मामलों में कोविड पूर्व के स्तर पर पहुंच गया है. इसे अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में उसके प्रयासों में तेजी माना जा रहा है

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    पिछले कुछ दिनों में अंतरिक्ष के क्षेत्र (Space Exploration) में चीन (China) की गतिविधियां बहुत तेज से बढ़ी हैं.  तीन हफ्ते पहले ही तीन चीनी अंतरिक्ष यात्री अपने देश के निर्मणाधीन स्पेस स्टेशन तियानगोन पहुंचे हैं. अब चीन ने चार दिन के अंदर ही तीन उपग्रह प्रक्षेपित (Satellite lauch) किए हैं. ऐसा लग रहा है कि चीन अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा की होड़ में बहुत तेजी से आगे बढ़ना चाहता है. इतना ही नहीं वह अंतरिक्ष के क्षेत्र में ऐसे तमाम प्रयास भी कर रहा है जिससे वह दुनिया का खैरख्वाह दिख सके. चीन की अमेरिका से खुली प्रतिद्वंदता देखते हुए वह तकनीकी क्षेत्र में हर तरह से आत्मनिर्भर बनना चाहता है. इसके लिए वह अंतरिक्ष क्षेत्र में भी खुद को एक महाशक्ति के तौर पर देखना चाहता है.

    अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यों में तेजी
    चीन की अंतरिक्ष संबंधी गतिविधियां की गति उसके कोविड काल के पहले के स्तर पर वापस आ गई हैं. छह चुलाई को दक्षिण पश्चिम चीन में स्थित जीचांग सैटेलाइट सेंटर से हुआ प्रक्षेपण चीन का सबसे ताजा प्रक्षेपण है. चीन पृथ्वी की कक्षा में किए जाने वाले प्रक्षेपण को लेकर खुल कर नहीं बोलता है. उसके अंतरिक्ष कार्यक्रमों की जानकारी भी खुल कर नहीं दी जाती है.

    चीन की महत्वाकांक्षा
    पिछले कई सालों से चीन खुद को अंतरिक्ष के क्षेत्र में अमेरिका और रूस के स्तर पर लाना चाहता है. इसके लिए वह चंद्रमा पर मानव अभियान और खुद का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन स्थापित करने के लिए काम कर रहा है. वह अपने अभियानों को हमेशा ही मानवता और विज्ञान के लिए समर्पित बताता आया है. लेकिन उसकी अपनी महत्वाकांक्षा और अमेरिका से प्रतिद्वंदता किसी से छिपी नहीं है.

    स्पेस स्टेशन पर काम जारी
    स्पेस स्टेशन की दिशा में चीन आगे बढ़ भी गया है. स्टेशन का प्रमुख मॉड्यूल तैयार है और वहां चीनी अंतरिक्ष यात्री पहुंच कर उसे आगे लिए तैयार करने में लगे हैं. इसे खत्म होने की कगार पर पहुंच रहे 20 साल से भी ज्यादा पुराने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का विकल्प बनाने की तैयारी है. इसके लिए उसने कई देशों से करार भी कर लिया और कई से करने की कोशिश भी कर रहा है.

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    चीन (China) ने अपने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का प्रमुख माड्यूल स्थापित कर लिया है जिस पर काम करने के लिए तीन यात्री पहुंच चुके हैं. (तस्वीर: shutterstock)


    संचार के लिए उपग्रह
    हालिया प्रक्षेपणों में चीन ने लॉन्गमार्च 3सी रॉकेट भेजा है जिसमें तियानलियान डेटा ट्रैकिंग और रिले संचार सैटेलाइट भूस्थिर कक्षा स्थापित करने के लिए भेजा गया था. इस यान को चीन के तियानगोंग स्पेस स्टेशन के शेनजोऊ-12 अंतरिक्ष यात्री संचार कार्यों के लिए उपयोग करेंगे.

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    मौसम के लिए
    इससे पहले मौसम अनुसंधान संबंधी सैटेलाइट लॉन्च किया गया था. चीन की सीसीटीवी मीडिया ने इस बात की पुष्टि की है कि स प्रक्षेपण में 11 रिमोट सेंसिंग उपकरण हैं जो 8 साल तक चीन को वायुमंडलीय तापमान, आर्द्रता और मौसम संबंधी अन्य जानकारी देगा जिससे मौसम का पूर्वानुमान बेहतर तरीके से लगाया जा सकेगा.

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    चीन (China) चंद्रमा पर मानव अभियान भेजने के अलावा रूस के साथ वहां रिसर्च स्टेशन बनाने की तैयारी भी कर रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    और तस्वीरों वाले सैटेलाइट
    इससे पहले 2 जुलाई को लॉन्ग मार्च 2डी रॉकेट के जरिए व्यवसायिक जिलिन-1 वाइडबैंड 001 बी पृथ्वी अवलोकन उपग्रह भेजा गया था. इसमें जिलिन 1 गाओफेन 3डी उच्च विभेदन तस्वीरें लेने वाले सैटेलाइट और जिंगशिदाई के 10 रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट भी थे.

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    इसी बीच पृथ्वी की ओर आने वाले क्षुद्रग्रहों के खतरे निपटने के लिए चीन ने प्रस्ताव दिया है कि वह एक बड़ा यान प्रक्षेपित कर ऐसे पिंडों की दिशा बदल सकता है. चीनी शोधकर्ताओं ने गणना की है कि इसके लिए उन्हें केवल 23 लॉन्ग मार्च रॉकेट की जरूरत होगी. चीन रूस के साथ चंद्रमा पर रिसर्च स्टेशन बनाने की तैयारी में भी लगा हुआ है.

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